नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर उन्हें नमन करते हुए देश के इतिहास और पिछली सरकारों के रवैये पर खुलकर बात की है।
‘पराक्रम दिवस’ के मौके पर पीएम ने एक्स (X) पर सिलसिलेवार पोस्ट में कहा कि नेताजी निर्भीक नेतृत्व और अटूट देशभक्ति के प्रतीक थे। उन्होंने स्पष्ट आरोप लगाया कि दशकों तक देश पर राज करने वालों ने जानबूझकर नेताजी के योगदान को हाशिये पर डाला, क्योंकि वे उनके एजेंडे में फिट नहीं बैठते थे।
‘एजेंडे में फिट नहीं थे, इसलिए भुला दिया गया’
प्रधानमंत्री ने कहा कि नेताजी के गौरवशाली योगदान को याद करना कुछ लोगों की राजनीति के अनुकूल नहीं था। इसी कारण उन्हें भुलाने के प्रयास किए गए। मोदी ने अपनी सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए कहा, “हमारी मान्यताएं अलग हैं। हमने हर संभव अवसर पर उनके आदर्शों को लोकप्रिय बनाया है।”
उन्होंने नेताजी से जुड़ी फाइलों और दस्तावेजों को सार्वजनिक (Declassification) करने के फैसले को एक ऐतिहासिक कदम बताया, जिसने देश को सच्चाई जानने का मौका दिया।
गुजरात के हरिपुरा से पुराना नाता
अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल को याद करते हुए पीएम मोदी ने बताया कि नेताजी ने उन्हें हमेशा प्रेरित किया है। उन्होंने 23 जनवरी 2009 की घटना का जिक्र किया, जब गुजरात के सीएम रहते हुए उन्होंने ‘ई-ग्राम विश्वग्राम योजना’ शुरू की थी। यह योजना हरिपुरा से शुरू हुई थी, जिसका नेताजी के जीवन में खास स्थान है।
मोदी ने याद किया कि हरिपुरा के लोगों ने उनका स्वागत उसी सड़क पर रैली निकालकर किया था, जिस पर कभी नेताजी चले थे। इसके अलावा, 2012 में अहमदाबाद में आजाद हिंद फौज दिवस पर एक बड़ा कार्यक्रम हुआ था, जिसमें पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पी.ए. संगमा और नेताजी से प्रेरित कई लोग शामिल हुए थे।
लाल किले से अंडमान तक बदलाव
पीएम मोदी ने 2018 को दो वजहों से खास बताया। पहला, लाल किले पर आजाद हिंद सरकार की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ मनाई गई, जहां उनकी मुलाकात इंडियन नेशनल आर्मी (INA) के दिग्गज ललती राम से हुई। दूसरा, अंडमान-निकोबार के श्रीविजयपुरम (तत्कालीन पोर्ट ब्लेयर) में नेताजी द्वारा तिरंगा फहराने के 75 साल पूरे होने का जश्न मनाया गया।
सरकार ने रॉस आइलैंड का नाम बदलकर ‘नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप’ रखा। प्रधानमंत्री ने बताया कि लाल किले के क्रांति मंदिर संग्रहालय में नेताजी की टोपी और आईएनए से जुड़ी ऐतिहासिक सामग्री को संरक्षित किया गया है, ताकि नई पीढ़ी उनके योगदान को समझ सके।
इंडिया गेट पर औपनिवेशिक मानसिकता का अंत
नरेंद्र मोदी ने 2021 में कोलकाता के नेताजी भवन के अपने दौरे को याद किया, जहां से नेताजी का ऐतिहासिक ‘महान पलायन’ शुरू हुआ था। उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक मानसिकता (Colonial Mindset) को खत्म करने की दिशा में सरकार ने इंडिया गेट के पास नेताजी की भव्य प्रतिमा स्थापित की।
यह स्थान पहले खाली था या ब्रिटिश प्रतीकों से जुड़ा था। पीएम ने कहा कि यह प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को मजबूत भारत के निर्माण के लिए लगातार प्रेरित करती रहेगी।



















