Maruti Fronx Export : भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर में घरेलू मांग के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भी भारतीय कारों की पकड़ बेहद मजबूत होती दिख रही है। वैश्विक स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों के उतार-चढ़ाव और किफायती वाहनों की मांग के चलते मेड इन इंडिया कारों का शिपमेंट तेजी से बढ़ रहा है। साल 2026 की दूसरी तिमाही यानी अप्रैल से लेकर जून 2026 के बीच जारी हुए आंकड़ों में मारुति सुजुकी की कॉम्पैक्ट एसयूवी फ्रोंक्स ने देश से बाहर भेजी जाने वाली यात्री गाड़ियों की सूची में शीर्ष स्थान हासिल किया है।
विदेशी खरीदारों के बीच मारुति फ्रोंक्स की मांग में साल-दर-साल आधार पर 3.17 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इस दौरान कंपनी ने कुल 23,803 यूनिट्स फ्रोंक्स को विदेशी बंदरगाहों के लिए रवाना किया। ठीक एक साल पहले समान अवधि में यह आंकड़ा 23,071 यूनिट्स का था। भारतीय बाजार में ₹6.85 लाख की एक्स-शोरूम शुरुआती कीमत पर उपलब्ध यह कार अपने स्पोर्टी कूपे डिजाइन और किफायती ईंधन दक्षता के दम पर वैश्विक खरीदारों को आकर्षित कर रही है।
अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में फ्रोंक्स की भारी मांग के पीछे इसका पावरट्रेन विकल्प और माइलेज का संतुलन माना जा रहा है। भारतीय और विदेशी दोनों ही बाजारों में इसे 1.2-लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन और 1.0-लीटर टर्बो-पेट्रोल इंजन विकल्पों के साथ पेश किया जाता है। इसके साथ ही सीएनजी विकल्प भी इसमें शामिल है। यह कार पेट्रोल पर करीब 20 से 22.89 किलोमीटर प्रति लीटर तक का माइलेज देती है, वहीं इसके सीएनजी वेरिएंट्स में लगभग 28.51 किलोमीटर प्रति किलोग्राम तक का कवरेज मिलता है।
सस्ते में बेहतर कनेक्टिविटी और सेफ्टी किट चाहने वाले विदेशी खरीदारों के लिए इसमें 9-इंच का बड़ा टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम दिया गया है। तंग जगहों में पार्किंग के लिए 360-डिग्री कैमरा, वायरलेस फोन चार्जर और सुरक्षा के लिए 6 एयरबैग्स जैसी सुविधाएं इसे इस बजट सेगमेंट में एक व्यावहारिक गाड़ी बनाती हैं। भारतीय शोरूमों में फ्रोंक्स की कीमतें ₹6.85 लाख से शुरू होकर इसके टॉप-एंड टर्बो ऑटोमैटिक वेरिएंट्स के लिए ₹11.98 लाख तक जाती हैं।
एक्सपोर्ट की इस दौड़ में मारुति सुजुकी की ऑफ-रोडर एसयूवी जिम्नी ने भी शानदार छलांग लगाई है। जिम्नी ने इस तिमाही में कुल 21,840 यूनिट्स का निर्यात दर्ज करते हुए दूसरा स्थान हासिल किया है। पिछले साल की तुलना में जिम्नी के विदेशी शिपमेंट में 46.45 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी देखी गई है। पहाड़ी और पथरीले रास्तों वाले कई एशियाई और दक्षिण अमेरिकी देशों में इस छोटी फोर-बाय-फोर कार की मांग में अचानक उछाल आया है।
इलेक्ट्रिक व्हीकल सेगमेंट में मारुति की एंट्री भी इस बार एक्सपोर्ट आंकड़ों में साफ नजर आई। कंपनी की पहली ऑल-इलेक्ट्रिक एसयूवी, ई-विटारा, कुल 15,210 यूनिट्स के शिपमेंट के साथ एक्सपोर्ट सूची में सीधे तीसरे स्थान पर काबिज हुई है। ई-विटारा का वैश्विक उत्पादन और वितरण भारत से ही नियंत्रित किया जा रहा है, जिसकी बदौलत भारतीय प्लांट से यूरोप और अन्य वैश्विक बाजारों में इसकी लगातार सप्लाई भेजी जा रही है।
पारंपरिक हैचबैक और सेडान गाड़ियों की बात करें तो चौथे स्थान पर हुंडई की ग्रैंड i10 रही। ग्रैंड i10 ने 9.23 प्रतिशत की सालाना वृद्धि के साथ कुल 14,282 यूनिट्स का निर्यात किया। पांचवें नंबर पर मारुति सुजुकी बलेनो का कब्जा रहा, जिसकी कुल 11,163 यूनिट्स विदेशी तटों पर भेजी गईं, जो कि 9.22 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाती है।
कॉम्पैक्ट सेडान सेगमेंट में मारुति डिजायर ने चौंकाने वाला प्रदर्शन दर्ज कराया है। डिजायर का निर्यात 30.84 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी के साथ कुल 10,798 यूनिट्स तक पहुंच गया और यह सूची में छठे स्थान पर रही। इसके ठीक पीछे सातवें स्थान पर निसान मैग्नाइट रही, जिसने 0.67 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 10,765 यूनिट्स का विदेशी आंकड़ा छुआ।
आठवें, नौवें और दसवें स्थान पर रहने वाली गाड़ियों के निर्यात में इस दौरान गिरावट देखने को मिली है। मारुति सुजुकी स्विफ्ट 23.11 प्रतिशत की गिरावट के साथ 9,598 यूनिट्स पर आ गई और आठवें नंबर पर रही। नौवें पायदान पर मौजूद हुंडई वरना का एक्सपोर्ट 39.39 प्रतिशत घटकर 9,554 यूनिट्स दर्ज किया गया। सूची में दसवें स्थान पर हुंडई ऑरा रही, जिसने 20 प्रतिशत की सालाना गिरावट के साथ कुल 8,670 यूनिट्स कारों का निर्यात दर्ज कराया।











