कोटद्वार, 26 मई (दून हॉराइज़न)। कुछ महीने पहले कोटद्वार में एक मुस्लिम दुकानदार के बचाव में आकर रातों-रात चर्चा में आए दीपक कुमार इन दिनों भारी आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
‘मोहम्मद दीपक’ के नाम से सोशल मीडिया पर वायरल हुए दीपक का कोटद्वार स्थित ‘हल्क’ जिम अब बंदी की कगार पर पहुंच गया है। वे पिछले चार महीने का किराया नहीं चुका पाए हैं और अब जिम का सामान बेचकर शहर छोड़ने व कहीं और नौकरी तलाशने का मन बना रहे हैं।
42 वर्षीय दीपक का आरोप है कि बजरंग दल और भाजपा से जुड़े लोग उनके व्यवसाय को सुनियोजित तरीके से नुकसान पहुंचा रहे हैं। उनका दावा है कि ये लोग जिम आने वाले युवाओं और उनके परिजनों के घर जाकर उन्हें रोक रहे हैं।
इस दबाव के चलते जिम में सदस्यों की संख्या घटकर मात्र 60-65 रह गई है। दीपक के मुताबिक, इस संख्या से जिम का 40 हजार रुपये मासिक किराया और संचालन का अन्य खर्च निकालना संभव नहीं हो पा रहा है।
हालांकि, जिम के मकान मालिक रवि कुमार मनराल ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने दीपक को जगह खाली करने का कोई अल्टीमेटम नहीं दिया है। मनराल के अनुसार, उन्होंने केवल बकाया किराये को लेकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। वहीं, मामले की प्रशासनिक स्थिति पर कोटद्वार के इंस्पेक्टर प्रदीप नेगी ने जानकारी दी कि जिम सदस्यों को धमकाने या रोकने के संबंध में पुलिस को अब तक कोई आधिकारिक शिकायत नहीं मिली है।
यह पूरा विवाद इस साल 26 जनवरी को शुरू हुआ था। कोटद्वार के पटेल मार्ग पर 70 वर्षीय वकील अहमद की ‘बाबा’ नाम से कपड़ों की दुकान थी। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने इस नाम पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि कोटद्वार में सिर्फ एक ही बाबा (सिद्धबलि हनुमान) हैं। जब भीड़ दुकानदार पर नाम बदलने का दबाव बना रही थी, तब दीपक अकेले उनके बचाव में उतर आए थे।

इसी दौरान उनका वह वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने हिंदू संगठनों को जवाब देते हुए कहा था, “मेरा नाम मोहम्मद दीपक है… मैं न हिंदू हूं, न मुसलमान, सबसे पहले मैं एक इंसान हूं।”
इस घटना के बाद 31 जनवरी को दुकान और जिम के बाहर भारी विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिसके बाद पुलिस ने तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की थीं। इन मुकदमों में दीपक पर उपद्रवियों पर हमला करने का आरोप लगा था।
मार्च में दीपक ने एफआईआर रद्द कराने के लिए उत्तराखंड हाईकोर्ट का रुख किया था। जस्टिस राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने न केवल उनकी याचिका खारिज कर दी, बल्कि मामले के विचाराधीन रहने तक उन्हें सोशल मीडिया पर घटना से जुड़ी कोई भी पोस्ट करने से प्रतिबंधित भी कर दिया था।










