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बेटियां अब बेखौफ होकर जाएंगी स्कूल, उत्तर प्रदेश में तैयार हुई महिला ई-रिक्शा पायलटों की स्पेशल फोर्स

उत्तर प्रदेश सरकार ने 'सेफ मोबिलिटी प्रोग्राम' के तहत महिलाओं और छात्राओं को सुरक्षित परिवहन देने के लिए महिला ई-रिक्शा पायलटों की तैनाती शुरू की है। शुरुआती चरण में 1000 ई-रिक्शा वितरित किए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के लिए सुरक्षित सफर और रोजगार के नए द्वार खुले हैं।

बेटियां अब बेखौफ होकर जाएंगी स्कूल, उत्तर प्रदेश में तैयार हुई महिला ई-रिक्शा पायलटों की स्पेशल फोर्स

HIGHLIGHTS

  • अयोध्या, गोरखपुर और वाराणसी समेत 5 जिलों में योजना का सफल संचालन शुरू।
  • प्रशिक्षित महिला पायलट सालाना 3 लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रही हैं।
  • स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को ई-रिक्शा देकर बनाया जा रहा है माइक्रो-उद्यमी।

लखनऊ, 05 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तर प्रदेश की सड़कों पर अब सुरक्षा का नया पहरा दिखाई देगा, जहां महिला ड्राइवरों के हाथों में ई-रिक्शा की कमान होगी। योगी सरकार ने ‘सेफ मोबिलिटी प्रोग्राम’ के जरिए आधी आबादी को न सिर्फ सुरक्षित सफर की गारंटी दी है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के लिए पायलटों की एक बड़ी फौज उतार दी है।

यह पहल सीधे तौर पर उन छात्राओं और कामकाजी महिलाओं को ध्यान में रखकर शुरू की गई है, जिन्हें ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में परिवहन के दौरान असुरक्षा महसूस होती थी। सरकार ने इस मिशन के लिए उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स के साथ हाथ मिलाया है।

शुरुआती ब्लूप्रिंट के मुताबिक, पहले फेज में स्वयं सहायता समूहों (SHG) की महिलाओं को 1000 ई-रिक्शा मुहैया कराए जा रहे हैं। अयोध्या, गोरखपुर, वाराणसी, कौशांबी और झांसी में यह मशीनरी धरातल पर काम करना शुरू कर चुकी है। जल्द ही लखनऊ, प्रयागराज, मिर्जापुर, भदोही, सोनभद्र, देवरिया, लखीमपुर खीरी और सीतापुर की सड़कों पर भी महिला पायलट फर्राटा भरती नजर आएंगी।

यूपी सरकार की यह रणनीति केवल परिवहन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सफल बिजनेस मॉडल के रूप में उभरी है। आंकड़ों की गहराई में जाएं तो अब तक 119 महिलाओं को सीधे उद्यमी बनाया जा चुका है। 629 से अधिक महिलाओं ने ड्राइविंग का कड़ा प्रशिक्षण पूरा कर लिया है, जबकि 244 महिलाओं को आधिकारिक ड्राइविंग लाइसेंस भी जारी किए जा चुके हैं।

आर्थिक मोर्चे पर इस योजना ने चौंकाने वाले परिणाम दिए हैं। इस कार्यक्रम से जुड़ी महिलाएं प्रति वर्ष औसतन 3 लाख रुपये से अधिक की कमाई कर रही हैं। यह आंकड़ा ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिहाज से एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, यह मॉडल भविष्य में पूरे प्रदेश के 75 जिलों में विस्तार पाएगा।

यूपी अब महिला सुरक्षा के मामले में एक ‘मॉडल स्टेट’ बनने की राह पर है। जहां एक ओर मिशन शक्ति के जरिए पुलिसिंग मजबूत की गई, वहीं ‘सेफ मोबिलिटी’ ने परिवहन की बुनियादी समस्या को जड़ से खत्म करने का प्रयास किया है। गांवों के सामाजिक ढांचे में यह बदलाव बेटियों की शिक्षा और महिलाओं की कार्यक्षमता को बढ़ाने में गेम-चेंजर साबित होगा।

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Shubham Kochhar

शुभम कोचर 'दून हॉराइज़न' के उत्तर प्रदेश ब्यूरो चीफ के रूप में देश के सबसे बड़े राज्य की राजनीतिक और सामाजिक नब्ज़ टटोलते हैं। यूपी की राजनीति, प्रशासनिक फैसलों, क्राइम और विकास कार्यों की ग्राउंड रिपोर्टिंग में उन्हें खासा अनुभव है। शुभम का उद्देश्य सिर्फ खबरें देना नहीं, बल्कि सरकारी दावों की जमीनी हकीकत की जांच (Fact-check) करना है। उनकी निष्पक्ष, बेबाक और शोध-आधारित लेखनी सत्ता और आम जनता के बीच एक मजबूत पुल का काम करती है, जो पाठकों के भरोसे (Trust) पर पूरी तरह खरी उतरती है।

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