Best Rum For Winter : उत्तर भारत इस समय भीषण शीतलहर का सामना कर रहा है. 15 जनवरी बीत जाने के बाद भी सर्दी कम होने के बजाय और तीखी हो गई है. पहाड़ी राज्यों में लगातार हो रही बर्फबारी का सीधा असर मैदानी इलाकों के तापमान पर पड़ा है. मौसम के इस मिजाज ने लोगों की जीवनशैली और खान-पान को भी बदल दिया है.
सर्दियों में शरीर में गर्माहट बनाए रखने के लिए अक्सर ‘रम’ की मांग बाजार में बढ़ जाती है. इस भीड़ में एक नाम ऐसा है जो पिछले 71 सालों से भारतीय मदिरा प्रेमियों की जुबान पर है, और वह है ‘ओल्ड मोंक’.
1954 से कायम है ‘ओल्ड मोंक’ का दबदबा
ओल्ड मोंक महज एक शराब नहीं, बल्कि भारत की आइकॉनिक डार्क रम के रूप में जानी जाती है. इसकी शुरुआत वर्ष 1954 में मोहन मीकिन लिमिटेड ने की थी. सात दशक बीत जाने के बाद भी विदेशी ब्रांड्स की मौजूदगी के बीच इसने अपनी अलग पहचान बनाए रखी है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी स्मूथ बनावट है.
वेनिला, कारमेल और डार्क चॉकलेट के फ्लेवर का अनूठा मिश्रण इसे बाकी ब्रांड्स से अलग करता है. यही वजह है कि युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक, यह ब्रांड आज भी भारतीय बाजार पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है.
ओक बैरल में 7 साल पकने का विज्ञान
इसकी लोकप्रियता के पीछे सबसे बड़ा कारण इसकी निर्माण प्रक्रिया है. बाजार में इसके कई वेरिएंट्स हैं, लेकिन ‘7 इयर्स ओल्ड वेटेड’ डार्क रम सबसे ज्यादा बिकती है. इसे तैयार करने के लिए ओक (बलूत) की लकड़ी से बने बैरल का इस्तेमाल होता है.
रम को कम से कम 7 सालों तक इन बैरल में रखा जाता है, जिससे इसमें लकड़ी की खुशबू और एक परिपक्व स्वाद घुल जाता है. इसके अलावा, कंपनी का एक प्रीमियम संस्करण ‘ओल्ड मोंक सुप्रीम रम’ भी आता है, जिसे 18 सालों तक एजिंग प्रोसेस में रखा जाता है. यह संस्करण अपने बेहद स्मूथ स्वाद के लिए जाना जाता है.
कीमत और उपलब्धता है सबसे बड़ी यूएसपी
भारत में ओल्ड मोंक को सबसे बेहतरीन ‘वैल्यू फॉर मनी’ ड्रिंक्स में गिना जाता है. इसकी किफायती कीमत ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है. राजधानी दिल्ली के मौजूदा दामों के अनुसार, इसकी 180 मिलीलीटर (ML) की बोतल, जिसे आम बोलचाल में ‘क्वार्टर’ कहा जाता है, लगभग 355 रुपये में मिल जाती है. वहीं, 750 ML की पूरी बोतल भी 1000 रुपये से कम में उपलब्ध है, हालांकि राज्यों के टैक्स के हिसाब से इसमें थोड़ा अंतर हो सकता है.
इसमें व्हिस्की की तुलना में अल्कोहल की मात्रा 42.8% होती है, जो इसे कड़ाके की ठंड के लिए एक मजबूत विकल्प बनाती है. यह देश के लगभग हर हिस्से में सरकारी और निजी ठेकों पर आसानी से मिल जाती है. कुछ राज्यों में अब इसे लाइसेंस प्राप्त ऑनलाइन पोर्टल्स के जरिए भी मंगवाने की सुविधा है.



















