दून हॉराइज़न, देहरादून (18 सितंबर) : पर्वतीय राज्य में अनियंत्रित शहरी विकास और मनमाने निर्माण कार्यों पर नकेल कसने के लिए शासन स्तर पर बड़ा कदम उठाया गया है। आवास विभाग ने केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए बहुप्रतीक्षित यूनिफाइड जोनिंग रेगुलेशन 2025 (Uttarakhand Land Use Rules) की अधिसूचना आधिकारिक तौर पर जारी कर दी है। इस नए बदलाव के बाद अब प्रदेश के शहरी इलाकों में आवासीय जमीन पर व्यावसायिक परिसरों का निर्माण कराना आसान नहीं रह गया है।
बदले गए निर्माण कार्य के नियम
बीते बुधवार देर शाम सामने आई इस अधिसूचना ने साफ कर दिया है कि अब धरातल पर सिर्फ वही काम होंगे जो पूर्व निर्धारित मास्टर प्लान और जोनल प्लान के दायरे में आएंगे। पुरानी व्यवस्था के तहत यदि किसी आवासीय क्षेत्र के सामने सड़क की चौड़ाई 40 फीट या उससे अधिक हुआ करती थी, तो वहां कॉमर्शियल नक्शा पास कराने की छूट मिल जाती थी। लेकिन अब इस पुराने नियम को कड़ाई से बदल दिया गया है। – आवास विभाग के अनुसार, सड़क के चौड़े होने मात्र से आवासीय भूमि पर व्यावसायिक निर्माण की अनुमति नहीं मिलेगी।
प्राधिकरणों के अधिकार सीमित
नए नियमों के दायरे में आने के बाद स्थानीय विकास प्राधिकरणों की शक्तियां भी काफी हद तक सीमित कर दी गई हैं। यदि अब किसी विशेष परिस्थिति में नियमानुसार मंजूरी की दरकार होगी, तो उसके लिए सीधे शासन स्तर पर फाइल बढ़ानी होगी। नगर नियोजन विभाग की संस्तुति मिलने के बाद ही उच्च स्तर पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। – जानकारों का मानना है कि इस सख्ती से पर्वतीय और मैदानी जिलों में अवैध निर्माण की शिकायतों पर काफी हद तक लगाम लगेगी।
152 गतिविधियों के लिए तय हुई सूची

नए रेगुलेशन के तहत मास्टर प्लान की रूपरेखा के मुताबिक कुल 152 तरह की गतिविधियों को स्पष्ट रूप से नोटिफाइड किया गया है। इसमें कृषि कार्य, पार्क, पशुपालन केंद्र, आंगनबाड़ी, आश्रम, बैंक्वेट हॉल, कॉलेज, बस स्टैंड और ईंट भट्ठों जैसे तमाम उपयोग शामिल हैं। सचिव आवास आर. राजेश कुमार ने स्पष्ट किया है कि इन प्रावधानों का मुख्य उद्देश्य शहरों के नियोजित विकास को गति देना और अनधिकृत निर्माणों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना है।








