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Lehsuniya Ratna Ke Fayde : लहसुनिया रत्न पहनने से बदल सकती है किस्मत, जानें किसके लिए है असरदार

Lehsuniya Ratna Ke Fayde :ज्योतिष शास्त्र में केतु को एक छाया ग्रह माना जाता है जो जीवन में अचानक बदलाव लाता है। इससे जुड़े 'लहसुनिया' (Cat's Eye) रत्न को धारण करने से रुके हुए काम बन सकते हैं, लेकिन मेष, सिंह, धनु और मीन राशि वालों के लिए यह नुकसानदेह भी साबित हो सकता है। बिना विशेषज्ञ की सलाह के इसे पहनने से शुभ की जगह अशुभ परिणाम मिल सकते हैं।

Published on: January 16, 2026 6:17 AM
Lehsuniya Ratna Ke Fayde
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HIGHLIGHTS

  • केतु का रत्न: लहसुनिया का संबंध छाया ग्रह केतु से है, जो अचानक लाभ या हानि देने के लिए जाना जाता है।
  • पहचान: इस रत्न के बीचों-बीच बिल्ली की आंख जैसी एक सीधी चमकदार रेखा दिखाई देती है।
  • सावधानी: मेष, सिंह, धनु और मीन राशि के जातकों को इसे पहनने से बचना चाहिए।
  • धारण विधि: इसे शनिवार या मंगलवार को शुक्ल पक्ष में चांदी या सोने में जड़वाकर पहनना शुभ होता है।

Lehsuniya Ratna Ke Fayde : रत्न शास्त्र में पत्थरों का सीधा संबंध ग्रहों की चाल और व्यक्ति के भाग्य से माना गया है। लोग अक्सर तरक्की और सुख-समृद्धि के लिए रत्न धारण करते हैं, लेकिन गलत रत्न का चुनाव जीवन में उथल-पुथल भी मचा सकता है।

ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, ‘लहसुनिया’ (Vaidurya) एक बेहद शक्तिशाली रत्न है। यह केतु ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है और जीवन में अचानक असर दिखाने की क्षमता रखता है। इसे पहनने से पहले नियम और सावधानियां जानना बेहद जरूरी है।

केतु की स्थिति और लहसुनिया का असर

ज्योतिष में केतु को एक छाया ग्रह माना जाता है। जिन लोगों की कुंडली में केतु कमजोर है या अशुभ स्थिति में बैठा है, उनके लिए लहसुनिया किसी वरदान से कम नहीं है। यह रत्न केतु के नकारात्मक प्रभावों को कम करने में मदद करता है।

जो लोग अक्सर मानसिक उलझन, अकारण डर या बार-बार कार्यों में आ रही रुकावटों का सामना कर रहे हैं, वे ज्योतिषीय सलाह के बाद इसे धारण कर सकते हैं। यह अचानक आने वाले नुकसान से भी सुरक्षा प्रदान करता है।

असली रत्न की पहचान कैसे करें

बाजार में कई तरह के नकली पत्थर भी मौजूद हैं, इसलिए इसकी पहचान जरूरी है। लहसुनिया रत्न की सबसे बड़ी खूबी इसकी चमक है।

इसे रोशनी में देखने पर इसके बीचों-बीच एक सीधी रेखा नजर आती है, जो बिल्ली की आंख (Cat’s Eye) जैसी लगती है। इसे ‘वैदूर्य’ रत्न भी कहा जाता है।

इन लोगों के लिए खतरनाक हो सकता है यह रत्न

लहसुनिया हर किसी को रास नहीं आता। मेष, सिंह, धनु और मीन राशि के जातकों को आमतौर पर इसे पहनने से बचने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा, गर्भवती महिलाओं और दिल या दिमाग से जुड़ी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को भी इसे धारण नहीं करना चाहिए।

यदि किसी की कुंडली में केतु दूसरे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में स्थित हो, तो भी यह रत्न पहनना वर्जित माना गया है।

धारण करने की सही विधि और नियम

इस रत्न का पूरा लाभ लेने के लिए इसे सही तरीके से पहनना अनिवार्य है। लहसुनिया को आमतौर पर चांदी या सोने की धातु में जड़वाकर पहना जाता है। आप इसे अंगूठी, ब्रेसलेट या पेंडेंट के रूप में पहन सकते हैं, लेकिन यह सुनिश्चित करें कि पत्थर का निचला हिस्सा आपकी त्वचा को स्पर्श करता रहे।

इसे पहनने के लिए शुक्ल पक्ष का शनिवार या मंगलवार सबसे उत्तम दिन माना जाता है। धारण करने से पहले अंगूठी या पेंडेंट को दूध, पानी या गंगाजल से धोकर शुद्ध जरूर करें।

याद रखें, बिना विशेषज्ञ की सलाह के इसे पहनना शुभ परिणाम की जगह बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकता है।

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Ganga

गंगा एक अनुभवी धार्मिक समाचार लेखिका हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में 3 वर्षों से अधिक का लेखन अनुभव प्राप्त है। धर्म, संस्कृति और आस्था से जुड़े विषयों पर उनकी गहरी समझ है। वे सटीक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन शैली के लिए जानी जाती हैं। गंगा का उद्देश्य पाठकों तक धार्मिक घटनाओं, परंपराओं और समसामयिक समाचारों को सरल और विश्वसनीय रूप में पहुँचाना है। 📧 Email: editor.dhnn@gmail.com

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