Home Remedy For Cough : सर्दियों का मौसम आते ही ठंडी हवा और बढ़ते स्मॉग का सीधा असर हमारी सांसों पर पड़ता है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई छाती में जकड़न, भारीपन और कफ जमने की समस्या से परेशान रहता है।
कम तापमान और कमजोर इम्यूनिटी के चलते बलगम गाढ़ा हो जाता है, जिससे लगातार खांसी आती है और सांस लेना मुश्किल हो जाता है। कई बार दवाइयों से तुरंत आराम नहीं मिलता, ऐसे में सदियों पुराने आयुर्वेदिक उपाय बेहद कारगर साबित होते हैं।
पान के पत्तों का औषधीय गुण
पान के पत्तों का इस्तेमाल भारतीय घरों में पारंपरिक तौर पर सर्दी-खांसी के इलाज के लिए होता आया है। आयुर्वेद के मुताबिक, पान के पत्तों में एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-बैक्टीरियल और एक्सपेक्टोरेंट गुण पाए जाते हैं।
ये तत्व छाती में जमा कफ को ढीला करते हैं, जिससे बलगम आसानी से बाहर निकल जाता है। पान की तासीर गर्म होती है, जो शरीर में प्राकृतिक गर्माहट पैदा करती है और ठंड के असर को कम करती है।
गले की सूजन और इम्यूनिटी पर असर
सिर्फ कफ ही नहीं, सर्दियों में होने वाली सूखी खांसी और गले की खराश में भी यह नुस्खा काम आता है। पान के पत्तों का अर्क गले को नमी देता है और सूजन या जलन को कम करता है।
इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स आपके इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं। अगर आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी रहेगी, तो बार-बार सर्दी-जुकाम होने का खतरा अपने आप कम हो जाएगा।
इस्तेमाल का सही तरीका
इस घरेलू नुस्खे को दो तरीकों से अपनाया जा सकता है। पहला तरीका यह है कि आप एक पान का पत्ता लें और उसे थोड़े से अदरक और शहद के साथ चबाएं।
इसे सुबह या रात को सोने से पहले लेना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। दूसरा तरीका बाहरी उपयोग का है।
पान के पत्ते को हल्का गर्म करके छाती पर रखने से सिकाई होती है, जिससे जकड़न में तुरंत आराम मिलता है।
सावधानी: यह उपाय सामान्य सर्दी-खांसी और कफ के लिए है। पान के पत्तों का सेवन सीमित मात्रा में ही करें। अगर समस्या लंबे समय तक बनी रहे या गंभीर हो, तो घरेलू नुस्खे पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर की सलाह जरूर लें।















