Chronic Kidney Symptoms : मानव शरीर में खून को साफ करने और जहरीले पदार्थों को बाहर निकालने वाली किडनी अगर सुस्त पड़ जाए, तो इसका सबसे पहला असर आपकी त्वचा पर नजर आता है।
किडनी केवल यूरिन बनाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह शरीर में नमक, पोटेशियम और एसिड की मात्रा को नियंत्रित करने के साथ-साथ महत्वपूर्ण हार्मोन भी रिलीज करती है।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, जब किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, तो शरीर में विषाक्त पदार्थों (Toxins) का जमाव होने लगता है, जिससे स्किन अपनी प्राकृतिक चमक खो देती है और गंभीर बीमारियों के लक्षण दिखने लगते हैं।
बेतहाशा रूखापन और खुजली
अगर आपकी स्किन अचानक खुरदुरी, परतदार और फटी-फटी महसूस होने लगी है, तो यह साधारण ड्राईनेस नहीं हो सकती।
नेशनल किडनी फाउंडेशन की रिपोर्ट बताती है कि जब किडनी खून में मिनरल्स और पोषक तत्वों का सही संतुलन नहीं बना पाती, तो त्वचा में खुजाल और रूखापन बढ़ने लगता है। यह अक्सर ‘एडवांस किडनी रोग’ का एक बड़ा प्रारंभिक संकेत होता है।
रंगत में बदलाव और विषाक्तता
स्वस्थ किडनी रक्त को फिल्टर कर उसे शुद्ध रखती है, लेकिन इसकी क्षमता घटते ही शरीर में टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं। इसका सीधा असर त्वचा के रंग पर पड़ता है।
कई मामलों में मरीजों की त्वचा का रंग हल्का पीला, गहरा भूरा या ग्रे शेड में बदलने लगता है। यह इस बात का सबूत है कि आपकी किडनी रक्त को सही ढंग से साफ नहीं कर पा रही है और आप क्रॉनिक किडनी डिजीज की चपेट में आ रहे हैं।
वॉटर रिटेंशन और सूजन
किडनी का मुख्य कार्य शरीर से अतिरिक्त तरल पदार्थ और सोडियम (नमक) को बाहर निकालना है। जब फिल्टरिंग प्रक्रिया बाधित होती है, तो यह पानी शरीर के ऊतकों में जमा होने लगता है।
इसके परिणामस्वरूप चेहरे पर भारीपन, आंखों के नीचे पफिनेस, और पैरों व तलवों में स्पष्ट सूजन दिखाई देने लगती है। अंगूठे से दबाने पर अगर सूजन वाली जगह गड्ढा बन जाए, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।
जिद्दी रैशेज और छोटे दाने
शरीर से गंदगी बाहर न निकलने की स्थिति में त्वचा पर छोटे-छोटे दाने या रैशेज उभर आते हैं। ये रैशेज देखने में बहुत सामान्य लग सकते हैं, लेकिन इनमें होने वाली तीव्र खुजली इंसान को बेचैन कर देती है।
यदि किसी व्यक्ति के शरीर पर बिना किसी एलर्जी के अचानक बहुत अधिक रैशेज दिखने लगें, तो यह किडनी के गंभीर रूप से डैमेज होने का इशारा हो सकता है।
जोड़ों पर कैल्शियम का जमाव
किडनी शरीर में फास्फोरस और सोडियम जैसे मिनरल्स को बैलेंस करती है। जब यह संतुलन बिगड़ता है और फास्फोरस का स्तर बढ़ जाता है, तो शरीर में कैल्शियम के छोटे डिपॉजिट्स बनने लगते हैं।
ये अक्सर कोहनी, घुटनों और उंगलियों के जोड़ों के पास छोटी गांठों के रूप में दिखाई देते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन लक्षणों को शुरुआती स्तर पर पहचानकर सही खान-पान और इलाज से डायलिसिस जैसी स्थिति से बचा जा सकता है।
















