देहरादून, 29 जुलाई 2026 (दून हॉराइज़न)।
Uttarakhand News : हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद उपनल कर्मचारियों के अनुबंध की फाइलें सरकारी दफ्तरों में धूल फांक रही हैं। विभागीय स्तर पर चल रही इस सुस्ती पर अब शासन ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सभी विभागाध्यक्षों को साफ लफ्जों में चेतावनी जारी कर दी है।
राज्य के करीब 11 हजार उपनल कर्मचारियों को पहले चरण में समान कार्य समान वेतन की परिधि में लाया जाना है। इसके लिए हर विभाग में कर्मियों का नए सिरे से कांट्रैक्ट तैयार होना अनिवार्य है। विभागीय अधिकारी इस प्रक्रिया को अटका कर बैठे हैं, जिससे कर्मचारियों में भारी आक्रोश पनप रहा था।
सचिवालय में आयोजित सचिव समिति की बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने इस लेत-लतीफी पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को तीन दिन का समय दिया है। तय सीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी न करने पर संबंधित विभागाध्यक्ष की चरित्र पंजिका में प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज की जाएगी।
बैठक में केवल संविदा कर्मी ही नहीं, बल्कि स्थायी कर्मचारियों के प्रमोशन का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि 30 जून 2026 तक पदोन्नति की योग्यता पूरी करने वाले सभी कर्मचारियों के लिफाफे एक महीने के भीतर खोले जाएं। एसीआर प्रक्रिया में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी।
इधर राजकीय पेंशनर्स वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ऑनलाइन आपात बैठक के दौरान पेंशनर्स ने गोल्डन कार्ड योजना में आ रही दिक्कतों पर गहरा असंतोष व्यक्त किया। छूटे हुए पेंशनर्स को योजना में शामिल करने का दोबारा मौका देने की मांग उठाई गई।

संगठन के अध्यक्ष बची सिंह रावत ने स्पष्ट किया कि अस्पतालों के बकाया भुगतान और चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लंबित बिलों पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। अगर शासन स्तर पर पेंशनर्स के वित्तीय हितों की अनदेखी जारी रही, तो पेंशनभोगी सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे।












