नई दिल्ली, 05 अप्रैल, 2026 (दून हॉराइज़न)। केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के भविष्य का फैसला करने वाले 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की कार्यवाही अब विवादों के घेरे में आती दिख रही है। नेशनल काउंसिल (NC JCM) के स्टाफ साइड ने आयोग के कामकाज के तरीकों और मेमोरेंडम जमा करने की सीमित डिजिटल प्रक्रिया पर कड़ा एतराज जताया है।
स्टाफ साइड के सचिव शिवा गोपाल मिश्रा ने सदस्य सचिव पंकज जैन को 1 अप्रैल, 2026 को भेजे एक आधिकारिक पत्र में स्पष्ट किया है कि वर्तमान ढांचा कर्मचारियों की व्यापक राय जानने में असमर्थ है। यूनियन का तर्क है कि 3,500 कैरेक्टर्स (लगभग 500 शब्द) की मौजूदा सीमा बेहद कम है, जिससे जटिल मुद्दों को विस्तार से समझाना असंभव हो रहा है।
जेसीएम ने मांग की है कि शब्द सीमा को कम से कम 1,000 शब्द किया जाए। यह केवल तकनीकी सुधार नहीं बल्कि लाखों कर्मियों के लोकतांत्रिक हक का मामला है। संस्था ने जोर दिया है कि जवाब देने वालों को हर उप-प्रश्न (Sub-question) का विस्तार से विवरण देने की आजादी मिलनी चाहिए।

पत्र में सबसे संवेदनशील मुद्दा पेंशन सुधारों का रहा। स्टाफ साइड ने स्पष्ट रूप से नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के तहत आने वाली खामियों को रेखांकित किया है। उनकी मुख्य मांग CCS नियमों के तहत पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करना है, क्योंकि वे किसी भी प्रकार की अंशदायी (Contributory) पेंशन योजना के खिलाफ हैं।
महिला कर्मचारियों के हितों को लेकर भी इस बार आर-पार की जंग दिख रही है। जेसीएम ने प्रस्ताव दिया है कि महिलाओं के लिए वर्कप्लेस सुरक्षा, मैटरनिटी बेनिफिट, पीरियड्स के दौरान कल्याणकारी उपाय और चाइल्ड केयर लीव (CCL) के लिए आयोग के फॉर्म में एक अलग और विशेष सेक्शन होना चाहिए।
पेंशनर्स के हितों को लेकर भी चिंता जताई गई है। रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले लाभ, पेंशन में समानता और कम्यूटेड वैल्यू की बहाली जैसे विषयों पर आयोग को गंभीरता दिखाने की चेतावनी दी गई है। साथ ही, अलग-अलग विभागों की अपनी विशिष्ट समस्याओं को दर्ज करने के लिए भी ‘डिपार्टमेंट स्पेसिफिक’ प्रावधान की मांग की गई है।
तकनीकी मोर्चे पर आयोग के 2 MB अटैचमेंट साइज को नाकाफी बताते हुए इसे 10 MB करने की मांग की गई है ताकि डेटा और विस्तृत रिपोर्ट अपलोड की जा सकें। शिवा गोपाल मिश्रा ने मेमोरेंडम जमा करने की समय सीमा को बढ़ाकर 31 मई, 2026 करने का सुझाव दिया है, ताकि दूर-दराज के संगठनों से मशविरा किया जा सके।
उल्लेखनीय है कि आयोग को केवल ऑनलाइन ही नहीं, बल्कि ईमेल और हार्ड कॉपी के जरिए भी सुझाव स्वीकार करने चाहिए। स्टाफ साइड ने अपनी बात रखने के लिए 13 अप्रैल, 2026 के बाद किसी भी दिन आयोग के साथ आमने-सामने की बैठक करने की इच्छा जताई है।









