नई दिल्ली/बर्लिन। देश जब आज 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Netaji Subhash Chandra Bose) की 129वीं जयंती पर उन्हें नमन कर रहा है, तब उनकी बेटी अनीता बोस फाफ ने एक बार फिर एक भावुक और अहम सवाल उठाया है।
अनीता बोस ने जापान के रेनकोजी मंदिर में दशकों से रखी अस्थियों को वापस भारत लाने की मांग की है। उनका कहना है कि यह बेहद कष्टदायक है कि जिस नायक ने भारत की आजादी के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया, उसके अवशेष 80 साल बाद भी देश से बाहर हैं।
अनीता बोस फाफ ने स्पष्ट कहा कि वह चाहती हैं कि नेताजी का सम्मान करने वाले सभी भारतीय इस मुहिम का समर्थन करें। उनका मकसद नेताजी के अवशेषों का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनकी मातृभूमि पर करना है।
डीएनए टेस्ट से खत्म हो विवाद
नेताजी की मृत्यु से जुड़े रहस्यों को हमेशा के लिए खत्म करने की दिशा में परिवार ने एक वैज्ञानिक मांग भी रखी है। नेताजी के भाई शरत बोस की पोती, माधुरी बोस ने बताया कि परिवार केवल अस्थियों की वापसी नहीं, बल्कि उनका डीएनए (DNA) परीक्षण भी चाहता है।
माधुरी बोस के अनुसार, “हम नेताजी के परिवार के सदस्य महान नेता के अवशेषों की सम्मानजनक वापसी और डीएनए टेस्ट की मांग कर रहे हैं, ताकि यह पुष्टि हो सके कि ये अवशेष उन्हीं के हैं।” परिवार का मानना है कि इससे उन तमाम अटकलों पर विराम लग जाएगा जो नेताजी की मृत्यु को लेकर दशकों से चली आ रही हैं।
2016 से जारी है परिवार की कोशिशें
यह पहली बार नहीं है जब बोस परिवार ने सरकार से यह अनुरोध किया है। माधुरी बोस ने जानकारी दी कि इससे पहले अक्टूबर 2016 और दिसंबर 2019 में भी परिवार के वरिष्ठ सदस्यों ने सरकार से संपर्क किया था।
इन सदस्यों में अनीता फाफ, प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी द्वारका नाथ बोस और नेताजी के भतीजे अर्धेंदु बोस शामिल थे। उन्होंने सरकार से रेनकोजी में रखी अस्थियों का डीएनए परीक्षण कराने का आग्रह किया था, ताकि दशकों पुराना विवाद खत्म हो सके। हालांकि, अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
18 अगस्त 1945: वह आखिरी सफर
इतिहास के पन्नों और आयोगों के सामने दी गई गवाहियों के मुताबिक, नेताजी की मृत्यु 18 अगस्त 1945 को ताइपे में एक विमान दुर्घटना में हुई थी। आजाद हिंद फौज के कर्नल हबीबुर रहमान सहित कई चश्मदीदों ने इसकी पुष्टि की थी। बताया जाता है कि जापान के आत्मसमर्पण के बाद नेताजी सिंगापुर से टोक्यो जा रहे थे, तभी ताइपे में उनका विमान क्रैश हो गया।
हादसे में वे बुरी तरह झुलस गए थे और उसी दिन उनका निधन हो गया। ताइपे में अंतिम संस्कार के बाद उनकी अस्थियों को टोक्यो ले जाया गया। तब से लेकर आज तक, ये अस्थियां जापान के रेनकोजी मंदिर के मुख्य पुजारी की कस्टडी में सुरक्षित रखी गई हैं। इसके विपरीत, कई धारणाएं यह भी रहीं कि नेताजी विमान हादसे में नहीं मरे, बल्कि वे रूस की जेल में थे या भारत में भेष बदलकर रहे, लेकिन परिवार अब विज्ञान के जरिए सच सामने लाना चाहता है।



















