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Dehradun News : कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा, दून के 8 गिरासू भवनों में जान जोखिम में डाल रह रहे लोग

दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने के बाद देहरादून नगर निगम सतर्क। दून के 21 गिरासू भवनों में से 8 में अब भी रह रहे लोग, 15 मुख्य इलाकों में मंडरा रहा बड़ा खतरा।

Published On: September 7, 2026 4:02 PM
Dehradun Nagar Nigam dilapidated buildings

HIGHLIGHTS

  • दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला मकान गिरने से 6 लोगों की मौत।
  • देहरादून में 21 जर्जर इमारतें चिह्नित, 8 में अब भी परिवार रह रहे।
  • आढ़त बाजार, गांधी रोड और मोती बाजार समेत 15 मुख्य इलाकों में खतरा।
  • कानूनी विवाद के कारण 6 खतरनाक इमारतों का मामला कोर्ट में अटका।
  • रिस्पना-बिंदाल किनारे बसी काठबंगला और सपेरा बस्तियों में भी अलर्ट।

दून हॉराइज़न, देहरादून (7 सितंबर): देश की राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत जमींदोज होने और 6 जिंदगियां खत्म होने की गूंज अब देहरादून (Dehradun News) की गलियों में भी साफ सुनाई दे रही है।

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मानसून की लगातार बौछारों के बीच दून नगर निगम (Dehradun Municipal Corporation) ने शहर में चिह्नित 21 गिरासू भवनों को लेकर अपनी कवायद तेज कर दी है। जमीनी हकीकत डराने वाली है। इन 21 घोषित खतरनाक ढांचों में से 8 इमारतों में आज भी लोग अपनी जिंदगी दांव पर लगाकर रह रहे हैं।

15 प्रमुख इलाकों में मौत का साया, 8 भवनों में अब भी चूल्हा जल रहा

शहर के पुराने और घनी आबादी वाले बाजारों में खतरा सबसे ज्यादा बना हुआ है। आढ़त बाजार, तिलक रोड, मोती बाजार, कांवली रोड, खुड़बुड़ा, गांधी रोड और कौलागढ़ रोड जैसे व्यस्ततम क्षेत्रों में खड़े कई दशक पुराने ढांचे कभी भी भरभराकर गिर सकते हैं। इसके अलावा बल्लीवाला चौक, चकराता रोड स्थित एलआईसी बिल्डिंग के पास, मोहब्बेवाला इंडस्ट्रियल एरिया, कैनाल रोड, खदरी मोहल्ला, इंद्रेशनगर, पार्क रोड और सैय्यद मोहल्ला में भी ऐसे जर्जर भवनों की पहचान की गई है।

निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक, 7 इमारतों को पूरी तरह खाली करा लिया गया है। लेकिन 8 इमारतों में किरायेदार और मालिक बेपरवाह होकर टिके हैं। बाकी 6 इमारतों पर कानूनी पेंच फंसा है। वहां मामला अदालत में विचाराधीन होने की वजह से निगम सीधे बुलडोजर नहीं चला पा रहा।

अधिशासी अभियंता का अल्टीमेटम, कानूनी पेंच बनी बड़ी अड़चन

निगम के अधिशासी अभियंता (EE) रजित कोटियाल ने साफ किया कि सभी 21 चिह्नित भवनों के स्वामियों और वहां काबिज किरायेदारों को औपचारिक नोटिस थमाए जा चुके हैं। लगातार हो रही भारी बारिश के चलते ईंट-गारे से बनी पुरानी दीवारों की नींव कमजोर पड़ चुकी है। कई जगहों पर छज्जे और बीम झुक चुके हैं।

तकनीकी टीम ने चेतावनी दी है कि सीलन और अतिरिक्त भार की वजह से ये इमारतें बिना किसी पूर्व चेतावनी के ढह सकती हैं। लेकिन विस्थापन या मुआवजे और किरायेदारी के पुराने विवादों के चलते लोग अपनी जान जोखिम में डालकर वहीं डटे हैं।

नदी-नाले किनारे बसी बस्तियों में जलस्तर बढ़ने से दोहरी चुनौती

पहाड़ों से मैदान की ओर बहने वाले नालों और बरसाती नदियों के उफान ने मैदानी बस्तियों की नींद उड़ा रखी है। दून में रिस्पना और बिंदाल जैसी नदियों के किनारे बसी काठबंगला बस्ती, सपेरा बस्ती, चूना भट्ठा के समीपवर्ती इलाके और दून विहार में कई कच्चे-पक्के आशियाने सीधे बहाव क्षेत्र में खड़े हैं। जिला प्रशासन की संयुक्त टीमें लगातार इन इलाकों में मुनादी करवा रही हैं।

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जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान और नगर आयुक्त आलोक पांडेय ने साफ निर्देश दिए हैं कि जलभराव या कटाव की स्थिति बनते ही इन इलाकों से लोगों को तुरंत सुरक्षित शेल्टर होम में शिफ्ट कराया जाए, ताकि दिल्ली जैसा कोई हादसा राजधानी में न दोहराया जा सके।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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