देहरादून : महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज के छात्रों को अब टूटे-फूटे फर्नीचर पर पढ़ाई नहीं करनी होगी। देहरादून जिला प्रशासन ने ‘मुमकिन है डेवलपमेंट फाउंडेशन’ और ओएनजीसी के साथ मिलकर कॉलेज को 330 नए टेबल-चेयर सौंपे हैं।
रविवार को जिलाधिकारी सविन बंसल ने इस नई खेप का निरीक्षण किया और साथ ही प्रदेश के पहले राजकीय आधुनिक नशामुक्ति केंद्र के लिए एक नई एंबुलेंस को हरी झंडी दिखाई। यह पहल जिले में चल रहे ‘प्रोजेक्ट उत्कर्ष’ का हिस्सा है, जिसका मकसद सरकारी संस्थानों की बुनियादी कमियों को दूर करना है।
सरकारी बजट कम पड़ा तो सीएसआर बना सहारा
जिले के सरकारी स्कूलों को हाईटेक बनाने की राह में बजट अकसर रोड़ा बनता रहा है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने बताया कि जिला खनिज न्यास और जिला योजना का पैसा स्कूलों की भारी भरकम जरूरतों के लिए काफी नहीं था। प्रशासन ने हार नहीं मानी और कॉरपोरेट जगत से मदद मांगी। इस अपील पर ओएनजीसी और हुडको ने दिल खोलकर सहयोग किया।
अब तक सीएसआर फंड से 5 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि मिल चुकी है। इसी पैसे से सैकड़ों स्कूलों में स्मार्ट क्लास, आरओ का साफ पानी, लाइब्रेरी और खेल का मैदान तैयार किया जा रहा है। डीएम ने साफ किया कि प्रशासन का लक्ष्य हर बच्चे को कुर्सी-मेज देना है, ताकि किसी को भी जमीन पर बैठकर न पढ़ना पड़े।
नशामुक्ति केंद्र: एक महीने में 100% क्षमता पर काम
प्रशासन सिर्फ शिक्षा ही नहीं, स्वास्थ्य और नशामुक्ति पर भी फोकस कर रहा है। रायवाला में 10 नवंबर 2025 को शुरू हुआ राजकीय नशामुक्ति केंद्र महज डेढ़ महीने में अपनी पूरी क्षमता पर काम कर रहा है। केंद्र की प्रभारी डॉ. वैशाली ने बताया कि यहां से तीन युवक पूरी तरह नशा छोड़कर घर लौट चुके हैं।
इलाज के दौरान कई बार मरीजों को ऋषिकेश एम्स ले जाने की जरूरत पड़ती है, जिसके लिए आज प्रशासन ने ओएनजीसी की मदद से एक एंबुलेंस मुहैया करा दी है। कार्यक्रम में उन तीन युवकों ने भी अपने अनुभव साझा किए जो अब नशे की गिरफ्त से बाहर आ चुके हैं।
9 महीने में ओएनजीसी ने खर्च किए 26 करोड़
ओएनजीसी देहरादून के विकास में एक बड़े भागीदार के रूप में उभरा है। महाप्रबंधक नीरज शर्मा ने जानकारी दी कि पिछले 9 महीनों में केवल देहरादून जनपद में सीएसआर के तहत 25 से 26 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है। इसके अलावा ओएनजीसी दिल्ली ने भी 10 करोड़ रुपये की अलग से मदद भेजी है।
महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज के प्रधानाचार्य राजेश ममगाईं ने बताया कि पुराने फर्नीचर से बच्चों को काफी दिक्कत होती थी, लेकिन अब नया माहौल मिलने से पढ़ाई आसान होगी। इस मौके पर सीडीओ अभिनव शाह, मुमकिन है डेवलपमेंट फाउंडेशन की निदेशिका प्रगति सडाना और वेस्ट वॉरियर्स के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।



















