Diabetes Care : डायबिटीज के मरीजों के लिए मसूर दाल पूरी तरह नुकसानदेह नहीं है, लेकिन इसे पकाने का तरीका और मात्रा ब्लड शुगर को सीधे प्रभावित कर सकती है। सही तरीके से सीमित मात्रा में खाने पर यह सुरक्षित रहती है।
डायबिटीज में मसूर दाल: क्या यह ब्लड शुगर बढ़ाती है? जानिए सही तरीका और जरूरी सावधानियां
डायबिटीज में खानपान का सीधा असर ब्लड शुगर लेवल पर पड़ता है। ऐसे में हर दाल, सब्जी या अनाज को लेकर यह सवाल रहता है कि क्या इसका सेवन सुरक्षित है।
मसूर दाल को लेकर भी अक्सर भ्रम रहता है कि क्या शुगर के मरीजों को इसे खाना चाहिए या पूरी तरह बंद कर देना चाहिए।
मसूर दाल और ब्लड शुगर का गणित
मसूर दाल में प्रोटीन और फाइबर के साथ-साथ कार्बोहाइड्रेट भी मौजूद होता है। जब इसे बहुत ज्यादा गलाकर या मैश करके खाया जाता है, तो शरीर में इसका अवशोषण तेज हो जाता है, जिससे कुछ मामलों में ब्लड शुगर में अचानक बढ़ोतरी देखी जा सकती है।
हालांकि, साबुत मसूर (काली/खड़ी मसूर) में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो ग्लूकोज के अवशोषण को धीमा रखने में मदद करती है।
वहीं धुली लाल मसूर जल्दी पचती है, इसलिए इसका पोर्शन कंट्रोल में रखना ज्यादा जरूरी होता है।
पकाने और खाने में कहां होती है गलती?

अक्सर दाल को बहुत ज्यादा तेल-मसालों के साथ तड़का लगाया जाता है या फिर दाल की तुलना में चावल की मात्रा बहुत अधिक रखी जाती है। यह कॉम्बिनेशन ब्लड शुगर को तेजी से ऊपर ले जाता है।
इसके अलावा, अगर दाल को बिना भिगोए सीधा पकाया जाए, तो इसका पाचन धीमा और भारी हो सकता है, जिससे पेट फूलने या अपच की समस्या भी हो सकती है।
डायबिटीज में मसूर दाल खाने के सही नियम

- साबुत दाल चुनें: धुली लाल मसूर की जगह छिलके वाली खड़ी मसूर दाल को प्राथमिकता दें। इसका फाइबर ब्लड शुगर को स्थिर रखने में मदद करता है।
- भिगोकर बनाएं: पकाने से कम से कम 1 से 2 घंटे पहले दाल को पानी में भिगो दें। इससे फाइटिक एसिड कम होता है और पाचन आसान बनता है।
- सब्जियां मिलाएं: दाल में पालक, लौकी या मेथी जैसी हरी सब्जियां डालकर पकाएं। इससे मील का ग्लाइसेमिक लोड कम हो जाता है।
- पोर्शन साइज तय रखें: एक बार में एक छोटी कटोरी दाल ही लें और साथ में सिर्फ दाल-चावल खाने के बजाय भरपूर सलाद शामिल करें।
- हल्का तड़का लगाएं: ज्यादा घी या रिफाइंड तेल के बजाय जीरा, हींग और लहसुन का हल्का तड़का इस्तेमाल करें।
किन मरीजों को सावधानी बरतनी चाहिए?
जिन लोगों का फास्टिंग या पोस्ट-मील शुगर लेवल पहले से बहुत अनियंत्रित चल रहा हो, उन्हें दाल की मात्रा सीमित रखनी चाहिए।
भोजन के दो घंटे बाद ग्लूकोमीटर से रीडिंग चेक करके यह समझना आसान होता है कि आपके शरीर पर मसूर दाल का क्या असर हो रहा है।











