Fruit For Cancer : शरीफा परिवार से ताल्लुक रखने वाला ग्रेविओला (वैज्ञानिक नाम: एनोना मुरिकाता) इन दिनों अपनी स्वास्थ्य खूबियों को लेकर काफी चर्चा में है।
भारत के कई हिस्सों में इसे हनुमान फल, शूल-रामफल या मुल्लथा के नाम से भी जाना जाता है। खट्टे-मीठे स्वाद वाला यह फल पोषक तत्वों से भरपूर होता है और पारंपरिक चिकित्सा में लंबे समय से इस्तेमाल होता रहा है।
ग्रेविओला और कैंसर रिसर्च की असल स्थिति
इंटरनेट और सोशल मीडिया पर अक्सर यह दावा किया जाता है कि ग्रेविओला कैंसर का पक्का इलाज है।
वैज्ञानिक नजरिए से समझें तो प्रयोगशाला (लैब) अध्ययनों में इसके अर्क में ऐसे बायोएक्टिव कंपाउंड पाए गए हैं, जो कुछ कैंसर सेल्स की ग्रोथ को धीमा करने में मदद करते हैं।
हालांकि, किसी भी फल या जड़ी-बूटी को मेडिकल ट्रीटमेंट या कीमोथेरेपी का विकल्प नहीं माना जा सकता। इंसानों पर इसके व्यापक क्लिनिकल ट्रायल अभी जारी हैं।
इसलिए इसे एक पौष्टिक फल के तौर पर डाइट में शामिल करना सही है, लेकिन डॉक्टरी इलाज की जगह इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करता है
ग्रेविओला में प्रचुर मात्रा में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। ये तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।
बदलते मौसम में होने वाले सामान्य संक्रमणों से बचाव के लिए इसका सीमित मात्रा में सेवन फायदेमंद माना जाता है।
ब्लड प्रेशर और दिल की सेहत के लिए उपयोगी
इस फल में पोटैशियम और फाइबर की अच्छी मात्रा होती है। पोटैशियम शरीर में सोडियम के स्तर को संतुलित रखने में मदद करता है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में सहायता मिलती है।
इसके अलावा, इसका फाइबर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है।
एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-माइक्रोबियल गुण
पारंपरिक तौर पर ग्रेविओला की पत्तियों और छाल का काढ़ा जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है।
इसमें मौजूद एंटी-माइक्रोबियल गुण पेट के कीड़ों और फंगल समस्याओं से लड़ने में भी शरीर का सहयोग करते हैं।
इस्तेमाल का तरीका और जरूरी सावधानियां
ग्रेविओला को ताजे फल के रूप में, जूस बनाकर या स्मूदी में मिलाकर खाया जा सकता है।
इसके बीजों का सेवन करने से बचना चाहिए, क्योंकि उनमें कुछ ऐसे यौगिक होते हैं जो सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं।
यदि आप लो ब्लड प्रेशर, पार्किंसंस या किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं, तो इसके नियमित सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।
गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को बिना डॉक्टरी परामर्श के इसका अर्क या सप्लीमेंट नहीं लेना चाहिए।

ग्रेविओला पोषक तत्वों से भरपूर एक बेहतरीन फल है, जो संतुलित जीवनशैली का हिस्सा बन सकता है। इसे किसी गंभीर बीमारी के चमत्कारी इलाज के बजाय एक स्वास्थ्यवर्धक फल के रूप में देखना ही सही दृष्टिकोण है।
















