दून हॉराइज़न, हरिद्वार (20 सितंबर) : देश के सबसे जघन्य आपराधिक मामलों में गिने जाने वाले निठारी कांड से बरी होकर हरिद्वार में सामान्य जिंदगी तलाश रहे सुरेंद्र कोली की संदिग्ध मौत (Surinder Koli Death Mystery) ने नया मोड़ ले लिया है। हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में अपनी छोटी सी चाय की दुकान के भीतर फंदे से लटके मिले कोली का शनिवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया। मौत की वजह जहां पुलिस प्रथम दृष्टया आत्महत्या मान रही है, वहीं परिजनों ने इसे सोची-समझी हत्या करार दिया है।
परिजनों का गंभीर आरोप – ‘दबाए जा रहे हैं निठारी के राज’
शनिवार को मोर्चरी पहुंचे परिजनों ने मामले में निष्पक्ष जांच की मांग उठा दी। मूल रूप से उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के मंगरूखाल निवासी सुरेंद्र के परिजनों का सीधा आरोप है कि कोली को उस खौफनाक कांड के कई भीतरी राज मालूम थे। उन्हें डर था कि कहीं सच बाहर न आ जाए, लिहाजा उसकी हत्या कर इसे सुसाइड की शक्ल दी गई।

मौके पर पहुंचे पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत ने कानूनी प्रक्रिया और पोस्टमार्टम पूरा कराने में मदद की। उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया था। हालांकि पुलिस का कहना है कि मौके की परिस्थितियों को देखते हुए शुरुआती जांच फंदे से लटकने की ओर इशारा कर रही है, लेकिन मौत की असल वजह विसरा और विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही साफ हो पाएगी।
बेटे से चंद माह पहले हुई थी सुलह, पत्नी और बेटी नहीं पहुंचीं
अंतिम संस्कार बेहद सादगी और खामोशी के बीच हुआ। गंगा तट पर कुल 6 लोग मौजूद थे। सुरेंद्र का 20 वर्षीय इकलौता बेटा हरिद्वार पहुंचा था। असल में, करीब दो दशक तक जेल में रहने के बाद जब कोली बरी हुआ, तो इसी साल जून में पहली बार पिता-पुत्र का आमना-सामना हुआ था। वर्षों की कड़वाहट और दूरियां मिट गई थीं। पर तकदीर ने इस नए रिश्ते को लंबा चलने नहीं दिया।
अल्मोड़ा के मासी से पहुंचे भाई आनंद राम और दिल्ली से आए चंदन राम व हरीश कोली ने अंतिम रस्में निभाईं। लेकिन सुरेंद्र की पत्नी और बेटी अंतिम दर्शन तक के लिए नहीं आईं। 20 साल तक जेल की चारदीवारी में जिस परिवार की राह कोली तकता रहा, वह अधूरापन उसकी चिता की राख तक साथ गया।
पंढेर की नोएडा स्थित डी-5 कोठी पर सुनवाई 26 सितंबर तक टली
इधर सुरेंद्र की मौत से उपजे विवाद के बीच गाजियाबाद स्थित स्पेशल सीबीआई कोर्ट में निठारी के कुख्यात डी-5 बंगले को लेकर कानूनी हलचल तेज रही। सेक्टर-31 का यह बंगला पिछले करीब दो दशकों से सील पड़ा है। बंगले के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर और उनकी पत्नी देवेंद्र कौर ने इसे रिलीज करने के लिए संयुक्त अर्जी लगाई है। शनिवार को वकीलों की हड़ताल के चलते इस मामले पर जिरह नहीं हो सकी। स्पेशल जज अवनीश कुमार पांडेय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 26 सितंबर की तारीख मुकर्रर की है।









