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Parenting Tips : बच्चे का मन पढ़ाई में नहीं लगता? डांटने के बजाय आजमाएं ये 4 आसान तरीके

अक्सर माता-पिता बच्चों के पढ़ाई में मन न लगने की शिकायत करते हैं और उन्हें डांटने लगते हैं, लेकिन यह तरीका गलत है। मनोवैज्ञानिक तरीकों से बच्चों में पढ़ने की आदत डाली जा सकती है। अगर आप खुद फोन छोड़कर किताबें पढ़ेंगे, तो बच्चा भी आपको देखकर वही सीखेगा। सही माहौल और पसंद की किताबें बच्चों को पढ़ाई के करीब ला सकती हैं।

Published on: February 5, 2026 9:19 AM
Parenting Tips
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HIGHLIGHTS

  • बच्चों को सिर्फ सिलेबस नहीं, उनकी पसंद की किताबें पढ़ने के लिए भी प्रोत्साहित करें।
  • छोटे बच्चों की कल्पनाशक्ति बढ़ाने के लिए रंगीन और बड़े चित्रों वाली किताबें (Picture Books) बेस्ट हैं।
  • बच्चे माता-पिता की नकल करते हैं, इसलिए खुद फोन छोड़कर दिन में 30 मिनट रीडिंग करें।
  • लाइब्रेरी और बुक फेयर ले जाने से बच्चों में किताबें खुद चुनने की समझ और जिम्मेदारी आती है।

Parenting Tips : अक्सर भारतीय घरों में एक आम शिकायत सुनने को मिलती है—बच्चा किताबों से दूर भागता है। माता-पिता इस चिंता में अक्सर बच्चों पर दबाव बनाते हैं या डांटते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि डांटने से बच्चे किताबों से और दूर हो सकते हैं। अगर आपके बच्चे का मन भी किताबों में नहीं लग रहा, तो टेंशन लेने के बजाय अपनी पेरेंटिंग रणनीति में थोड़ा बदलाव करने की जरूरत है।

खुद मिसाल बनें, फोन छोड़ें

बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने आसपास देखते हैं। अगर माता-पिता खाली समय में सिर्फ मोबाइल फोन स्क्रॉल करते रहेंगे, तो बच्चा भी वही करेगा। बच्चे को पढ़ने के लिए कहने से पहले आपको खुद उदाहरण पेश करना होगा।

दिन में कम से कम आधा घंटा खुद भी कोई किताब या अखबार पढ़ें। जब बच्चा आपको पढ़ते हुए देखेगा, तो वह भी नैसर्गिक रूप से किताबें हाथ में लेना शुरू कर देगा।

सिलेबस से हटकर किताबें दें

सिर्फ स्कूली सिलेबस का दबाव बच्चों को पढ़ाई से विमुख कर सकता है। शुरुआत में बच्चे को उसकी पसंद और रुचि वाली अन्य किताबें पढ़ने को दें।

जब बच्चा अपनी मनपसंद कहानियाँ या कॉमिक्स पढ़ता है, तो उसकी रीडिंग हैबिट बनती है। यही आदत धीरे-धीरे उसे सिलेबस की किताबों में भी रुचि लेने में मदद करती है।

रंगीन चित्रों का जादू

छोटे बच्चों का दिमाग विजुअल्स यानी चित्रों की तरफ जल्दी आकर्षित होता है। शुरुआती दिनों में उन्हें ऐसी किताबें दें जिनमें बड़े और रंगीन चित्र हों।

पिक्चर बुक्स सिर्फ देखने में अच्छी नहीं होतीं, बल्कि ये बच्चों की कल्पनाशक्ति को बढ़ाती हैं। चित्रों के जरिए वे कहानी को समझते हैं और किताबों के प्रति उनका लगाव गहरा होता है।

लाइब्रेरी और बुक फेयर का अनुभव

बच्चों को घर की चारदीवारी से बाहर निकालकर किताबों की दुनिया में ले जाना जरूरी है। मौका मिलने पर उन्हें लाइब्रेरी या बुक फेयर जरूर ले जाएं।

वहां ढेरों किताबों के बीच जब बच्चा खुद अपनी पसंद की किताब चुनता है, तो उसमें उत्साह आता है। अपनी चुनी हुई किताब को बच्चा ज्यादा जिम्मेदारी और मन लगाकर पढ़ता है।

Rama Pun

रमा पुन एक प्रशिक्षित और अनुभवी लेखिका हैं, जो हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी खबरों में विशेषज्ञता रखती हैं। विभिन्न न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स पर 3 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, रमा पाठकों के लिए सटीक और रोचक कंटेंट तैयार करती हैं। उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी खूबी जटिल स्वास्थ्य विषयों को सरल और आम बोलचाल की भाषा में प्रस्तुत करना है, जिससे आम पाठक भी उसे आसानी से समझ सकें। 📧 Email: punr29638@gmail.com

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