Vastu Shastra : घर का निर्माण रोज-रोज नहीं होता, यह जीवन भर की पूंजी होती है। यदि घर बनाते समय वास्तु शास्त्र को ध्यान में रखा जाए, तो परिवार में सुख-शांति और समृद्धि हमेशा बनी रहती है।
निर्माण के दौरान की गई छोटी सी गलती भी वास्तु दोष का कारण बन सकती है। यहां जानिए उन जरूरी बातों के बारे में, जिन्हें घर बनाते समय ध्यान में रखना आवश्यक है।
मंदिर और मुख्य द्वार की दिशा
वास्तु शास्त्र में दिशाओं का विशेष महत्व है। उत्तर-पूर्व दिशा में भगवान बृहस्पति का वास माना जाता है, इसलिए घर का पूजा स्थल इसी दिशा में बनाना चाहिए।
मंदिर बनाते समय यह सुनिश्चित करें कि देवी-देवताओं का मुख पूर्व दिशा की ओर हो।वहीं, घर का मुख्य द्वार (मेन गेट) हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा में ही रखना चाहिए।
दक्षिण दिशा में मेन गेट बनवाने से बचें, क्योंकि ऐसा करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) का प्रवेश होता है। साथ ही, मुख्य द्वार को हमेशा साफ-सुथरा रखें और वहां गंदगी जमा न होने दें।
रसोई और रंगों का चयन
वास्तु शास्त्र के अनुसार, रसोईघर का निर्माण दक्षिण-पश्चिम दिशा में करना चाहिए। किचन की दीवारों के लिए लाल या गुलाबी रंग का चुनाव करना बेहतर होता है।
मान्यता है कि इससे किचन की सुंदरता बढ़ने के साथ-साथ वास्तु का संतुलन भी बना रहता है।
पेड़-पौधे और तरक्की
घर के वातावरण को शुभ बनाने के लिए मनी प्लांट लगाना बेहद अच्छा माना गया है। इसे हमेशा हरे रंग के गमले में ही लगाएं, जिससे धन लाभ और वृद्धि के योग बनते हैं।
दूसरी ओर, घर के बाहर उत्तर दिशा में केले का पेड़ या कोई भारी पेड़ लगाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे घर की तरक्की रुक सकती है।



















