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Netaji Subhash Chandra Bose : 1945 से जापान में क्यों हैं नेताजी की अस्थियां? बेटी ने देशवासियों से मांगी मदद

देश 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती मना रहा है, लेकिन उनका परिवार आज भी उनकी अस्थियों की घर वापसी का इंतजार कर रहा है। नेताजी की बेटी अनीता बोस फाफ ने जापान के रेनकोजी मंदिर में रखी अस्थियों को भारत लाने और उनके डीएनए टेस्ट की मांग दोहराई है। परिवार का कहना है कि आजादी के महानायक का अंतिम संस्कार उनकी अपनी मातृभूमि पर ही होना चाहिए।

Published on: January 23, 2026 3:18 PM
Netaji Subhash Chandra Bose : 1945 से जापान में क्यों हैं नेताजी की अस्थियां? बेटी ने देशवासियों से मांगी मदद
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HIGHLIGHTS

  • अनीता बोस की भावुक अपील: नेताजी के निधन के 80 साल बाद भी अस्थियां विदेश में होना दुखद बताया।
  • डीएनए टेस्ट की मांग: परिवार ने अस्थियों की पुष्टि और विवाद खत्म करने के लिए वैज्ञानिक जांच की मांग की।
  • रेनकोजी मंदिर का सच: 18 अगस्त 1945 की विमान दुर्घटना के बाद से टोक्यो में रखी हैं अस्थियां।
  • सरकार से पुराना अनुरोध: 2016 और 2019 में भी परिवार ने अस्थियों की वापसी के लिए गुहार लगाई थी।

नई दिल्ली/बर्लिन। देश जब आज 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Netaji Subhash Chandra Bose) की 129वीं जयंती पर उन्हें नमन कर रहा है, तब उनकी बेटी अनीता बोस फाफ ने एक बार फिर एक भावुक और अहम सवाल उठाया है।

अनीता बोस ने जापान के रेनकोजी मंदिर में दशकों से रखी अस्थियों को वापस भारत लाने की मांग की है। उनका कहना है कि यह बेहद कष्टदायक है कि जिस नायक ने भारत की आजादी के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया, उसके अवशेष 80 साल बाद भी देश से बाहर हैं।

अनीता बोस फाफ ने स्पष्ट कहा कि वह चाहती हैं कि नेताजी का सम्मान करने वाले सभी भारतीय इस मुहिम का समर्थन करें। उनका मकसद नेताजी के अवशेषों का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनकी मातृभूमि पर करना है।

डीएनए टेस्ट से खत्म हो विवाद

नेताजी की मृत्यु से जुड़े रहस्यों को हमेशा के लिए खत्म करने की दिशा में परिवार ने एक वैज्ञानिक मांग भी रखी है। नेताजी के भाई शरत बोस की पोती, माधुरी बोस ने बताया कि परिवार केवल अस्थियों की वापसी नहीं, बल्कि उनका डीएनए (DNA) परीक्षण भी चाहता है।

माधुरी बोस के अनुसार, “हम नेताजी के परिवार के सदस्य महान नेता के अवशेषों की सम्मानजनक वापसी और डीएनए टेस्ट की मांग कर रहे हैं, ताकि यह पुष्टि हो सके कि ये अवशेष उन्हीं के हैं।” परिवार का मानना है कि इससे उन तमाम अटकलों पर विराम लग जाएगा जो नेताजी की मृत्यु को लेकर दशकों से चली आ रही हैं।

2016 से जारी है परिवार की कोशिशें

यह पहली बार नहीं है जब बोस परिवार ने सरकार से यह अनुरोध किया है। माधुरी बोस ने जानकारी दी कि इससे पहले अक्टूबर 2016 और दिसंबर 2019 में भी परिवार के वरिष्ठ सदस्यों ने सरकार से संपर्क किया था।

इन सदस्यों में अनीता फाफ, प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी द्वारका नाथ बोस और नेताजी के भतीजे अर्धेंदु बोस शामिल थे। उन्होंने सरकार से रेनकोजी में रखी अस्थियों का डीएनए परीक्षण कराने का आग्रह किया था, ताकि दशकों पुराना विवाद खत्म हो सके। हालांकि, अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

18 अगस्त 1945: वह आखिरी सफर

इतिहास के पन्नों और आयोगों के सामने दी गई गवाहियों के मुताबिक, नेताजी की मृत्यु 18 अगस्त 1945 को ताइपे में एक विमान दुर्घटना में हुई थी। आजाद हिंद फौज के कर्नल हबीबुर रहमान सहित कई चश्मदीदों ने इसकी पुष्टि की थी। बताया जाता है कि जापान के आत्मसमर्पण के बाद नेताजी सिंगापुर से टोक्यो जा रहे थे, तभी ताइपे में उनका विमान क्रैश हो गया।

हादसे में वे बुरी तरह झुलस गए थे और उसी दिन उनका निधन हो गया। ताइपे में अंतिम संस्कार के बाद उनकी अस्थियों को टोक्यो ले जाया गया। तब से लेकर आज तक, ये अस्थियां जापान के रेनकोजी मंदिर के मुख्य पुजारी की कस्टडी में सुरक्षित रखी गई हैं। इसके विपरीत, कई धारणाएं यह भी रहीं कि नेताजी विमान हादसे में नहीं मरे, बल्कि वे रूस की जेल में थे या भारत में भेष बदलकर रहे, लेकिन परिवार अब विज्ञान के जरिए सच सामने लाना चाहता है।

Shailendra Pokhriyal

शैलेंद्र पोखरियाल पिछले दो वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं और राष्ट्रीय समाचार पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उनकी गहरी रुचि और राष्ट्रीय मुद्दों की समझ उनकी लेखनी में स्पष्ट दिखाई देती है। उन्होंने हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय (HNBGU) से एम.कॉम (M.Com) की डिग्री प्राप्त की है। शैलेंद्र निष्पक्ष और सटीक खबरें पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। 📧 Email: query.doonhorizon@gmail.com

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