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ITR Filing Rule 2026: अब 31 मार्च तक सुधारें रिटर्न की गलती, बजट में हुआ बड़ा फैसला

बजट 2026 के बाद टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने इनकम टैक्स रिटर्न में सुधार के लिए 31 मार्च तक का समय दिया है। अब करदाता अपनी गलतियों को सुधारने के लिए संशोधित (Revised) रिटर्न भर सकेंगे, हालांकि इसके लिए आय के आधार पर जुर्माना देना होगा। यह कदम विशेष रूप से उन नौकरीपेशा लोगों के लिए है जिनसे रिटर्न फाइलिंग के दौरान चूक हो जाती है।

Published on: February 2, 2026 12:01 PM
ITR Filing Rule 2026: अब 31 मार्च तक सुधारें रिटर्न की गलती, बजट में हुआ बड़ा फैसला
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HIGHLIGHTS

  1. बजट 2026 के नए प्रावधानों के तहत अब 31 मार्च तक रिवाइज्ड और लेट ITR फाइल की जा सकेगी।
  2. रिटर्न में सुधार मुफ्त नहीं होगा, करदाताओं को अपनी आय के स्लैब के अनुसार पेनल्टी देनी होगी।
  3. बकाया टैक्स देनदारी होने की स्थिति में पेनल्टी के साथ ब्याज का भुगतान भी अनिवार्य है।
  4. फॉर्म-16 या बैंक सर्टिफिकेट देरी से मिलने पर होने वाली गलतियों को सुधारने का यह आखिरी मौका है।

ITR Filing Rule 2026 : यूनियन बजट 2026 के बाद मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) से जुड़ी एक महत्वपूर्ण घोषणा सामने आई है। अक्सर जल्दबाजी या दस्तावेजों की कमी के कारण रिटर्न भरते समय होने वाली गलतियों को सुधारने के लिए अब करदाताओं को 31 मार्च तक का अतिरिक्त समय मिलेगा।

सरकार ने संशोधित रिटर्न (Revised Return) की समय सीमा को बढ़ाकर उन लोगों की चिंता कम कर दी है जो नोटिस के डर में रहते थे। अब यदि आपसे कोई कटौती (Deduction) क्लेम करना छूट गया है या कोई अतिरिक्त आय घोषित करना भूल गए हैं, तो उसे समय रहते सुधारा जा सकता है।

देरी और सुधार पर लगेगा जुर्माना

राहत की इस खबर के साथ वित्तीय अनुशासन का भी खास ध्यान रखा गया है, क्योंकि यह सुविधा पूरी तरह मुफ्त नहीं है। यदि आप मूल समय सीमा के बाद रिटर्न फाइल करते हैं या उसमें बदलाव करते हैं, तो आपको ‘लेट फाइलिंग फीस’ का भुगतान करना होगा।

जुर्माने की यह राशि आपकी सालाना आय पर निर्भर करेगी। 5 लाख रुपये तक की आय वालों के लिए जुर्माना कम रखा गया है, जबकि इससे अधिक आय वाले करदाताओं को भारी पेनल्टी देनी होगी। इसके अलावा, यदि सुधार के बाद आपकी टैक्स देनदारी बढ़ती है, तो उस पर बकाया ब्याज भी वसूला जाएगा।

सैलरीड क्लास को मिलेगा सीधा लाभ

इस नियम का सबसे बड़ा फायदा उन कर्मचारियों को होगा जिन्हें एंप्लॉयर से फॉर्म-16 या बैंक से ब्याज सर्टिफिकेट देरी से मिलते हैं। कई बार नौकरीपेशा लोग अनुमान के आधार पर रिटर्न भर देते हैं जिससे आंकड़ों में विसंगति पैदा हो जाती है।

पहली बार टैक्स भरने वाले युवाओं के लिए भी यह व्यवस्था सुरक्षा कवच की तरह काम करेगी। गलत फॉर्म के चुनाव या डेटा की त्रुटि होने पर नोटिस का इंतजार करने के बजाय, वे खुद अपनी गलती सुधार सकेंगे। यह प्रक्रिया न केवल भविष्य की कानूनी पेचीदगियों से बचाएगी, बल्कि करदाताओं की मानसिक शांति भी सुनिश्चित करेगी।

Parul Sharma

पारुल शर्मा 'दून हॉराइज़न' के बिज़नेस और फाइनेंस विभाग में एक प्रमुख आवाज़ हैं। पिछले एक वर्ष से, वह उत्तराखंड और राष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक नीतियों, बाज़ार के रुझानों और कॉर्पोरेट जगत की खबरों का विश्लेषण कर रही हैं। पारुल ने रांची विश्वविद्यालय से अपनी स्नातकोत्तर की शिक्षा पूरी की है। पारुल का उद्देश्य पाठकों तक ऐसी खबरें पहुँचाना है जो न केवल तथ्यात्मक हों, बल्कि उनके वित्तीय निर्णयों में मददगार भी साबित हों। 📧 Email: babitaupadhyay803@gmail.com

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