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Vidai Rice Ritual : बेटी की विदाई में चावल क्यों फेंके जाते हैं, जानिए इस रिवाज़ की असली वजह

Vidai Rice Ritual : हिंदू विवाह में विदाई के दौरान दुल्हन द्वारा पीछे की ओर चावल फेंकने की रस्म का गहरा धार्मिक महत्व है। यह क्रिया 5 बार दोहराई जाती है, जिसे मायके में धन-संपदा बने रहने और माता-पिता के ऋण को चुकाने का प्रतीक माना जाता है। इस रस्म के जरिए बेटी अपने मायके को बुरी नजर से बचाते हुए खुशहाली का आशीर्वाद देकर ससुराल के लिए विदा होती है।

Published on: January 16, 2026 6:45 AM
Vidai Rice Ritual
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HIGHLIGHTS

  • विदाई के समय दुल्हन सिर के ऊपर से 5 बार पीछे की ओर चावल फेंकती है।
  • यह रस्म बेटी के लक्ष्मी स्वरूप होने और मायके में समृद्धि छोड़ जाने का प्रतीक है।
  • पीछे खड़ी महिलाएं आँचल में चावल रोकती हैं, इन्हें जमीन पर गिरने नहीं दिया जाता।
  • रस्म के दौरान दुल्हन को पीछे मुड़कर देखने की मनाही होती है।

Vidai Rice Ritual : भारतीय शादियों में रस्में केवल परंपरा नहीं होतीं, बल्कि इनके पीछे गहरी भावनाएं और सामाजिक संदेश छिपे होते हैं। विवाह के संपन्न होने के बाद विदाई का क्षण सबसे भावुक होता है।

इसी दौरान एक विशेष रस्म निभाई जाती है, जिसमें दुल्हन अपने हाथों में चावल भरकर सिर के ऊपर से पीछे की ओर फेंकती है। यह प्रक्रिया कुल पांच बार दोहराई जाती है। इस रस्म के बिना विदाई अधूरी मानी जाती है।

समृद्धि और आभार का प्रतीक

हिंदू धर्म में बेटियों को साक्षात मां लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। मान्यता है कि जिस घर में बेटी होती है, वहां सुख और समृद्धि का वास होता है। शादी के बाद जब बेटी घर से विदा होती है, तो वह अपने साथ घर की ‘लक्ष्मी’ लेकर न जाए, इसलिए यह रस्म निभाई जाती है।

चावल को अन्न और धन का प्रतीक माना गया है। दुल्हन पीछे की ओर चावल फेंककर यह कामना करती है कि उसके जाने के बाद भी मायके के धन-धान्य और खुशियों में कोई कमी न आए। यह माता-पिता के पालन-पोषण के प्रति आभार व्यक्त करने का भी एक तरीका है।

प्रतीकात्मक रूप से दुल्हन कहती है कि उसने जो कुछ अपने माता-पिता से पाया है, वह उसे ससम्मान वापस लौटा रही है।

रस्म निभाने का सही तरीका

विदाई से ठीक पहले दुल्हन को दोनों हाथों में चावल दिए जाते हैं। वह बिना पीछे देखे, सिर के ऊपर से चावल पीछे की ओर उछालती है। दुल्हन के ठीक पीछे उसकी मां या घर की अन्य बुजुर्ग महिलाएं अपनी झोली या थाली फैलाकर खड़ी होती हैं।

कोशिश यही रहती है कि चावल का एक भी दाना जमीन पर न गिरे। परिवार इन चावलों को सहेजकर रखता है और इसे शुभ मानता है।

बुरी नजर से सुरक्षा और नई शुरुआत

चावल फेंकने की यह परंपरा मायके को नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नजर से बचाने का भी काम करती है। विदाई के समय माहौल काफी भावुक होता है, ऐसे में माना जाता है कि चावल फेंकने से नकारात्मकता दूर होती है।

साथ ही, दुल्हन को इस दौरान पीछे मुड़कर न देखने की सख्त हिदायत दी जाती है। इसका सीधा संदेश यह है कि अब उसे अपने पुराने जीवन की मोह-माया छोड़कर, ससुराल में नई जिम्मेदारियों की ओर आगे बढ़ना है।

पीछे मुड़कर देखना अतीत के मोह और नई जिंदगी में बाधा का संकेत माना जा सकता है।

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Ganga

गंगा एक अनुभवी धार्मिक समाचार लेखिका हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में 3 वर्षों से अधिक का लेखन अनुभव प्राप्त है। धर्म, संस्कृति और आस्था से जुड़े विषयों पर उनकी गहरी समझ है। वे सटीक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन शैली के लिए जानी जाती हैं। गंगा का उद्देश्य पाठकों तक धार्मिक घटनाओं, परंपराओं और समसामयिक समाचारों को सरल और विश्वसनीय रूप में पहुँचाना है।

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