Dalchini Health Benefits : आपकी रसोई में मौजूद दालचीनी सिर्फ खाने का स्वाद नहीं बढ़ाती, बल्कि यह शरीर के लिए एक शक्तिशाली आयुर्वेदिक दवा का काम करती है।
दालचीनी (Tvak) मेटाबॉलिज्म को तेज करने और पाचन तंत्र को सुधारने में बेहद असरदार है। यह ब्लड शुगर को नेचुरल तरीके से कंट्रोल करने में मदद करती है।
शुगर कंट्रोल और मेटाबॉलिज्म का कनेक्शन
आयुर्वेद का मानना है कि डायबिटीज सिर्फ शुगर बढ़ने की बीमारी नहीं है। यह शरीर की कमजोर ‘अग्नि’ (Digestive Fire) और बिगड़े हुए मेटाबॉलिज्म का नतीजा है।
ऐसे में दालचीनी जैसी गर्म तासीर और ‘दीपनीय’ (पाचन बढ़ाने वाली) जड़ी-बूटी शरीर के अंदरूनी सिस्टम को बैलेंस करती है।
दालचीनी का मुख्य काम इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बनाना है। इससे आपका शरीर ब्लड में मौजूद शुगर का सही इस्तेमाल कर पाता है और शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है।
कफ और वजन पर सीधा असर
डायबिटीज के मरीजों में अक्सर कफ और ‘आम’ (Ama या टॉक्सिन) की मात्रा बढ़ जाती है। दालचीनी इन विषैले तत्वों को शरीर से बाहर निकालने और दोषों को संतुलित करने का काम करती है।
इसके नियमित सेवन से शरीर में जमा अतिरिक्त फैट धीरे-धीरे कम होने लगता है। वजन कंट्रोल में रहने से डायबिटीज मैनेजमेंट में बड़ी मदद मिलती है।
कौन सी दालचीनी है सुरक्षित?
सेहत के लिए दालचीनी का चुनाव सबसे अहम है। डॉ. सवालिया बताते हैं कि ‘सीलोन दालचीनी’ (Ceylon Cinnamon) में कूमारिन नामक तत्व कम होता है, जिससे यह रोजाना और लंबे समय तक खाने के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।
दूसरी तरफ, बाजार में आम तौर पर मिलने वाली ‘कैसिया दालचीनी’ (Cassia) का अधिक मात्रा में सेवन शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए औषधीय लाभ के लिए हमेशा सीलोन दालचीनी ही चुनें।
सेवन का सही तरीका
आप सुबह खाली पेट दालचीनी की हल्की चाय बनाकर पी सकते हैं। इसे गुनगुने पानी या किसी भी हर्बल ड्रिंक में मिलाकर पीना भी फायदेमंद रहता है।
अगर आप सीधे सेवन नहीं करना चाहते, तो कटे हुए फलों पर एक चुटकी दालचीनी पाउडर छिड़ककर खाएं।















