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एम्स ऋषिकेश के नाम पर चल रहा फर्जी भर्ती गिरोह बेनकाब, तीन जालसाज रंगे हाथ दबोचे गए

एम्स ऋषिकेश के सुरक्षा दस्ते ने बैराज रोड पर स्टिंग ऑपरेशन कर फर्जी भर्ती गिरोह के 3 सदस्यों को दबोचा। किच्छा सेटेलाइट सेंटर में नौकरी के नाम पर फर्जी पत्र देकर 2 लाख ऐंठ रहे थे।

Published On: September 16, 2026 7:57 PM
AIIMS Rishikesh Job Fraud

HIGHLIGHTS

  • ऋषिकेश बैराज रोड पर क्रेटा कार से तीन संदिग्ध जालसाज पकड़े गए।
  • आरोपियों के पास से 2 लाख रुपये कैश और दो फर्जी नियुक्ति पत्र मिले।
  • नर्सिंग ऑफिसर और एमटीएस (MTS) पदों के नाम पर बेरोजगारों से ठगी हो रही थी।
  • पकड़े गए तीनों आरोपी उधम सिंह नगर जिले के किच्छा इलाके के निवासी हैं।
  • एम्स प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सभी आधिकारिक नियुक्तियां सिर्फ वेबसाइट के जरिए होती हैं।

दून हॉराइज़न, ऋषिकेश (16 सितम्बर): एम्स ऋषिकेश के सुरक्षा दस्ते ने बैराज रोड पर जाल बिछाकर उन तीन शातिरों को धर दबोचा, जो ऊधमसिंह नगर में तैयार हो रहे एम्स सैटेलाइट सेंटर किच्छा में सीधी नौकरी दिलवाने का झांसा देकर युवाओं की गाढ़ी कमाई लूट रहे थे।

पकड़े गए आरोपियों के पास से मौके पर दो लाख रुपये नकद, फर्जी नियुक्ति पत्र और एक क्रेटा कार बरामद हुई है। पूछताछ में पुष्टि हुई कि तीनों आरोपी मूल रूप से किच्छा क्षेत्र के ही रहने वाले हैं।

बैराज रोड पर स्टिंग ऑपरेशन और गिरफ्तारी

दरअसल, संस्थान को बीते कुछ दिनों से लगातार गुप्त इनपुट मिल रहे थे कि निर्माणाधीन सैटेलाइट केंद्र में बैकडोर एंट्री का लालच देकर युवाओं से मोटी रकम वसूली जा रही है। मामले की गंभीरता को भांपते हुए उप मुख्य सुरक्षा अधिकारी एवं सहायक कमांडेंट अनिल चंद्र के नेतृत्व में सुरक्षा दस्ते ने एक खुफिया योजना बनाई।

टीम के ही एक सदस्य को फर्जी अभ्यर्थी बनाकर गिरोह से संपर्क साधने भेजा गया। जैसे ही बैराज रोड पर खड़ी सफेद क्रेटा कार में लेनदेन की बात पक्की हुई और आरोपियों ने कथित जॉइनिंग लेटर थमाया, पहले से मुस्तैद सुरक्षाकर्मियों ने गाड़ी को चारों तरफ से घेर लिया।

नर्सिंग ऑफिसर और MTS के जाली दस्तावेज

जब्त किए गए कागजात की पड़ताल में पता चला कि जालसाज तकनीकी और गैर-तकनीकी दोनों श्रेणियों के पदों का सौदा कर रहे थे। एक फर्जी दस्तावेज नर्सिंग ऑफिसर (Nursing Officer) पद के लिए था, जबकि दूसरा मल्टीटास्किंग स्टाफ (MTS) के नाम पर तैयार किया गया था।

अनिल चंद्र ने बताया कि आरोपियों को मय वाहन, जाली दस्तावेज और दो लाख की नकदी समेत एम्स पुलिस चौकी के हवाले कर दिया गया है। पुलिस अब इस बात की कड़ियां जोड़ रही है कि जाली मुहरें और लेटरहेड कहां छापे गए थे और क्या इस गिरोह के तार किसी स्थानीय प्रिंटिंग प्रेस या बड़े सिंडिकेट से जुड़े हैं।

संस्थान की दो-टूक: बिचौलियों से रहें सावधान

एम्स ऋषिकेश के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. श्रीलोय मोहंती ने साफ किया कि एम्स मुख्य परिसर हो या उधम सिंह नगर का किच्छा सैटेलाइट सेंटर, किसी भी पद पर सीधी भर्ती का कोई प्रावधान नहीं है। संस्थान में तृतीय व चतुर्थ श्रेणी से लेकर मेडिकल पदों तक की समूची प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, प्रतियोगी परीक्षा और मेरिट के आधार पर ही संपन्न होती है।

उन्होंने अभ्यर्थियों को ताकीद की कि किसी भी अनाधिकृत व्यक्ति के झांसे में आने के बजाय केवल एम्स की आधिकारिक वेबसाइट (aiimsrishikesh.edu.in) पर जारी विज्ञापन ही देखें। यदि कोई भी व्यक्ति नियुक्ति का वादा कर धन की मांग करे, तो तुरंत स्थानीय पुलिस अथवा संस्थान के सतर्कता सेल को सूचित करें।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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