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Uttarakhand Monsoon : उत्तराखंड में जून के अंत तक पहुंचेगा मानसून, अल नीनो के कारण उत्तर भारत में थमी रफ्तार

उत्तराखंड में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने से अब यह जून के अंत तक राज्य में पहुंचेगा। मौसम विभाग के इस अलर्ट के बाद उत्तर भारत में तपती गर्मी और उमस का दौर अभी लंबा चलने वाला है।

Uttarakhand Monsoon : उत्तराखंड में जून के अंत तक पहुंचेगा मानसून, अल नीनो के कारण उत्तर भारत में थमी रफ्तार

HIGHLIGHTS

  • जून के आखिर तक राज्य में पहुंचेगा मानसून
  • उत्तरकाशी और चमोली में तेज बारिश की संभावना
  • अल नीनो की वजह से मानसून की रफ्तार थमी
  • हरिद्वार और उधमसिंह नगर में शुष्क रहेगा मौसम

Uttarakhand Monsoon : उत्तराखंड में मानसून की तय तारीख 22 से 25 जून अब पूरी तरह फेल हो चुकी है। रीजनल मौसम केंद्र के डायरेक्टर सीएस तोमर ने साफ किया है कि मौजूदा हालात में मानसून अब जून के आखिर तक ही राज्य की सीमा में प्रवेश कर पाएगा। उत्तर पश्चिमी राज्यों की तरफ बढ़ रहे बादलों की रफ्तार अचानक थम गई है।

मैदानी जिलों में लगातार आसमान से आग बरस रही है। मौसम विभाग के नए बुलेटिन ने हरिद्वार और उधम सिंह नगर की टेंशन बढ़ा दी है। इन दोनों जिलों में 25 जून तक मौसम पूरी तरह शुष्क रहेगा। यहां किसी तरह की राहत के आसार नहीं हैं।

उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली और पिथौरागढ़ को लेकर नया अलर्ट जारी हुआ है। इन पहाड़ी इलाकों में गर्जन के साथ तेज बारिश हो सकती है। राज्य के बाकी हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का पूर्वानुमान है। ऊंचाई वाले कुछ इलाकों में बर्फबारी भी देखने को मिल सकती है।

देरी से आ रहे मानसून ने उत्तर भारत का पूरा कृषि शेड्यूल बिगाड़ कर रख दिया है। खेती और पानी की उपलब्धता पर सीधा संकट खड़ा हो गया है। समय पर बारिश पर निर्भर रहने वाले किसानों का बुवाई चक्र बुरी तरह बाधित हो रहा है। गर्मी और उमस का यह जानलेवा दौर यूपी, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में लंबा खिंचेगा।

अल नीनो ने बिगाड़ा पैटर्न

मौसम विशेषज्ञों ने इस मानसून की सुस्ती का सीधा कनेक्शन ‘अल नीनो’ से जोड़ा है। मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान बढ़ने से यह वेदर पैटर्न एक्टिव हुआ है। इसी वजह से भारत के कई हिस्सों में मानसून कमजोर पड़ गया है और बारिश सामान्य से काफी कम हो रही है।

इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने इसका अनुमान पहले ही लगा लिया था। इस साल दक्षिण एशिया के ज्यादातर हिस्सों में मानसून के दौरान सामान्य से अधिक गर्मी रहेगी और सूखे जैसे हालात बनेंगे।

दक्षिण-पश्चिम मानसून ने इस बार केरल में भी तीन दिन की देरी से 1 जून को दस्तक दी थी। आईएमडी के मुताबिक बादलों की उत्तरी सीमा अभी प्रायद्वीपीय और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों पर अटकी हुई है। अगले कुछ दिनों में यह सिस्टम तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ की तरफ मुड़ेगा। उत्तर भारत के लिए फिलहाल बादलों की कोई ठोस प्रगति रडार पर नजर नहीं आ रही।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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