ताज़ा समाचार देश विदेश क्राइम बिज़नेस खेल मनोरंजन ऑटो गैजेट्स धर्म राशिफल आज का पंचांग
हेल्थ लाइफस्टाइल करियर ट्रेंडिंग

Kanwar Gangajal Niyam : घर में कांवड़ का गंगाजल रखते समय न भूलें ये नियम, जानें रखने की सही दिशा और जरूरी नियम

कांवड़ यात्रा के दौरान लाया गया पवित्र गंगाजल घर में सही जगह और नियम से रखना बेहद जरूरी माना जाता है। इस लेख में जानें जल रखने की शुभ दिशा, जरूरी सावधानियां और शिवजी के जलाभिषेक की सही विधि।

Published On: August 11, 2026 9:29 AM
Kanwar Gangajal Niyam

Kanwar Gangajal Niyam : सावन के महीने में लाखों श्रद्धालु पैदल यात्रा करके कांवड़ में गंगाजल लाते हैं और भगवान शिव को अर्पित करते हैं।

धार्मिक दृष्टिकोण से कांवड़ का जल साधारण पानी नहीं, बल्कि अटूट श्रद्धा और गंगाजी की पवित्रता का प्रतीक है।

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि जब तक जलाभिषेक न हो, तब तक इस पवित्र जल को घर में किस जगह और कैसे संभालकर रखना चाहिए।

अगर आप भी कांवड़ जल घर ला रहे हैं, तो इसके रख-रखाव और पूजन से जुड़े नियमों का ध्यान रखना जरूरी है।

घर में कांवड़ का जल रखने की सबसे सही दिशा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कांवड़ के जल को हमेशा घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में रखना चाहिए। यह दिशा देवी-देवताओं का स्थान मानी जाती है।

अगर ईशान कोण में जगह की सुविधा न हो, तो आप इसे अपने घर के पूजा स्थान पर भी रख सकते हैं। इस दिशा में जल रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है।

जल रखते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान

जमीन पर न रखें: कांवड़ के जल को कभी भी सीधे फर्श पर नहीं रखना चाहिए। इसे हमेशा लकड़ी की साफ चौकी या ऊंचे स्थान पर रखें।

कपड़े का प्रयोग: चौकी पर लाल या पीले रंग का साफ कपड़ा बिछाकर उसके ऊपर ही जल का पात्र स्थापित करें।

दूरी और स्वच्छता: इस बात का ध्यान रखें कि जल वाले स्थान के आसपास गंदगी न हो और न ही किसी का पैर वहां लगे।

इन जगहों से बचाएं: कांवड़ के जल को बेडरूम या बाथरूम के पास वाली दीवार से सटाकर न रखें। साथ ही, इसके आसपास चमड़े (लेदर) से बनी चीजें जैसे बेल्ट, पर्स आदि नहीं होनी चाहिए।

शिवलिंग पर जलाभिषेक की सही विधि

कांवड़ के जल से भगवान शिव का अभिषेक करते समय कुछ सहज बातों का ध्यान रखना फलदायी माना जाता है:

स्नान और वस्त्र: जलाभिषेक से पहले स्नान करके साफ-सुथरे कपड़े पहनें। मन को शांत रखें।

सही पात्र का चुनाव: जल चढ़ाने के लिए तांबे, पीतल या चांदी के लोटे का उपयोग करना शुभ माना जाता है।

मंत्र का जाप: जल अर्पित करते समय ‘ॐ नमः शिवाय’ का ध्यानपूर्वक जाप करते रहें। हड़बड़ी में जल न चढ़ाएं।

बेलपत्र और धतूरा: जल चढ़ाने के बाद शिवलिंग पर तीन पत्तियों वाला अक्षत बेलपत्र, धतूरा और फूल अर्पित करें।

श्रद्धा और नियम के साथ किया गया यह छोटा सा प्रयास आपकी पूजा को पूर्णता देता है और घर में सुख-शांति बनाए रखता है।

Advertisement

Ganga

गंगा 'दून हॉराइज़न' में धर्म और ज्योतिष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें वैदिक ज्योतिष, पंचांग, व्रत-त्योहार और वास्तु शास्त्र का गहरा ज्ञान और वर्षों का अनुभव है। गंगा का उद्देश्य सिर्फ दैनिक राशिफल बताना नहीं, बल्कि धर्म और अध्यात्म से जुड़ी सटीक, शोध-आधारित और प्रामाणिक जानकारी आम जनमानस तक पहुंचाना है। वह ज्योतिषीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं का गहराई से विश्लेषण करती हैं। उनकी तथ्यपरक लेखनी पाठकों को अंधविश्वास से दूर रखकर एक सकारात्मक मार्गदर्शन प्रदान करती है, जिससे वे डिजिटल पाठकों के बीच एक बेहद भरोसेमंद नाम बन गई हैं।

Leave a Comment