Budget 2026 : यूनियन बजट 2026 पेश होने में अब बहुत कम समय शेष है और देश भर के टैक्सपेयर्स की नजरें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर टिकी हैं। बढ़ती महंगाई और बदलती आर्थिक जरूरतों के बीच इस बार बजट में मध्यम वर्ग के लिए कुछ ठोस एलान होने की प्रबल संभावना है।
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एक्सपर्ट्स और इंडस्ट्री ने वित्त मंत्रालय के सामने अपनी मांगें रखी हैं, जिनमें टैक्स स्लैब में सुधार से लेकर हाउसिंग लोन पर बड़ी राहत शामिल है।
होम लोन और हाउसिंग सेक्टर के लिए उम्मीदें
रियल एस्टेट सेक्टर और आम घर खरीदारों की सबसे बड़ी मांग होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली टैक्स छूट को लेकर है। वर्तमान में सेक्शन 24बी के तहत यह छूट 2 लाख रुपये तक सीमित है। घरों की बढ़ती कीमतों को देखते हुए इसे बढ़ाकर 4 लाख रुपये किए जाने की उम्मीद है।
इसके अलावा, मेट्रो शहरों में प्रॉपर्टी के दाम आसमान छू रहे हैं। अभी 45 लाख रुपये तक के घर को ‘किफायती’ या एफोर्डेबल हाउसिंग माना जाता है। सरकार इस परिभाषा को बदलकर सीमा 75 लाख रुपये कर सकती है, जिससे एक बड़ा वर्ग सरकारी योजनाओं का लाभ ले सकेगा।
पति-पत्नी के लिए ‘ज्वाइंट टैक्सेशन’ का प्रस्ताव
इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने सरकार को एक अहम सुझाव दिया है। इसके तहत पति और पत्नी के लिए ‘ज्वाइंट टैक्सेशन’ की सुविधा शुरू करने की बात कही गई है। अमेरिका और यूरोप में यह सिस्टम पहले से लागू है। अगर भारत में इसे मंजूरी मिलती है, तो कामकाजी दंपतियों की कुल टैक्स देनदारी में भारी कमी आ सकती है।
ओल्ड और न्यू टैक्स रीजीम में संतुलन
पिछले बजट में सरकार ने न्यू टैक्स रीजीम को आकर्षक बनाते हुए 12 लाख रुपये तक की आय को प्रभावी रूप से टैक्स-फ्री कर दिया था, लेकिन ओल्ड रीजीम वालों के हाथ खाली रहे थे। इस बार ओल्ड रीजीम के टैक्स स्लैब में बदलाव की उम्मीद है।
इसके साथ ही स्टैंडर्ड डिडक्शन में भी अंतर है। न्यू रीजीम में यह 75,000 रुपये है, जबकि ओल्ड रीजीम में अभी भी 50,000 रुपये ही मिलता है। महंगाई को देखते हुए सरकार ओल्ड रीजीम में भी इसे बढ़ाने का फैसला ले सकती है।
निवेश और इंश्योरेंस पर राहत
शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (LTCG) की सीमा बढ़ाने की चर्चा है। अभी एक साल में 1.25 लाख रुपये तक का मुनाफा टैक्स-फ्री है, जिसे बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये किया जा सकता है। वहीं, डेट फंड्स के सख्त टैक्स नियमों में ढील देकर निवेशकों को वापस लुभाने की कोशिश हो सकती है।
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बीमा क्षेत्र में भी बदलाव संभव है। अभी टर्म और हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर डिडक्शन सिर्फ ओल्ड रीजीम में मिलता है। न्यू रीजीम को बढ़ावा देने के लिए सरकार इसमें भी इंश्योरेंस प्रीमियम पर टैक्स छूट जोड़ सकती है।
टीडीएस और ईवी लोन
टैक्सपेयर्स के लिए टीडीएस (TDS) की अलग-अलग दरों को समझना मुश्किल होता है। वित्त मंत्री इन दरों की संख्या घटाकर सिर्फ 2 या 3 कर सकती हैं ताकि प्रक्रिया सरल हो। प्रदूषण कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के लोन पर ब्याज दरों में कमी के उपाय भी बजट का हिस्सा हो सकते हैं।



















