भारतीय अर्थव्यवस्था में नकद की जगह अब ‘प्लास्टिक मनी’ ने पूरी तरह पैर पसार लिए हैं। डेबिट, क्रेडिट और प्रीपेड कार्ड्स न केवल भारी कैश ढोने की मजबूरी खत्म कर रहे हैं, बल्कि हर खरीदारी पर बचत का मौका भी दे रहे हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 2026 की शुरुआत तक डिजिटल क्रेडिट कार्ड ट्रांजेक्शन में 22% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
तकनीकी रूप से प्लास्टिक मनी एक इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणाली है जो चिप और पिन तकनीक पर आधारित है। जहां डेबिट कार्ड आपके बैंक खाते में जमा राशि का उपयोग करता है, वहीं क्रेडिट कार्ड आपको एक पूर्व-निर्धारित सीमा तक उधार लेने की सुविधा देता है।
हाल ही में RuPay क्रेडिट कार्ड को UPI से जोड़ने की सुविधा ने गेम बदल दिया है, जिससे अब आप किसी भी रेहड़ी-पटरी वाले के QR कोड को स्कैन कर क्रेडिट कार्ड से भुगतान कर सकते हैं।

सुरक्षा के लिहाज से प्लास्टिक मनी अब अभेद्य होती जा रही है। RBI ने अब सभी डिजिटल पेमेंट्स के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) अनिवार्य कर दिया है, जिसमें बायोमेट्रिक और OTP का दोहरा सुरक्षा कवच मिलता है। इसके अलावा, ‘जीरो लायबिलिटी पॉलिसी’ के तहत कार्ड खोने या धोखाधड़ी होने पर तुरंत रिपोर्ट करने पर ग्राहक की कोई वित्तीय जिम्मेदारी नहीं होती।
हालांकि, 2026 से कुछ नियमों में कड़े बदलाव भी हुए हैं। अब यूटिलिटी बिलों (बिजली, पानी) के भुगतान पर 1% अतिरिक्त शुल्क लगेगा यदि राशि एक बिलिंग चक्र में 50,000 रुपये से अधिक है।
साथ ही, क्रेडिट कार्ड से कैश निकालना अब और महंगा हो गया है, क्योंकि कैश एडवांस फीस को बढ़ाकर न्यूनतम 500 रुपये कर दिया गया है। जानकारों की सलाह है कि क्रेडिट लिमिट का केवल 30% ही इस्तेमाल करें ताकि आपका क्रेडिट स्कोर बेहतर बना रहे।









