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Maruti Small Cars : मारुति की शुरुआती कारों की मांग बढ़ी, 54 प्रतिशत खरीदार पहली बार ले रहे गाड़ी

मारुति की शुरुआती गाड़ियों की खरीद में पहली बार कार लेने वालों का आंकड़ा 54 फीसदी पहुंच गया है। टैक्स में मिली राहत और 34 किमी प्रति किलो तक के माइलेज ने बजट खरीदारों को फिर शोरूम की तरफ खींच लिया है।

Published On: August 3, 2026 6:04 PM
Maruti Small Cars : मारुति की शुरुआती कारों की मांग बढ़ी, 54 प्रतिशत खरीदार पहली बार ले रहे गाड़ी

HIGHLIGHTS

  • पहली बार कार खरीदने वाले ग्राहक बढ़कर 54 फीसदी हुए।
  • मारुति की छोटी कारों की बिक्री 34 फीसदी बढ़ी।
  • 18 फीसदी टैक्स दायरे में 359000 गाड़ियां बिकीं।
  • हैचबैक गाड़ियों की शुरुआती कीमत 3.50 लाख रुपये।

Maruti Small Cars : भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार के सबसे बुनियादी सेगमेंट में बड़ा फेरबदल देखने को मिल रहा है। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी के आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में पहली बार कार खरीदने वालों की हिस्सेदारी बढ़कर 54 फीसदी पर पहुंच गई है। पिछली तिमाही यानी चौथी तिमाही में यह आंकड़ा 51 फीसदी दर्ज किया गया था। महज तीन महीनों के भीतर आया यह 3 फीसदी का उछाल भारतीय मध्यमवर्ग की क्रय शक्ति में सुधार और टैक्स ढांचे में हुए बदलावों का सीधा संकेत दे रहा है।

पहली बार गाड़ी खरीदने वाले ग्राहकों की इस वापसी ने सीधे तौर पर छोटी हैचबैक कारों की मांग को गति दी है। कंपनी ने चालू तिमाही के दौरान अपने एंट्री-लेवल और स्मॉल कार सेगमेंट में साल-दर-साल 34 फीसदी की मजबूत बिक्री वृद्धि दर्ज की है। कई वर्षों तक लगातार मंदी और मांग में गिरावट झेल रहे हैचबैक बाजार के लिए यह आंकड़ा राहत लेकर आया है। कम बजट वाले खरीदार जो अब तक पुरानी गाड़ियों या दोपहिया वाहनों तक सीमित थे, वे फिर से नए चार पहिया वाहनों की तरफ रुख कर रहे हैं।

टैक्स स्लैब में हुई कटौती ने इस बिक्री को सबसे बड़ा सहारा दिया है। गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स की दरों में संशोधन के बाद छोटी गाड़ियों पर लगने वाला टैक्स कम हुआ है, जिससे ऑन-रोड कीमतों में सीधी गिरावट आई है। मारुति सुजुकी के पोर्टफोलियो में 18 फीसदी जीएसटी स्लैब वाली कारों की बिक्री में सालाना आधार पर 34 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। उच्च टैक्स यानी 40 फीसदी जीएसटी स्लैब में आने वाली कंपनी की गाड़ियों की बिक्री में भी लगभग 30 फीसदी का विस्तार देखा गया है।

आंकड़ों के बारीक विश्लेषण से पता चलता है कि 18 फीसदी जीएसटी वाली श्रेणी में मारुति सुजुकी का दबदबा काफी मजबूत रहा है। इस पूरी टैक्स श्रेणी में उद्योग स्तर पर कुल 7,34,000 वाहनों की बिक्री हुई, जिसमें से अकेले मारुति सुजुकी ने लगभग 3,59,000 यूनिट्स बेचे। 40 फीसदी जीएसटी वाली बड़ी गाड़ियों की श्रेणी में पूरे ऑटो उद्योग ने 4,70,000 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की, जिसमें मारुति की हिस्सेदारी करीब 1,61,000 यूनिट्स रही। ये संख्याएं साबित करती हैं कि आम भारतीय खरीदार के लिए गाड़ी की शुरुआती कीमत कितनी मायने रखती है।

मारुति सुजुकी में कॉर्पोरेट मामलों के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर राहुल भारती ने निवेशकों को संबोधित करते हुए कहा कि पहली बार कार खरीदने वालों का अनुपात चौथी तिमाही के 51 फीसदी से सुधरकर इस तिमाही में 54 फीसदी हो जाना एक स्पष्ट संदेश है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सुधार हवा-हवाई नहीं है, बल्कि छोटी कारों की बिक्री में दर्ज की गई 34 फीसदी की सीधी बढ़ोतरी इसकी पुष्टि करती है।

एंट्री-लेवल कार सेगमेंट की इस वापसी को पिछले तीन-चार सालों की ऐतिहासिक सुस्ती के संदर्भ में समझना जरूरी है। साल 2020 के बाद से लागू हुए कड़े सुरक्षा नियमों, क्रैश टेस्ट मानकों, बीएस-6 उत्सर्जन मानदंडों और अनिवार्य दोहरे एयरबैग जैसे कानूनों के कारण गाड़ियों की विनिर्माण लागत में भारी वृद्धि हुई थी। 15 से 20 लाख रुपये वाली महंगी गाड़ियों पर 50 हजार रुपये की लागत बढ़ने से ग्राहकों के बजट पर खास फर्क नहीं पड़ा, लेकिन 3 से 4 लाख रुपये के बजट वाले खरीदार के लिए यह लागत 15 से 20 फीसदी तक महंगी हो गई।

मूल्य-संवेदनशील मध्यमवर्गीय ग्राहक के लिए गाड़ी की कुल कीमत और उसका दैनिक रख-रखाव ही सबसे प्राथमिक शर्त होती है। भारत के हैचबैक बाजार में 80 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी रखने वाली मारुति सुजुकी को इस बात का सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ा था। कार खरीदने की शुरुआती लागत अधिक होने के कारण दोपहिया वाहन चालक अपनी पहली कार का सपना टालते आ रहे थे।

वर्तमान में कंपनी की शुरुआती कारों की कीमत 3.50 लाख रुपये से शुरू होती है। कम कीमत के साथ-साथ रनिंग कॉस्ट घटाने के लिए फैक्ट्री-फिटेड सीएनजी का विकल्प भी खरीदारों को आकर्षित कर रहा है। इन गाड़ियों के सीएनजी वैरिएंट्स में 34 किलोमीटर प्रति किलोग्राम तक का माइलेज मिल रहा है। पेट्रोल और डीजल की अनिश्चित कीमतों के बीच यह माइलेज रोजाना दफ्तर जाने वाले और छोटे कारोबारियों के लिए बेहद व्यावहारिक साबित हो रहा है।

भारतीय ऑटो उद्योग के जानकारों का मानना है कि टैक्स राहत और कम रनिंग कॉस्ट का यह तालमेल पहली बार कार खरीदने वालों के भरोसे को लंबे समय तक बनाए रखेगा। जब तक आम आदमी के बजट में गाड़ियां उपलब्ध रहेंगी, तब तक ऑटो सेक्टर के निचले पायदान पर यह रिकवरी बनी रहेगी।

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Yash Ojha

ऑटोमोबाइल सेक्टर की गहरी समझ रखने वाले यश ओझा 'दून हॉराइज़न' के वरिष्ठ ऑटो एक्सपर्ट हैं। नई लॉन्चिंग से लेकर ऑटो पॉलिसी के बदलावों तक, यश हर खबर का बारीकी से विश्लेषण करते हैं। उनका लेखन केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वे गाड़ी की परफॉरमेंस को सड़क की असल परिस्थितियों और आम आदमी की जेब के हिसाब से परखते हैं। रिसर्च और असल टेस्ट-ड्राइव के प्रति उनका समर्पण उन्हें पाठकों के बीच एक भरोसेमंद नाम बनाता है।

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