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Budget 2026: 1 फरवरी को आएगा बजट, क्या सस्ता होगा आपका इलाज?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को अपना लगातार नौवां आम बजट पेश कर एक नया रिकॉर्ड बनाएंगी. इस बार देश के स्वास्थ्य क्षेत्र को बजट से बड़ी उम्मीदें हैं, क्योंकि भारत में इलाज का खर्च अब भी आम आदमी के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है. विशेषज्ञों ने बच्चों के पोषण और फार्मा सेक्टर के लिए विशेष राहत की मांग की है.

Published on: January 27, 2026 2:26 PM
Budget 2026: 1 फरवरी को आएगा बजट, क्या सस्ता होगा आपका इलाज?
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HIGHLIGHTS

  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को लगातार 9वीं बार बजट पेश करेंगी.
  • अमेरिका अपनी जीडीपी का 17-18% हेल्थ पर खर्च करता है, जबकि भारत काफी पीछे है.
  • पिछले बजट में स्वास्थ्य मंत्रालय को 1 लाख करोड़ रुपये मिले थे, इस बार बढ़ोतरी की उम्मीद है.
  • विशेषज्ञों का जोर बच्चों की सेहत और घरेलू फार्मा रिसर्च बढ़ाने पर है.

नई दिल्ली : (Budget 2026) देश का आम बजट 1 फरवरी 2026 को संसद में पेश किया जाने वाला है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जब बजट भाषण पढ़ने उठेंगी, तो यह उनका लगातार नौवां बजट होगा.

यह अपने आप में एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड है. हालांकि, रिकॉर्ड से ज्यादा आम जनता का ध्यान इस बात पर है कि सरकार उनकी जेब को कितनी राहत देती है. इस बार सबसे ज्यादा चर्चा हेल्थ सेक्टर यानी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर है.

कोरोना महामारी के बाद से ही यह स्पष्ट हो चुका है कि एक मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था देश की रीढ़ होती है. इसके बावजूद, आज भी भारत में आम आदमी के लिए इलाज का खर्च उठाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है.

भारत बनाम दुनिया: हेल्थ खर्च में बड़ा अंतर

अगर हम दुनिया के ताकतवर देशों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो भारत स्वास्थ्य पर खर्च के मामले में अब भी काफी पीछे दिखाई देता है. अमेरिका अपनी जीडीपी का करीब 17 से 18 प्रतिशत हिस्सा हेल्थ सेक्टर पर खर्च करता है. वहीं, जापान भी स्वास्थ्य सेवाओं और इलाज पर 10 प्रतिशत से ज्यादा राशि लगाता है.

इसकी तुलना में भारत का हेल्थ खर्च कई विकासशील देशों से भी कम माना जाता है. सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं की कमी और निजी अस्पतालों के महंगे बिलों के कारण आम आदमी पिसता है. माना जा रहा है कि सरकार इस असंतुलन को ठीक करने के लिए बजट 2026 में बड़े कदम उठा सकती है.

पिछले बजट का लेखा-जोखा

सरकार ने पिछले कुछ सालों में इस दिशा में प्रयास जरूर किए हैं. वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में स्वास्थ्य मंत्रालय के लिए करीब 1 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था. यह राशि उससे पिछले साल के मुकाबले लगभग 11 प्रतिशत ज्यादा थी.

उस बजट में आयुष्मान भारत योजना का विस्तार, कैंसर की दवाओं पर कस्टम ड्यूटी में छूट और नए एम्स व मेडिकल कॉलेज खोलने जैसे अहम ऐलान शामिल थे. इससे सरकार की प्राथमिकताएं स्पष्ट होती हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या 2026 के बजट में आवंटन बढ़ाकर रफ़्तार को और तेज किया जाएगा?

फार्मा सेक्टर और बच्चों की सेहत पर जोर

बजट में सिर्फ अस्पतालों की ही नहीं, बल्कि दवा बनाने वाली कंपनियों की भी उम्मीदें जुडी हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि ग्लोबल सप्लाई चेन की समस्याओं और जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण भारतीय फार्मा कंपनियों पर असर पड़ा है. ऐसे में घरेलू उत्पादन और रिसर्च को बढ़ावा देना वक्त की मांग है.

इसके अलावा, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सरकार को खासतौर पर बच्चों की सेहत पर ध्यान देने की सलाह दी है. देश में बच्चों की बड़ी आबादी को देखते हुए उनके पोषण और स्वास्थ्य पर होने वाला खर्च बढ़ाना जरूरी है. विशेषज्ञ मानते हैं कि बच्चों पर आज किया गया निवेश ही भविष्य के मजबूत भारत की नींव रखेगा.

बजट से आम आदमी की उम्मीदें

बजट 2026 से सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि सरकार ग्रामीण इलाकों में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगी. अगर सरकारी अस्पतालों की संख्या बढ़ती है और दवाएं सस्ती होती हैं, तो इलाज का खर्च कम होगा. आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं का दायरा बढ़ने से भी मध्यम और गरीब वर्ग को सीधा फायदा मिल सकता है.

Rajat Sharma

रजत शर्मा बतौर ऑथर करीब 3 साल से दून हॉराइज़न से जुड़े हुए हैं। मूल रूप से देहरादून (उत्तराखंड) के रहने वाले रजत शर्मा दून हॉराइज़न में बिजनेस सेक्शन के लिए खबरें लिखते हैं। उन्हें बिजनेस सेक्शन के अलग-अलग जॉनर की खबरों की समझ है। इसमें स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, यूटिलिटी आदि शामिल हैं। करीब 7 साल से मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय रजत ने यहां से पहले कई और मीडिया संस्थानों में बतौर कंटेंट राइटर काम किया है। उन्हें रिपोर्टिंग का भी अनुभव है। 📧 Email: info.dhnn@gmail.com

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