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Health Tips : अगर आप भी रहते हैं ज्यादा परेशान, तो विटामिन B12 की कमी हो सकती है वजह

भारत में एक बड़ी आबादी विटामिन बी-12 की कमी से जूझ रही है, जो नर्व्स और एनर्जी लेवल के लिए बेहद जरूरी है। सिर्फ डाइट ही नहीं, बल्कि खराब पाचन, बढ़ती उम्र और डायबिटीज या एसिडिटी की दवाएं भी शरीर में इस विटामिन को सोखने से रोकती हैं। अगर आपको हाथों-पैरों में झुनझुनी, लगातार कमजोरी या जीभ में सूजन महसूस हो रही है, तो यह खतरे की घंटी हो सकती है।

Published on: February 6, 2026 8:19 AM
Health Tips
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HIGHLIGHTS

  • शाकाहारी भोजन में कमी: पेड़-पौधों वाले खाने में बी-12 ना के बराबर होता है, इसलिए वेजिटेरियन लोगों में खतरा ज्यादा है।
  • पाचन की समस्या: अगर आंतें ठीक से काम नहीं कर रही हैं, तो मीट-अंडा खाने के बाद भी शरीर को विटामिन नहीं मिलेगा।
  • दवाओं का असर: डायबिटीज और एसिड रिफ्लक्स की कुछ दवाएं शरीर में विटामिन बी-12 का अब्जॉर्प्शन रोक देती हैं।
  • बढ़ती उम्र: उम्र बढ़ने के साथ पेट में एसिड कम बनता है, जिससे भोजन से विटामिन निकालना मुश्किल हो जाता है।

Health Tips : शरीर को सुचारू रूप से चलाने के लिए विटामिन बी-12 इंजन के ईंधन की तरह काम करता है। यह ब्लड सेल्स बनाने, नर्व्स को सुरक्षित रखने और एनर्जी लेवल बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है।

लेकिन चिंता की बात यह है कि भारत में बहुत सारे लोग इसकी कमी का शिकार हो रहे हैं। अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।

सिर्फ खाना ही नहीं, शरीर की क्षमता भी है वजह

आमतौर पर माना जाता है कि डाइट में कमी ही इसका एकमात्र कारण है। यह सच है कि पेड़-पौधों से मिलने वाले भोजन में विटामिन बी-12 बहुत कम होता है।

यही वजह है कि वेजिटेरियन और वीगन डाइट फॉलो करने वालों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है, क्योंकि यह विटामिन मुख्य रूप से मीट, अंडे और डेयरी उत्पादों में पाया जाता है। लेकिन कई बार नॉन-वेज खाने वाले भी इसकी कमी से जूझते हैं।

इसका बड़ा कारण खराब डाइजेशन है। अगर आपकी आंतें सही तरह से काम नहीं कर रही हैं, तो आप कितना भी पौष्टिक खाना खा लें, शरीर विटामिन बी-12 को सोख (अब्जॉर्ब) नहीं पाएगा।

गैस, क्रोहन और सीलिएक जैसी पेट की बीमारियों में आंतें इस विटामिन को ग्रहण करना बंद कर देती हैं।

दवाएं और उम्र भी डालती हैं असर

बढ़ती उम्र के साथ शरीर की कार्यप्रणाली धीमी होने लगती है। जैसे-जैसे हम बूढ़े होते हैं, पेट में एसिड का उत्पादन कम हो जाता है।

यह एसिड ही भोजन से विटामिन को अलग करने का काम करता है। यही कारण है कि अधेड़ उम्र और बुजुर्गों में इसकी कमी आम बात हो गई है।

इसके अलावा, आज के दौर में चल रही कुछ दवाएं भी दुश्मन बन बैठी हैं। डायबिटीज के मरीज जो दवाएं खाते हैं या जो लोग एसिड रिफ्लक्स (जलन) शांत करने की दवा लेते हैं, उन दवाओं के साइड इफेक्ट से भी बॉडी में विटामिन बी-12 का अब्जॉर्प्शन रुक जाता है।

ऑटोइम्यून बीमारी और लक्षण

एक गंभीर स्थिति ‘परनीसियस एनीमिया’ (Pernicious Anemia) है। यह एक ऑटोइम्यून कंडीशन है, जिसमें शरीर खुद उन सेल्स पर हमला कर देता है जो विटामिन बी-12 को सोखने में मदद करती हैं।

इस स्थिति में इलाज बेहद जरूरी हो जाता है। शरीर में इसकी कमी होने पर कुछ साफ संकेत दिखाई देते हैं। व्यक्ति को लगातार कमजोरी महसूस होती है।

सबसे आम लक्षण हाथों और पैरों में सुन्नपन या ऐसी झुनझुनी होना है जैसे चींटियां चल रही हों। इसके अलावा दिमाग का फोकस बिगड़ना, स्किन का पीला पड़ना (पीलिया जैसा) और जीभ में सूजन या दर्द होना भी इसके प्रमुख लक्षण हैं।

Rama Pun

रमा पुन एक प्रशिक्षित और अनुभवी लेखिका हैं, जो हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी खबरों में विशेषज्ञता रखती हैं। विभिन्न न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स पर 3 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, रमा पाठकों के लिए सटीक और रोचक कंटेंट तैयार करती हैं। उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी खूबी जटिल स्वास्थ्य विषयों को सरल और आम बोलचाल की भाषा में प्रस्तुत करना है, जिससे आम पाठक भी उसे आसानी से समझ सकें। 📧 Email: punr29638@gmail.com

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