नई दिल्ली, 24 जनवरी। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजरें अब 25 फरवरी की तारीख पर टिक गई हैं. नेशनल काउंसिल जॉइंट मॉनिटरिंग कमेटी (NCJMC) इस दिन एक निर्णायक बैठक करने जा रही है.
मुद्दा साफ है—8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) में सैलरी बढ़ोतरी का फॉर्मूला क्या होगा. फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशंस (FNPO) ने फिटमेंट फैक्टर को 3 करने का प्रस्ताव दिया है, जिससे सैलरी का गणित पूरी तरह बदल सकता है. नवंबर में अधिसूचना जारी होने के बाद से ही विभागों में हलचल तेज है.
फिटमेंट फैक्टर 2 रहा तो क्या होगा?
अगर सरकार नियमों को कड़ा रखते हुए फिटमेंट फैक्टर को ‘2’ तय करती है, तो इसका सीधा असर आपकी बेसिक सैलरी पर दिखेगा. नेक्सडिग्म सॉल्यूशंस के आंकड़ों को देखें तो लेवल-1 कर्मचारी (चपरासी या एंट्री लेवल) की मौजूदा बेसिक सैलरी 18,000 रुपये है.
फैक्टर 2 होने पर यह दोगुनी होकर 36,000 रुपये हो जाएगी. यानी सीधे तौर पर 18,000 रुपये की बढ़ोतरी. वहीं, लेवल-10 के अधिकारियों की सैलरी 56,100 से बढ़कर 1,12,200 रुपये हो जाएगी. सबसे टॉप लेवल यानी कैबिनेट सेक्रेटरी स्तर (लेवल-18) पर यह सैलरी 5 लाख रुपये तक पहुंच जाएगी.
फैक्टर 3 होने पर सैलरी का नया गणित
कर्मचारी संगठनों की मांग फैक्टर 3 या उससे ज्यादा की है. अगर सरकार FNPO की मांग मान लेती है, तो यह उछाल किसी लॉटरी से कम नहीं होगा. इस फॉर्मूले के तहत लेवल-1 के कर्मचारी की बेसिक सैलरी सीधे 54,000 रुपये पहुंच जाएगी.
यह फैक्टर 2 वाली सैलरी के मुकाबले काफी ज्यादा है. लेवल-10 के अधिकारियों की सैलरी 1,68,300 रुपये और लेवल-18 पर यह 7.5 लाख रुपये तक जा सकती है. FNPO ने अपनी 60 पन्नों की रिपोर्ट में पे-मैट्रिक्स और भत्तों में बदलाव का सुझाव दिया है, ताकि बढ़ती महंगाई से निपटा जा सके.
25 फरवरी को तैयार होगा फाइनल ड्राफ्ट
आयोग के गठन की अधिसूचना के बाद अब प्रक्रिया अगले चरण में है. FNPO सदस्य शिवाजी वासिरेड्डी के मुताबिक, 25 फरवरी की मीटिंग में सभी कर्मचारी संगठनों की मांगों का एक फाइनल ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा.
बैठक के बाद यह ड्राफ्ट 8वें वेतन आयोग की चेयरपर्सन रंजना प्रकाश देसाई को सौंपा जाएगा. आयोग के पास अपनी रिपोर्ट देने के लिए 18 महीने का वक्त है. जानकारों के मुताबिक, नई वेतन दरें 2027 के अंत या 2028 की शुरुआत में लागू हो सकती हैं. फिलहाल, असली लड़ाई फिटमेंट फैक्टर के आंकड़े को लेकर ही है.



















