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SIR Controversy : राहुल गांधी का संसद में धमाका, SIR को बताया वोट चोरी की साजिश

Published on: December 9, 2025 7:32 PM
SIR Controversy : राहुल गांधी का संसद में धमाका, SIR को बताया वोट चोरी की साजिश
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नई दिल्ली : संसद के शीतकालीन सत्र का मंगलवार का दिन बेहद गरमागरम रहा। लोकसभा में जैसे ही चुनाव सुधार और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का मुद्दा छुआ, सदन में आग सी लग गई। एक तरफ विपक्ष ने इसे “वोटरिष्ठ नागरिकों, गरीबों और अल्पसंख्यकों के वोट काटने की साजिश” बताया, तो दूसरी तरफ सरकार ने कहा कि यह सिर्फ फर्जी और डुप्लीकेट वोटरों को हटाने की साफ-सफाई है।

दोपहर 12 बजे से शुरू हुई इस बहस के लिए पूरे 10 घंटे का समय रखा गया था। सदन में कई बार शोर-शराबा हुआ, लेकिन स्पीकर ओम बिरला ने सख्ती दिखाते हुए व्यवस्था बनाए रखी।

राहुल गांधी ने SIR को बताया “राष्ट्र-विरोधी कदम”

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सबसे तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि SIR के नाम पर पूरे देश में सुनियोजित तरीके से असली मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं। राहुल ने इसे “वोट चोरी का खतरनाक खेल” करार दिया और आरोप लगाया कि सरकार आरएसएस के इशारे पर काम कर रही है।

राहुल ने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि विपक्ष के नेता को पैनल में बुलाया तो गया, लेकिन उनकी कोई भूमिका नहीं रखी गई। साथ ही ईवीएम को लेकर भी पुराना सवाल दोहराया कि आज तक उन्हें मशीन का पूरा डेमो नहीं दिया गया।

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने खोली पोल

बहस की शुरुआत करने वाले मनीष तिवारी ने कहा कि SIR को चलाने का चुनाव आयोग के पास कोई ठोस कानूनी आधार ही नहीं है। उन्होंने मांग की कि सरकार सदन में लिखित जवाब दे कि आखिर यह प्रक्रिया क्यों और कैसे चल रही है। तिवारी ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में मुख्य न्यायाधीश और लोकसभा में विपक्ष के नेता को शामिल करने की पुरानी मांग भी दोहराई।

अखिलेश यादव ने भी साधा निशाना

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ बूथ लेवल अधिकारियों पर भारी दबाव डाला जा रहा है ताकि खास समुदायों के वोटरों के नाम कटवाए जाएँ।

भाजपा ने दिया मुंहतोड़ जवाब

सत्ता पक्ष की ओर से डॉ. संजय जायसवाल और निशिकांत दुबे ने पलटवार किया। निशिकांत दुबे ने याद दिलाया कि ईवीएम का सबसे पहला पायलट प्रोजेक्ट तो 1980 में राजीव गांधी की सरकार ने ही चलाया था। वहीं संजय जायसवाल ने कहा कि वोटर लिस्ट को साफ करना कोई नई बात नहीं, यह हर चुनाव से पहले होता रहा है। उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसा कि 1947 में नेहरू जी ने ही सबसे पहला “वोट चोरी” का उदाहरण दिया था।

असल में SIR क्या है और क्यों हो रहा विवाद?

विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR इस समय 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इसकी समय-सीमा बढ़ाई गई है। सरकार का दावा है कि इससे डुप्लीकेट, मृत और स्थानांतरित हो चुके लोगों के नाम हट रहे हैं। लेकिन विपक्ष का कहना है कि इससे लाखों गरीब, प्रवासी मजदूर, मुस्लिम और दलित मतदाता प्रभावित हो रहे हैं, जो आने वाले विधानसभा चुनावों (खासकर पश्चिम बंगाल) में सत्ताधारी गठबंधन को फायदा पहुंचा सकता है।

आगे भी जारी रहेगा हंगामा?

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि जरूरत पड़ी तो बुधवार को भी इस पर चर्चा होगी। शीतकालीन सत्र 19 दिसंबर तक चलेगा, लेकिन SIR और चुनाव सुधार का यह मुद्दा पूरे सत्र में गरमाता रहेगा, इसमें कोई शक शक नहीं।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. 📧 Email: harpreetssoni9@gmail.com

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