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क्यों खास है सावन में हरियाली अमावस्या? जानें स्नान-दान और पौधे रोपने के सबसे अच्छे मुहूर्त

Hariyali Amavasyaसावन माह की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को हरियाली अमावस्या के रूप में मनाया जाता है, जो इस बार 12 अगस्त को पड़ रही है। धार्मिक दृष्टिकोण और प्रकृति के अनुकूल मौसम के कारण यह दिन पौधरोपण और दान-पुण्य के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।

Published On: August 3, 2026 6:34 AM
Hariyali Amavasya

Hariyali Amavasya :  सावन का महीना धार्मिक दृष्टिकोण के साथ-साथ प्रकृति के सौंदर्य के लिए भी जाना जाता है। इस महीने में पड़ने वाली अमावस्या को हरियाली या श्रावणी अमावस्या कहा जाता है।

सनातन परंपरा में इस दिन स्नान, दान और पितरों के तर्पण का विशेष विधान है, लेकिन इसका सबसे बड़ा महत्व पर्यावरण और पौधरोपण से जुड़ा हुआ है।

मान्यता है कि इस दिन लगाए गए पौधे न केवल पर्यावरण को समृद्ध बनाते हैं, बल्कि जीवन में खुशहाली और तरक्की भी लाते हैं।

आइए जानते हैं कि इस वर्ष हरियाली अमावस्या की सही तिथि, पूजन के शुभ मुहूर्त और इस दिन पौधरोपण क्यों इतना फलदायी माना जाता है।

हरियाली अमावस्या 2026: तिथि और समय

पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि की शुरुआत 12 अगस्त को तड़के 01:52 बजे से हो रही है। यह तिथि 12 अगस्त की देर रात 11:06 बजे तक रहेगी।

उदयातिथि को आधार मानते हुए हरियाली अमावस्या का पर्व 12 अगस्त 2026, बुधवार को मनाया जाएगा।

पूजा और स्नान-दान के शुभ मुहूर्त

इस बार हरियाली अमावस्या पर सुबह से ही कई अनुकूल मुहूर्त बन रहे हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:23 बजे से 05:06 बजे तक
  • चर (सामान्य) मुहूर्त: सुबह 05:38 बजे से 07:20 बजे तक
  • लाभ (उन्नति) मुहूर्त: सुबह 07:20 बजे से 09:03 बजे तक
  • अमृत (सर्वोत्तम) मुहूर्त: सुबह 09:03 बजे से 10:45 बजे तक
  • शुभ (उत्तम) मुहूर्त: दोपहर 12:27 बजे से 02:10 बजे तक

ध्यान दें: बुधवार का दिन होने के कारण इस दिन अभिजीत मुहूर्त नहीं रहेगा। इसके अलावा, दोपहर 12:26 बजे से दोपहर 02:05 बजे तक राहुकाल रहेगा। कोई भी नया या मांगलिक कार्य करने से पहले राहुकाल का समय ध्यान में रखें।

इसे क्यों कहा जाता है ‘हरियाली’ अमावस्या?

सावन के दौरान होने वाली बारिश से पूरी धरती हरी-भरी हो जाती है। सूखे पेड़-पौधों में नई जान आ जाती है और चारों ओर प्राकृतिक सुंदरता बिखर जाती है।

ज्योतिष और आयुर्वेद में हरे रंग को समृद्धि, संतुलन और उन्नति का प्रतीक माना गया है।

प्रकृति के इस हरे-भरे स्वरूप का आभार व्यक्त करने के लिए ही इस तिथि को हरियाली अमावस्या का नाम दिया गया है।

पौधरोपण के लिए सबसे मुफ़ीद दिन

हरियाली अमावस्या के आसपास मानसूनी बारिश अपनी चरम सीमा पर होती है। इस समय मिट्टी में नमी भरपूर होती है और हवा में भी पर्याप्त आर्द्रता रहती है।

ऐसे मौसम में लगाए गए छोटे पौधे बहुत तेजी से जड़ पकड़ते हैं और उनके सूखने की संभावना न के बराबर होती है।

इसी कारण प्राचीन काल से ही इस दिन पौधे लगाने की परंपरा चली आ रही है।

कौन से पौधे लगाना माना जाता है शुभ?

इस दिन छायादार, फलदार और पूजनीय वृक्ष लगाना बेहद शुभ फल देने वाला माना जाता है:

देव वृक्ष: पीपल, बरगद, नीम, शमी और पारिजात

फलदार पौधे: आम, आंवला, कटहल और बेलपत्र

यदि आपके पास पेड़ लगाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है, तो आप अपने घर के आंगन या बालकनी में तुलसी, एलोवेरा या कोई भी छोटा पौधा लगाकर इस दिन की परंपरा में सहभागी बन सकते हैं।

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Ganga

गंगा 'दून हॉराइज़न' में धर्म और ज्योतिष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें वैदिक ज्योतिष, पंचांग, व्रत-त्योहार और वास्तु शास्त्र का गहरा ज्ञान और वर्षों का अनुभव है। गंगा का उद्देश्य सिर्फ दैनिक राशिफल बताना नहीं, बल्कि धर्म और अध्यात्म से जुड़ी सटीक, शोध-आधारित और प्रामाणिक जानकारी आम जनमानस तक पहुंचाना है। वह ज्योतिषीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं का गहराई से विश्लेषण करती हैं। उनकी तथ्यपरक लेखनी पाठकों को अंधविश्वास से दूर रखकर एक सकारात्मक मार्गदर्शन प्रदान करती है, जिससे वे डिजिटल पाठकों के बीच एक बेहद भरोसेमंद नाम बन गई हैं।

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