Auto Stocks Crash : मंगलवार का दिन भारतीय ऑटो कंपनियों के लिए भारी गुजरा. महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M), मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और हुंडई के शेयरों में 5% तक की बड़ी गिरावट देखी गई.
बाजार में यह डर फैल गया है कि भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच होने वाले फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से विदेशी गाड़ियां सस्ती हो जाएंगी, जिसका सीधा असर भारतीय कंपनियों की बिक्री पर पड़ेगा.
टैक्स कटौती की खबर से हड़कंप
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत सरकार यूरोपीय कारों पर इंपोर्ट टैक्स को मौजूदा 110% से घटाकर सीधे 40% करने पर विचार कर रही है. यह भारी छूट 15,000 यूरो (करीब $17,739) से ज्यादा कीमत वाली कारों पर मिल सकती है.
दोनों पक्ष इस समझौते के बेहद करीब हैं और इसे जल्द ही अंतिम रूप दिया जा सकता है. अगर ऐसा हुआ, तो फॉक्सवैगन, रेनॉल्ट और स्टेलेंटिस जैसी यूरोपीय कार कंपनियों के साथ-साथ लग्जरी ब्रांड मर्सिडीज-बेंज और BMW के लिए भारतीय बाजार में उतरना आसान और सस्ता हो जाएगा.
देसी कंपनियों को क्यों सता रहा डर?
भारतीय कंपनियां लंबे समय से इस तरह की टैक्स कटौती का विरोध करती रही हैं. उनका तर्क है कि ड्यूटी कम होने से बाहर से आने वाली गाड़ियां ज्यादा सस्ती और प्रतिस्पर्धी हो जाएंगी, जिससे भारत में मैन्युफैक्चरिंग और निवेश पर बुरा असर पड़ेगा.
इसी आशंका के चलते निफ्टी ऑटो इंडेक्स 2.2% टूट गया. सबसे ज्यादा नुकसान महिंद्रा एंड महिंद्रा को हुआ, जिसके शेयर 5.1% गिरकर अगस्त 2025 के निचले स्तर पर आ गए. हुंडई मोटर इंडिया 4.5% नीचे गिरा, जबकि मारुति सुजुकी के शेयर 3% और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स की वैल्यू में 2% की गिरावट दर्ज की गई.
क्या वाकई खतरा इतना बड़ा है?
बाजार की इस घबराहट के बीच एमके ग्लोबल के विश्लेषकों ने थोड़ी अलग राय रखी है. उनका मानना है कि अगर यह समझौता भारत-यूके FTA जैसा ही रहता है, तो भारतीय पैसेंजर व्हीकल (PV) कंपनियों पर इसका असर बहुत कम होगा. इसकी वजह यह है कि पूरी तरह बनी हुई (CBU) इंपोर्टेड गाड़ियां आमतौर पर 1 करोड़ से 1.5 करोड़ रुपये वाली सुपर लग्जरी श्रेणी तक ही सीमित हैं.
आंकड़े बताते हैं कि भारतीय कार बाजार में यूरोपीय कंपनियों की हिस्सेदारी अभी 4% से भी कम है. इसके अलावा, BMW, मर्सिडीज और ऑडी जैसी प्रीमियम कंपनियां पहले से ही अपनी 70% से ज्यादा गाड़ियां भारत में ही असेंबल कर रही हैं, इसलिए ड्यूटी घटने का जमीनी असर सीमित रह सकता है.
दोपहिया कंपनियों के लिए अच्छी खबर
जहां कार कंपनियों के शेयर गिरे, वहीं दोपहिया वाहन निर्माताओं के लिए यह समझौता नई उम्मीद लेकर आया है. एमके ग्लोबल ने कहा कि भारत से यूरोपीय संघ में मोटरसाइकिलों पर अभी करीब 8% इंपोर्ट ड्यूटी लगती है. इसमें संभावित कटौती बजाज ऑटो और TVS मोटर जैसी कंपनियों के लिए बहुत सकारात्मक होगी.
बजाज (जो KTM और Triumph बनाती है) और TVS (BMW और Norton) बड़े एक्सपोर्टर्स हैं. ड्यूटी कम होने से यूरोप में उनकी बाइक की कीमतें कम होंगी और मांग बढ़ेगी.



















