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Uttarakhand Seed Bank : लाल चावल और मंडुवा की खेती से होगी लाखों की कमाई, सरकार ने तैयार किया चमोली मॉडल

उत्तराखंड के चमोली जिले में पारंपरिक खेती को पुनर्जीवित करने के लिए 70 गांवों में कम्युनिटी सीड बैंक स्थापित किए जाएंगे, जिससे 960 किसान परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही, ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने के लिए पिरूल संग्रहण को लेकर सरकार ने सभी जिलों से 15 दिन में एक्शन प्लान मांगा है।

Published On: अप्रैल 22, 2026 4:04 अपराह्न
Uttarakhand Seed Bank : लाल चावल और मंडुवा की खेती से होगी लाखों की कमाई, सरकार ने तैयार किया चमोली मॉडल

HIGHLIGHTS

  • चमोली के 6 ब्लॉकों के 960 परिवारों को बीज संरक्षण परियोजना से जोड़ा गया।
  • पारंपरिक बीजों की खेती से किसानों को प्रति हेक्टेयर 1 लाख रुपये तक की आय का अनुमान।
  • पिरूल (चीड़ की पत्तियां) संग्रहण के लिए 10 रुपये प्रति किलो की दर से होगा भुगतान।

देहरादून, 22 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पारंपरिक खेती और लुप्त होते बीजों को बचाने के लिए ग्राम्य विकास विभाग ने एक व्यापक रणनीति तैयार की है। विभाग अब चमोली जिले के छह ब्लॉकों—दशोली, गैरसैंण, नंदानगर, नारायणबगड़, देवाल और कर्णप्रयाग—के 70 गांवों में ‘Uttarakhand Seed Bank’ स्थापित करने जा रहा है। इस पहल के तहत 960 परिवारों को चिन्हित किया गया है, जो स्थानीय बीजों के संरक्षण और उत्पादन का कार्य करेंगे।

ग्राम्य विकास सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल के अनुसार, इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य फसल विविधता को सुरक्षित करना और जलवायु परिवर्तन के बीच खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इस परियोजना की एक खास बात यह है कि इसमें उत्तराखंड की उस प्राचीन परंपरा को आधार बनाया गया है, जिसमें दुल्हन अपने मायके से बीज और अनाज लेकर ससुराल आती थी। सदियों पुरानी इस बीज विनिमय व्यवस्था को अब आधुनिक स्वरूप में सीड बैंक के जरिए पुनर्जीवित किया जाएगा।

आजीविका और पिरूल संग्रहण पर जोर

खेती के साथ-साथ सरकार ने जंगलों में आग का कारण बनने वाले पिरूल (चीड़ की सूखी पत्तियां) को भी कमाई का जरिया बनाने के निर्देश दिए हैं। सचिव गर्ब्याल ने सभी जिलों के मुख्य विकास अधिकारियों (CDO) को 15 दिन के भीतर पिरूल संग्रहण की विस्तृत कार्ययोजना सौंपने को कहा है। योजना के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों और क्लस्टर स्तरीय संघों (CLF) को पिरूल इकट्ठा करने के काम से जोड़ा जाएगा, जिसके लिए उन्हें 10 रुपये प्रति किलो की दर से भुगतान किया जाएगा।

वित्तीय लाभ और भागीदारी

कम्युनिटी सीड बैंक परियोजना के तहत करीब 317 हेक्टेयर क्षेत्र में लाल चावल, मंडुवा, झंगोरा, राजमा, सोयाबीन, काला भट्ट और जौ जैसी पारंपरिक फसलों का बीज उत्पादन किया जाएगा।

  • लागत और आय: योजना में प्रति हेक्टेयर 25 हजार रुपये की लागत तय की गई है, जबकि किसानों को इससे 75 हजार से 1 लाख रुपये तक की शुद्ध आय होने का अनुमान है।
  • सामाजिक भागीदारी: चयनित गांवों में 50 प्रतिशत महिलाओं के साथ-साथ अनुसूचित जाति और जनजाति परिवारों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

दो साल की अवधि वाली इस परियोजना में बीज संकलन से लेकर उनके प्रसंस्करण (Processing) और विपणन (Marketing) की पूरी व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके लिए किसान उत्पादक संगठनों (FPO) की भी मदद ली जाएगी। पीडब्ल्यूसी की रिपोर्ट के आधार पर इस मॉडल को वर्षा आधारित कृषि के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है।

परियोजना का स्वरूप और अपेक्षित लाभ

विवरण लक्ष्य/आंकड़े
लक्षित जिले/गांव चमोली (70 गांव)
प्रमुख फसलें लाल चावल, मंडुवा, झंगोरा, काला भट्ट, राजमा
अनुमानित शुद्ध आय ₹75,000 – ₹1,00,000 प्रति हेक्टेयर
पिरूल संग्रहण दर ₹10 प्रति किलोग्राम
वन क्षेत्र (चीड़) उत्तराखंड का लगभग 16.36% भाग

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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