Parenting Tips : अक्सर भारतीय घरों में एक आम शिकायत सुनने को मिलती है—बच्चा किताबों से दूर भागता है। माता-पिता इस चिंता में अक्सर बच्चों पर दबाव बनाते हैं या डांटते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि डांटने से बच्चे किताबों से और दूर हो सकते हैं। अगर आपके बच्चे का मन भी किताबों में नहीं लग रहा, तो टेंशन लेने के बजाय अपनी पेरेंटिंग रणनीति में थोड़ा बदलाव करने की जरूरत है।
खुद मिसाल बनें, फोन छोड़ें
बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने आसपास देखते हैं। अगर माता-पिता खाली समय में सिर्फ मोबाइल फोन स्क्रॉल करते रहेंगे, तो बच्चा भी वही करेगा। बच्चे को पढ़ने के लिए कहने से पहले आपको खुद उदाहरण पेश करना होगा।
दिन में कम से कम आधा घंटा खुद भी कोई किताब या अखबार पढ़ें। जब बच्चा आपको पढ़ते हुए देखेगा, तो वह भी नैसर्गिक रूप से किताबें हाथ में लेना शुरू कर देगा।
सिलेबस से हटकर किताबें दें
सिर्फ स्कूली सिलेबस का दबाव बच्चों को पढ़ाई से विमुख कर सकता है। शुरुआत में बच्चे को उसकी पसंद और रुचि वाली अन्य किताबें पढ़ने को दें।
जब बच्चा अपनी मनपसंद कहानियाँ या कॉमिक्स पढ़ता है, तो उसकी रीडिंग हैबिट बनती है। यही आदत धीरे-धीरे उसे सिलेबस की किताबों में भी रुचि लेने में मदद करती है।
रंगीन चित्रों का जादू
छोटे बच्चों का दिमाग विजुअल्स यानी चित्रों की तरफ जल्दी आकर्षित होता है। शुरुआती दिनों में उन्हें ऐसी किताबें दें जिनमें बड़े और रंगीन चित्र हों।
पिक्चर बुक्स सिर्फ देखने में अच्छी नहीं होतीं, बल्कि ये बच्चों की कल्पनाशक्ति को बढ़ाती हैं। चित्रों के जरिए वे कहानी को समझते हैं और किताबों के प्रति उनका लगाव गहरा होता है।
लाइब्रेरी और बुक फेयर का अनुभव
बच्चों को घर की चारदीवारी से बाहर निकालकर किताबों की दुनिया में ले जाना जरूरी है। मौका मिलने पर उन्हें लाइब्रेरी या बुक फेयर जरूर ले जाएं।
वहां ढेरों किताबों के बीच जब बच्चा खुद अपनी पसंद की किताब चुनता है, तो उसमें उत्साह आता है। अपनी चुनी हुई किताब को बच्चा ज्यादा जिम्मेदारी और मन लगाकर पढ़ता है।















