Parenting Tips : हर माता-पिता की यही चिंता है कि बच्चे पढ़ाई में तो आगे हैं, लेकिन व्यवहार में पीछे छूट रहे हैं। अनुशासन के नाम पर की गई ज्यादा सख्ती अक्सर बच्चों के स्वभाव को और खराब कर देती है।
परवरिश का सही तरीका यह है कि घर में कुछ ऐसे नियम बनाए जाएं जो सिर्फ बच्चों पर थोपे न जाएं, बल्कि पूरा परिवार उनका पालन करें।
दिनचर्या सेट करें, खुद भी पालन करें
बच्चों के लिए एक फिक्स रूटीन होना सबसे ज्यादा जरूरी है। समय पर सोने और जागने से न सिर्फ सेहत सुधरती है, बल्कि उन्हें वक्त की अहमियत भी समझ आती है।
गौर करने वाली बात यह है कि यह नियम तभी काम करेगा जब माता-पिता खुद भी इसे फॉलो करें। बच्चे आपको देखकर ही सीखते हैं।
स्क्रीन का वक्त सीमित हो
आज की पीढ़ी स्क्रीन एडिक्शन का शिकार हो रही है। घर में यह स्पष्ट नियम होना चाहिए कि पढ़ाई, खेल और फैमिली टाइम के बीच मोबाइल या टीवी नहीं आएगा। गैजेट्स के इस्तेमाल की एक समय सीमा तय करें।
भाषा और सम्मान का पाठ
बच्चों को सिखाएं कि बड़ों से सम्मान से बात करनी है। अपनी बात कहने के लिए सही शब्दों का चयन और मदद मिलने पर ‘धन्यवाद’ कहना, ये आदतें बचपन से ही डलनी चाहिए।
अगर उन्हें कोई चीज चाहिए, तो ‘प्लीज’ कहने की आदत डालें। याद रखें, आप घर में जैसी भाषा बोलेंगे, बच्चा वही सीखेगा।
पढ़ाई के साथ आपकी भागीदारी
रोजाना पढ़ाई का एक वक्त तय करें। कोशिश करें कि जब बच्चा पढ़ रहा हो, तो आप भी उसके पास बैठकर कोई किताब पढ़ें या अपना काम करें। इससे बच्चे को पढ़ाई बोझ नहीं लगेगी, बल्कि वह इसे एक जिम्मेदारी की तरह लेगा।
घर के कामों में जिम्मेदारी
बच्चे को उसकी उम्र के हिसाब से घर के छोटे-छोटे काम सौंपें। चाहे वह अपनी प्लेट उठाना हो या पौधे में पानी डालना। इससे उनमें जिम्मेदारी का अहसास जगता है और वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में पहला कदम बढ़ाते हैं।
गलती मानना कमजोरी नहीं
गलती किसी से भी हो सकती है, लेकिन उसे स्वीकार करना और माफी मांगना एक बड़ा गुण है। अगर माता-पिता अपनी गलती पर बच्चों के सामने माफी मांगते हैं, तो बच्चे भी सीखते हैं कि सच बोलने और माफी मांगने से कोई छोटा नहीं होता।
सच बोलने की हिम्मत
अक्सर बच्चे डांट के डर से झूठ बोलते हैं। उन्हें भरोसा दिलाएं कि सच बोलना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। डर या सजा का माहौल बनाने के बजाय ऐसा माहौल बनाएं जहां बच्चा अपनी गलती बेझिझक बता सके।
परिवार के साथ जुड़ाव
दिन भर की भागदौड़ के बाद कुछ समय परिवार के लिए जरूर निकालें। साथ में खाना खाएं, बातें करें या खेलें। यह समय बच्चों को भावनात्मक रूप से मजबूत बनाता है और वे खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं।















