Kitchen Vastu : जब हम नया घर बनवाते हैं, तो हर कमरे के लेटेस्ट डिजाइन, पेंट और डेकॉर पर पूरा ध्यान देते हैं। बेडरूम से लेकर पूजा घर तक, सब कुछ वास्तु के हिसाब से प्लान होता है।
लेकिन इस पूरी दौड़धूप में घर का सबसे अहम हिस्सा यानी ‘किचन’ अक्सर नजरअंदाज हो जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, रसोईघर सिर्फ खाना बनाने की जगह नहीं, बल्कि घर की ऊर्जा का केंद्र है। यहां की गई छोटी-सी लापरवाही पॉजिटिव वाइब्स को रोक सकती है।
आइये जानते हैं कि किचन बनवाते समय और उसके बाद किन बातों का ख्याल रखना चाहिए।
गैस स्टोव और दीवार का सही तालमेल
किचन में सबसे महत्वपूर्ण चीज गैस स्टोव या बर्नर है। इसे रखते समय एक बात गांठ बांध लें कि यह कभी भी किचन के मुख्य दरवाजे के ठीक सामने नहीं होना चाहिए।
वास्तु के नजरिए से इसे ठीक नहीं माना जाता। इसके अलावा, स्टोव को दीवार से बिल्कुल सटाकर न रखें। दीवार और बर्नर के बीच कुछ इंच का फासला जरूर होना चाहिए।
किचन के दरवाजे की सही दिशा
किचन की बनावट में उसका प्रवेश द्वार (Entrance) बहुत मायने रखता है। वास्तु शास्त्र स्पष्ट कहता है कि रसोई का मुख्य दरवाजा किसी कोने में दबा हुआ नहीं होना चाहिए।
अगर आपके किचन का दरवाजा पूर्व (East), उत्तर (North) या पश्चिम (West) दिशा में खुलता है, तो यह घर के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है।
अग्नि देव को भोग और बरकत
वास्तु केवल दिशाओं का विज्ञान नहीं है, यह हमारी आदतों से भी जुड़ा है। आप किचन में जो भी पका रहे हैं, उसे खुद खाने से पहले उसका एक बहुत छोटा हिस्सा ‘अग्नि देवता’ के नाम निकाल दें।
मान्यता है कि ऐसा करने से घर में हमेशा बरकत बनी रहती है। परिवार खुशहाल और संपन्न रहता है।
रात में बर्तनों की सफाई है जरूरी
अक्सर थकान की वजह से हम रात के जूठे बर्तन सिंक में छोड़ देते हैं और सोचते हैं कि कल धो लेंगे। वास्तु के अनुसार यह आदत सही नहीं है।
डिनर के बाद किचन को पूरी तरह साफ करना चाहिए। सोने से पहले गंदे बर्तनों को धोकर रखने से घर में नकारात्मक ऊर्जा नहीं ठहरती।



















