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आंखों का बार-बार फड़कना कहीं बीमारी का संकेत तो नहीं? जानें क्या कहती है सेहत

लगातार आंख फड़कने को लोग अक्सर शुभ-अशुभ से जोड़कर देखते हैं, जबकि यह शरीर में तनाव, थकान या पोषण की कमी का संकेत हो सकता है। यदि यह समस्या कई दिनों तक बनी रहे या इसके साथ चेहरे में खिंचाव महसूस हो, तो समय रहते डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।

Published On: August 8, 2026 10:51 AM
Dry Eyes Symptoms

Dry Eyes Symptoms : दिनभर कंप्यूटर के आगे काम करते वक्त या अचानक सुबह उठते ही कई बार आपकी पलकें अपने आप कांपने या फड़कने लगती हैं।

समाज में इसे लेकर तरह-तरह के अंधविश्वास प्रचलित हैं, लेकिन मेडिकल साइंस में इसे मांसपेशियों का अनैच्छिक संकुचन (Involuntary Muscle Spasm) कहा जाता है।

अक्सर यह समस्या थोड़ी देर में अपने आप ठीक हो जाती है, लेकिन अगर आपकी आंख घंटों या हफ्तों तक लगातार फड़क रही है, तो इसे सामान्य मानकर टालना आपकी सेहत पर भारी पड़ सकता है।

आंख फड़कने की मुख्य वजहें

स्क्रीन टाइम और आंखों की थकान: लगातार फोन, लैपटॉप या टीवी की स्क्रीन पर नजरें टिकाए रखने से आंखों की मांसपेशियों पर भारी दबाव पड़ता है।

इसे डिजिटल आई स्ट्रेन कहते हैं, जिससे आंखों में सूखापन (Dry Eyes) आता है और फड़कने की समस्या शुरू होती है।

तनाव और नींद की कमी: पर्याप्त नींद न मिलने पर हमारा तंत्रिका तंत्र (Nervous System) सही से काम नहीं कर पाता। मानसिक तनाव भी आंखों के आसपास की नसों को प्रभावित करता है।

कैफीन और शराब का अधिक सेवन: दिन में बार-बार चाय, कॉफी या एनर्जी ड्रिंक्स पीने से शरीर में कैफीन की मात्रा बढ़ती है। यह मांसपेशियों में उत्तेजना पैदा कर फड़कन को बढ़ा सकता है।

शरीर में पोषक तत्वों का असंतुलन: शरीर में मैग्नीशियम, विटामिन B12 या पोटैशियम जैसे जरूरी न्यूट्रिएंट्स की कमी नसों और मांसपेशियों के तालमेल को बिगाड़ देती है।

कब होती है स्थिति गंभीर?

ज्यादातर मामलों में आंख का फड़कना नुकसानदेह नहीं होता, लेकिन कुछ स्थितियों में यह नसों से जुड़ी बीमारियों का शुरुआती लक्षण भी हो सकता है।

ब्लेफरोस्पस्म (Blepharospasm): इस स्थिति में आंखों की पलकें बार-बार और काफी जोर से बंद होने लगती हैं।

हेमीफेशियल स्पैज़्म (Hemifacial Spasm): इसमें चेहरे के एक हिस्से की मांसपेशियां और नसें प्रभावित होती हैं।

डॉक्टर की सलाह कब लेना जरूरी है?

अगर आपको अपनी आंख फड़कने के साथ-साथ नीचे दिए गए लक्षण दिखें, तो बिना देरी किए किसी नेत्र विशेषज्ञ (Ophthalmologist) को दिखाएं:

फड़कने की समस्या लगातार एक हफ्ते से ज्यादा समय तक बनी रहे। आंख फड़कने के साथ-साथ पलक पूरी तरह बंद होने लगे या आंख खोलने में दिक्कत हो।

चेहरे के अन्य हिस्सों या गालों में भी खिंचाव और झटके महसूस हों। आंख में लालिमा, पानी आना, दर्द होना या धुंधला दिखाई देना।

राहत पाने के व्यावहारिक उपाय

आंखों को आराम देने और इस समस्या को कम करने के लिए अपनी दिनचर्या में ये छोटे बदलाव करें:

20-20-20 नियम अपनाएं: स्क्रीन पर काम करते समय हर 20 मिनट बाद 20 फीट दूर रखी किसी वस्तु को 20 सेकंड के लिए देखें।

आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल: यदि आपकी आंखें सूखी रहती हैं, तो डॉक्टर की सलाह से आई ड्रॉप्स (Artificial Tears) का उपयोग करें।

सिकाई करें: हल्की गर्म पट्टी या रुमाल से आंखों की हल्की सिकाई करने से मांसपेशियों को तुरंत आराम मिलता है।

कैफीन कम करें: दिनभर में चाय और कॉफी का सेवन सीमित करें और भरपूर पानी पिएं।

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Rama Pun

रमा पुन 'दून हॉराइज़न' में हेल्थ और लाइफस्टाइल संपादक के रूप में अपनी अहम जिम्मेदारी निभा रही हैं। स्वास्थ्य, फिटनेस, खानपान और मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) के विषयों पर उनकी पकड़ बेहद मजबूत है। रमा का फोकस हमेशा मेडिकल एक्सपर्ट्स की पुख्ता सलाह और वैज्ञानिक शोध पर आधारित (Evidence-based) खबरें लिखने पर रहता है। उनका स्पष्ट मानना है कि सेहत से जुड़ी कोई भी जानकारी शत-प्रतिशत प्रामाणिक होनी चाहिए। अपनी आकर्षक और तथ्यपरक लेखनी से वे पाठकों को एक स्वस्थ, तनावमुक्त और संतुलित जीवनशैली अपनाने के लिए निरंतर प्रेरित और जागरूक करती हैं।

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