EPFO 3.0 : कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपनी कार्यशैली और डिजिटल ढांचे में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव करने जा रहा है। संगठन ने अपनी सेवाओं को ‘EPFO 3.0’ के तहत पूरी तरह नए रूप में ढालने का फैसला किया है।
इसका सीधा असर देश के करीब 8 करोड़ नौकरीपेशा लोगों पर पड़ेगा, जिन्हें अब पीएफ का पैसा निकालने या बैलेंस चेक करने के लिए पुराने और धीमे सिस्टम से जूझना नहीं पड़ेगा।
कोर बैंकिंग जैसा नया टेक्निकल ढांचा
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, ईपीएफओ का पूरा सिस्टम बदला जाएगा। नया टेक्निकल ढांचा बिल्कुल कोर बैंकिंग सॉल्यूशन (CBS) की तर्ज पर काम करेगा। इसका मतलब है कि पीएफ खातों का मैनेजमेंट अब किसी हाई-टेक बैंक खाते जैसा होगा। इसके लिए एक नया पोर्टल और मजबूत बैकएंड सॉफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है।
इस नए सेंट्रलाइज्ड सिस्टम से संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों के कर्मचारियों को सेवाएं देना आसान हो जाएगा। भविष्य में यूजर्स की बढ़ती संख्या और ट्रांजैक्शन के भारी वॉल्यूम को संभालने के लिए यह अपग्रेड बेहद जरूरी था। फिलहाल ईपीएफओ के पास लगभग 28 लाख करोड़ रुपये का फंड है, जिसे सुरक्षित और सुलभ रखना प्राथमिकता है।
अपनी भाषा में मिलेगी जानकारी
भाषा की बाधा को खत्म करने के लिए नए पोर्टल में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित अनुवाद टूल्स जोड़े जा रहे हैं। इससे सदस्य अंग्रेजी के अलावा अपनी क्षेत्रीय भारतीय भाषाओं में भी नियमों को समझ सकेंगे। यह बदलाव नए लेबर कोड्स के तहत असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को भी कवर करने की व्यापक योजना का हिस्सा है। ईपीएफओ भविष्य में असंगठित मजदूरों के फंड का प्रबंधन भी संभाल सकता है।
2026 तक UPI से निकासी की सुविधा
पीएफ खाताधारकों के लिए सबसे बड़ी खबर निकासी प्रक्रिया को लेकर है। मंत्रालय एक ऐसे सिस्टम पर काम कर रहा है जिससे कर्मचारी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिए अपना पैसा निकाल सकें। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो यह सुविधा अप्रैल 2026 तक शुरू हो सकती है।
इस प्रस्तावित सिस्टम के तहत, पीएफ फंड का कुछ हिस्सा सुरक्षित (फ्रोजन) रखा जाएगा, जबकि बाकी रकम को सदस्य जरूरत पड़ने पर UPI के जरिए सीधे अपने बैंक खाते में ट्रांसफर कर सकेंगे।
इसके बाद सब्सक्राइबर अपने खाते का बैलेंस देख सकेंगे और UPI पिन डालकर आसानी से पैसा निकाल पाएंगे। यह कदम ईपीएफओ की सेवाओं को पारदर्शी और इंस्टेंट बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।



















