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Rudraksha Mala Ka Mahatva : जाप माला के 108 दाने क्यों हैं खास, जानिए सूर्य और शिव से जुड़ी मान्यता

Rudraksha Mala Ka Mahatva : हिंदू धर्म में मंत्र जाप और पूजा-पाठ के दौरान 108 की संख्या का प्रयोग महज संयोग नहीं, बल्कि इसके पीछे गहरा आध्यात्मिक और वैज्ञानिक आधार है। यह संख्या भगवान शिव के 108 नामों, तांडव की मुद्राओं और सूर्य की कलाओं से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है।

Published on: January 26, 2026 6:17 AM
Rudraksha Mala Ka Mahatva
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HIGHLIGHTS

  • ज्योतिष के अनुसार 1 अंक ईश्वर, 0 निराकार सत्य और 8 पंचतत्वों व बुद्धि का प्रतीक है।
  • बाल रूपी शिव को शांत करने के लिए ब्रह्मा जी ने उन्हें 108 अलग-अलग नामों से पुकारा था।
  • सूर्य की 2 लाख 16 हजार कलाओं का आधा हिस्सा 1 लाख 8 हजार होता है, जो सूर्य ऊर्जा का आधार है।
  • भगवान शिव के तांडव में कुल 108 मुद्राएं होती हैं, इसलिए रुद्राक्ष माला में भी इतने ही दाने होते हैं।

 

Rudraksha Mala Ka Mahatva : हिंदू धर्म में किसी भी विशेष मंत्र का जाप करना हो या भगवान का स्मरण, 108 की संख्या को सबसे पवित्र माना जाता है।

मंदिरों में माला फेरने से लेकर योग क्रियाओं तक, हर जगह इस अंक की प्रधानता देखने को मिलती है। यह संख्या यूं ही नहीं चुनी गई है, बल्कि इसके पीछे हमारी प्राचीन परंपरा और गहरे रहस्य छिपे हैं।

अंकों का आध्यात्मिक गणित

ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर 108 के हर अंक का अपना विशेष अर्थ है। इसमें ‘1’ नंबर यह दर्शाता है कि ईश्वर एक है, चाहे उनके रूप अनेक हों। ‘0’ उस सत्य का प्रतीक है जो निराकार है।

वहीं ‘8’ का संबंध हमारे अस्तित्व से है। यह आठ का अंक पंचतत्वों (जल, अग्नि, वायु, पृथ्वी, आकाश) के साथ-साथ अहंकार, मन और हमारी बुद्धि को दर्शाता है।

शिवजी और 108 का गहरा संबंध

भगवान शिव का इस संख्या से बहुत पुराना नाता है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, एक बार शिवजी बाल रूप में प्रकट होकर जोर-जोर से रोने लगे थे।

तब उन्हें शांत करने के लिए ब्रह्मा जी ने 108 बार अलग-अलग नामों से पुकारा। हर नाम के साथ शिवजी शांत होते गए। तभी से उनके 108 नाम प्रचलित हुए।

इसके अलावा, शिवजी के तांडव नृत्य में भी कुल 108 तरह की मुद्राएं होती हैं। यही कारण है कि उनकी पूजा में प्रयोग होने वाली रुद्राक्ष की माला में 108 दाने ही पिरोए जाते हैं।

सूर्य की ऊर्जा और उत्तरायण का विज्ञान

शिवजी की तरह ही सूर्यदेव के साथ भी इस नंबर का विशेष कनेक्शन है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य की कुल 2 लाख 16 हजार कलाएं मानी जाती हैं।

जब उत्तरायण और दक्षिणायन के समय को अलग-अलग किया जाता है, तो यह संख्या 1 लाख 8 हजार रह जाती है।

इस संख्या में भी 108 अंक समाहित है। ऐसा माना जाता है कि जब हम 108 बार मंत्र जाप करते हैं, तो हम सूर्य की ऊर्जा के साथ जुड़ने लगते हैं। सदियों से यह प्रक्रिया हमारी संस्कृति का हिस्सा रही है।

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Ganga

गंगा एक अनुभवी धार्मिक समाचार लेखिका हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में 3 वर्षों से अधिक का लेखन अनुभव प्राप्त है। धर्म, संस्कृति और आस्था से जुड़े विषयों पर उनकी गहरी समझ है। वे सटीक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन शैली के लिए जानी जाती हैं। गंगा का उद्देश्य पाठकों तक धार्मिक घटनाओं, परंपराओं और समसामयिक समाचारों को सरल और विश्वसनीय रूप में पहुँचाना है। 📧 Email: editor.dhnn@gmail.com

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