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Grok और Gemini पर आंख मूंदकर न करें भरोसा, गलत जवाबों से हो सकती है परेशानी

ChatGPT और Gemini जैसे एआई चैटबॉट काम को आसान बनाते हैं, लेकिन इनका गलत इस्तेमाल भारी पड़ सकता है। अपनी बैंकिंग डीटेल्स, मेडिकल सलाह या गैरकानूनी सवाल इन प्लेटफॉर्म्स पर पूछने से बचें, क्योंकि यह आपकी प्राइवेसी और सुरक्षा दोनों के लिए खतरा है।

Published on: January 6, 2026 5:31 PM
Grok और Gemini पर आंख मूंदकर न करें भरोसा, गलत जवाबों से हो सकती है परेशानी
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HIGHLIGHTS

  • बैंक डीटेल्स, आधार नंबर या ऑफिस के सीक्रेट डॉक्यूमेंट्स चैटबॉट से शेयर न करें।
  • बीमारी के इलाज या दवा के लिए एआई पर भरोसा न करें, यह डॉक्टर का विकल्प नहीं है।
  • हैकिंग या धोखाधड़ी जैसे गैरकानूनी कामों के बारे में पूछना कानूनी मुसीबत में डाल सकता है।
  • एआई से मिली जानकारी हमेशा सही नहीं होती, इसलिए फैक्ट्स को क्रॉस-चेक जरूर करें।

डिजिटल दुनिया में ChatGPT, Grok और Gemini जैसे एआई चैटबॉट अब हमारे रूटीन का हिस्सा हैं। ऑफिस का काम हो या सामान्य जानकारी, हम इन टूल्स पर भरोसा करने लगे हैं।

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लेकिन, यह सुविधा अपने साथ कुछ गंभीर जोखिम भी लेकर आई है। अगर आप बिना सोचे-समझे इनसे सवाल पूछ रहे हैं, तो आप अपनी प्राइवेसी को खतरे में डाल रहे हैं। यहां जानिए वो चार बातें जो आपको एआई से कभी नहीं पूछनी चाहिए।

पर्सनल और फाइनेंशियल डेटा शेयर न करें

एआई सिस्टम मूल रूप से टेक्स्ट को प्रोसेस करने के लिए बने हैं, न कि आपके राज छिपाने के लिए। चैटबॉट से बात करते समय कभी भी बैंक डीटेल्स, आधार नंबर, पासवर्ड या वर्कप्लेस की कॉन्फिडेंशियल जानकारी साझा न करें।

भले ही कंपनियां दावा करती हों कि एआई बातचीत याद नहीं रखता, लेकिन सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए आपकी चैट को स्टोर या रिव्यू किया जा सकता है। संवेदनशील फाइलों या डेटा का एआई से विश्लेषण करवाना सीधे तौर पर डेटा लीक को न्योता देना है।

डॉक्टर बनकर इलाज न पूछें

सबसे जरूरी बात यह समझना है कि एआई चैटबॉट डॉक्टर नहीं हैं। ये टूल्स केवल इंटरनेट पर मौजूद डेटा के आधार पर लक्षणों का सार बता सकते हैं या मेडिकल शब्द समझा सकते हैं।

एआई न तो बीमारी को डायग्नोस कर सकता है और न ही सही इलाज बता सकता है। स्वास्थ्य के लिए फिजिकल जांच और डॉक्टर की राय जरूरी है। दवा या डोज के लिए एआई के जवाब पर भरोसा करने से सही इलाज में देरी हो सकती है, जो जानलेवा भी साबित हो सकता है।

गैरकानूनी सलाह भारी पड़ सकती है

हैकिंग, धोखाधड़ी, सॉफ्टवेयर क्रैक करना या टैक्स चोरी जैसे विषयों पर एआई से मदद मांगना आपको मुसीबत में डाल सकता है। एआई चैटबॉट अवैध गतिविधियों के लिए नहीं बनाए गए हैं और इनमें ऐसे कंटेंट को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय होते हैं।

इसके बावजूद, अगर आप ऐसे निर्देश देते हैं और उन पर अमल करते हैं, तो इसके कानूनी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। इसकी पूरी जिम्मेदारी यूजर की ही होगी।

एआई के जवाब ‘अंतिम सच’ नहीं हैं

चैटबॉट रियल टाइम वेरिफिकेशन के बजाय पुराने डेटा पैटर्न पर काम करते हैं। वे गलतियां कर सकते हैं, पेचीदा सवालों को ज्यादा ही सरल बना सकते हैं या पुरानी जानकारी दे सकते हैं।

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कानूनी फैसले, निवेश या ब्रेकिंग न्यूज के लिए एआई के जवाब को बिना जांचे सच मान लेना बड़ी गलती होगी। एआई का इस्तेमाल केवल रिसर्च शुरू करने के लिए करें, इसे फाइनल अथॉरिटी न मानें।

Prateek Sharma

प्रतीक शर्मा एक तकनीक-प्रेमी लेखक हैं, जो मोबाइल और टेक्नोलॉजी जगत की गहरी समझ रखते हैं। इनोवेशन (नवाचार) के प्रति अपने जुनून के चलते, वह टेक्नोलॉजी के नवीनतम ट्रेंड्स, नए गैजेट लॉन्च और तकनीकी प्रगति पर विस्तृत व ज्ञानवर्धक लेख तैयार करते हैं। उनकी लेखन शैली की खासियत यह है कि वह जटिल तकनीकी विषयों को भी बेहद सरल भाषा में प्रस्तुत करते हैं। प्रतीक शर्मा पिछले चार वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं।

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