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Tiryaka Tadasana Benefits : पाचन सुधारेगा और चर्बी घटाएगा यह आसान योग, जानें सही विधि

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Rama Pun Updated Thu, 19 Feb 2026 04:00 PM IST

भागदौड़ भरी जीवनशैली में शारीरिक और मानसिक समस्याओं से निपटने के लिए तिर्यक ताड़ासन एक अत्यंत प्रभावी और सरल योग अभ्यास है। यह आसन न केवल रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन को बढ़ाता है, बल्कि पाचन तंत्र को सुधारने और तनाव कम करने में भी सहायक सिद्ध होता है।

Tiryaka Tadasana Benefits

मुख्य बातें

  • तिर्यक ताड़ासन को उर्ध्व हस्तोतानासन भी कहा जाता है, जो ताड़ासन का ही एक विस्तृत और प्रभावी रूप है।
  • यह आसन विशेष रूप से रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन, फेफड़ों की कार्यक्षमता और पाचन में सुधार के लिए जाना जाता है।
  • मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योग के अनुसार, सजगता और सही श्वसन प्रक्रिया इसके लाभ को कई गुना बढ़ा देती है।
  • हर्निया, हृदय रोग या हाल ही में सर्जरी कराने वाले व्यक्तियों को इसे विशेषज्ञ की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए।
  • बेहतर परिणामों के लिए इसे सुबह खाली पेट 3 से 5 बार दोहराने की सलाह दी जाती है।

Tiryaka Tadasana Benefits : आज की आधुनिक और अव्यवस्थित जीवनशैली ने इंसान को शारीरिक और मानसिक रूप से काफी थका दिया है। तनाव, पाचन संबंधी विकार और पीठ दर्द जैसी समस्याएं अब हर दूसरे व्यक्ति की कहानी बन चुकी हैं।

इन परिस्थितियों में योग एक रक्षक की भूमिका निभाता है। मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योग के विशेषज्ञों के अनुसार, तिर्यक ताड़ासन एक ऐसा सरल अभ्यास है जो शरीर और मन दोनों को संतुलित रखने की क्षमता रखता है।

क्या है तिर्यक ताड़ासन?

तिर्यक ताड़ासन को ‘उर्ध्व हस्तोतानासन’ के नाम से भी पहचाना जाता है। सरल शब्दों में कहें तो यह ताड़ासन का ही एक उन्नत रूप है जिसमें खड़े होकर शरीर को दाईं और बाईं ओर झुकाया जाता है।

इस आसन की मुख्य विशेषता यह है कि यह पूरे शरीर को एक बेहतरीन स्ट्रेच प्रदान करता है। यदि इसे पूरी सजगता और सही श्वास प्रक्रिया के साथ किया जाए, तो इसके परिणाम चमत्कारी हो सकते हैं।

अभ्यास की सही विधि

इस आसन को करने के लिए सबसे पहले ताड़ासन की मुद्रा में सीधे खड़े हो जाएं। अपने दोनों पैरों के बीच कंधों के बराबर दूरी बनाए रखें और शरीर को बिल्कुल सीधा रखें। अब गहरी सांस भरते हुए दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फंसाएं (इन्टरलॉक करें) और हथेलियों को आसमान की ओर रखते हुए सिर के ऊपर सीधा उठाएं। इस दौरान कोहनियां मुड़नी नहीं चाहिए।

अगले चरण में सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे कमर के ऊपरी हिस्से को दाईं ओर झुकाएं। ध्यान रहे कि शरीर आगे या पीछे की ओर न झुके। इस स्थिति में करीब 10 से 30 सेकंड तक रुकें और सामान्य गति से सांस लेते रहें। यही प्रक्रिया दूसरी ओर भी दोहराएं। शरीर की क्षमता के अनुसार इसे 3 से 5 बार करना पर्याप्त होता है।

स्वास्थ्य पर इसके व्यापक लाभ

तिर्यक ताड़ासन के नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी में गजब का लचीलापन आता है, जिससे पुराने कमर दर्द में राहत मिलती है। यह पेट और आंतों की हल्की मालिश करता है, जिससे कब्ज दूर होती है और पाचन तंत्र सुचारू होता है। इसके अलावा, यह कंधे, बगल और छाती की मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करता है।

फेफड़ों के फैलाव के कारण ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर होता है, जिससे सांस लेने की क्षमता बढ़ती है। मानसिक स्तर पर यह तनाव और थकान को कम कर एकाग्रता में सुधार लाता है। जो लोग वजन कम करना चाहते हैं, उनके लिए यह कमर की अतिरिक्त चर्बी घटाने और शरीर की ऊर्जा बढ़ाने का एक शानदार तरीका है।

जरूरी सावधानियां और परामर्श

योग का पूरा लाभ तभी मिलता है जब उसे सही सावधानी के साथ किया जाए। इस आसन का अभ्यास हमेशा सुबह खाली पेट करना सबसे उत्तम रहता है। झुकते समय गति को धीमा रखें और झटके न दें।

यदि किसी को गर्दन, कमर या कंधे में गंभीर चोट है, या वह हर्निया, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग से पीड़ित है, तो उसे योग विशेषज्ञ की देखरेख में ही अभ्यास करना चाहिए। हाल ही में हुई किसी भी सर्जरी के बाद बिना डॉक्टरी सलाह के इसे शुरू न करें।

Rama Pun

रमा पुन 'दून हॉराइज़न' में हेल्थ और लाइफस्टाइल संपादक के रूप में अपनी अहम जिम्मेदारी निभा रही हैं। स्वास्थ्य, फिटनेस, खानपान और मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) के विषयों पर उनकी पकड़ बेहद मजबूत है। रमा का फोकस हमेशा मेडिकल एक्सपर्ट्स की पुख्ता सलाह और वैज्ञानिक शोध पर आधारित (Evidence-based) खबरें लिखने पर रहता है। उनका स्पष्ट मानना है कि सेहत से जुड़ी कोई भी जानकारी शत-प्रतिशत प्रामाणिक होनी चाहिए। अपनी आकर्षक और तथ्यपरक लेखनी से वे पाठकों को एक स्वस्थ, तनावमुक्त और संतुलित जीवनशैली अपनाने के लिए निरंतर प्रेरित और जागरूक करती हैं।

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