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Budget 2026 : वरिष्ठ नागरिकों की पेंशन 1500 रुपये करने का प्रस्ताव, बजट से उम्मीदें

बजट 2026 से पहले वरिष्ठ नागरिकों और विशेषज्ञों ने सरकार के सामने स्वास्थ्य सुरक्षा और आर्थिक राहत की ठोस मांगें रखी हैं. इसमें 10 लाख रुपये तक की आय को टैक्स-फ्री करने और बुजुर्गों की न्यूनतम पेंशन 1000 रुपये प्रति माह करने का प्रस्ताव शामिल है. साथ ही, होम केयर को बीमा के दायरे में लाने की सिफारिश भी की गई है.

Published on: January 27, 2026 5:21 PM
Budget 2026 : वरिष्ठ नागरिकों की पेंशन 1500 रुपये करने का प्रस्ताव, बजट से उम्मीदें
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HIGHLIGHTS

  1. टैक्स में छूट: 10 लाख रुपये तक की सालाना आय टैक्स-फ्री और धारा 80TTB की सीमा 1 लाख करने की मांग.
  2. पेंशन वृद्धि: 60+ के लिए 1000 रुपये और 80+ के लिए 1500 रुपये मासिक पेंशन का प्रस्ताव.
  3. बीमा का दायरा: होम केयर और असिस्टेड लिविंग को हेल्थ इंश्योरेंस में शामिल करने की सिफारिश.
  4. ग्रामीण फोकस: बुजुर्गों की आजीविका के लिए 'एल्डर सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स' को बढ़ावा देने की जरूरत.

Budget 2026 : बदलते सामाजिक परिवेश और एकल परिवारों के चलन के बीच भारत के वरिष्ठ नागरिकों की निगाहें आगामी बजट 2026 पर टिकी हैं.

इलाज के बढ़ते खर्च और सीमित आय को देखते हुए विशेषज्ञों ने सरकार से पेंशन, हेल्थ इंश्योरेंस और टैक्स स्लैब में बड़े बदलावों की सिफारिश की है, ताकि बुजुर्ग सम्मानजनक जीवन जी सकें.

सीनियर केयर और बीमा की विसंगतियां

भारत में लोग अब लंबा जीवन जी रहे हैं, लेकिन लंबी उम्र के साथ गंभीर बीमारियां भी बढ़ी हैं. अंतरा सीनियर केयर के एमडी और सीईओ रजित मेहता के मुताबिक, बजट को ‘सीनियर केयर इकोसिस्टम’ को स्पष्ट दिशा देनी चाहिए. सबसे बड़ी चुनौती यह है कि दीर्घकालिक देखभाल (Long-term care) अभी बीमा के दायरे से बाहर है.

अंतरा असिस्टेड केयर सर्विसेज के सीईओ ईशान खन्ना बताते हैं कि आम परिवारों के लिए देखभाल सेवाएं बहुत महंगी साबित हो रही हैं. बीमा पॉलिसियों में होम केयर और असिस्टेड लिविंग शामिल नहीं होने से बुजुर्गों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है. विशेषज्ञों ने ‘केयरगिविंग’ को एक मान्यता प्राप्त पेशा बनाने और गैर-चिकित्सकीय स्टाफ की विशेष ट्रेनिंग पर जोर दिया है.

स्वास्थ्य सुरक्षा और पेंशन का गणित

हेल्पएज इंडिया की नीति प्रमुख अनुपमा दत्ता ने स्वास्थ्य बीमा और पेंशन को बुजुर्गों की सबसे बड़ी चिंता बताया है. उनका कहना है कि पीएमजेएवाई (PMJAY) ने 70 वर्ष से ऊपर के लोगों को सुरक्षा दी है, लेकिन 60 से 70 वर्ष के बीच के कई बुजुर्ग अब भी स्वास्थ्य कवच से वंचित हैं.

निजी बीमा का प्रीमियम बुजुर्गों की जेब पर भारी पड़ रहा है. मांग है कि सरकार और बीमा कंपनियां मिलकर एक सब्सिडी मॉडल तैयार करें. साथ ही, 45-60 आयु वर्ग के लोगों को भविष्य के लिए जागरूक करना भी जरूरी है.

पेंशन में बढ़ोतरी की दरकार

राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) के तहत मिलने वाली पेंशन राशि में लंबे समय से बदलाव नहीं हुआ है. अनुपमा दत्ता ने प्रस्ताव रखा है कि 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों की न्यूनतम पेंशन 1000 रुपये और 80 वर्ष से अधिक वालों के लिए 1500 रुपये प्रति माह होनी चाहिए. ग्रामीण क्षेत्रों में बुजुर्गों को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के लिए ‘एल्डर सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स’ को बढ़ावा देने की भी सिफारिश की गई है.

टैक्स स्लैब और डिजिटल सुरक्षा

आर्थिक मोर्चे पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए टैक्स राहत की बड़ी मांग उठी है. प्रस्ताव के अनुसार, सीनियर सिटीजन्स के लिए सालाना 10 लाख रुपये तक की आय को पूरी तरह टैक्स-फ्री किया जाना चाहिए. इसके अलावा, धारा 80TTB के तहत एफडी (FD) ब्याज पर मिलने वाली छूट की सीमा 50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख रुपये करने की मांग है.

डिजिटल दौर में बुजुर्गों के साथ बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए डिजिटल साक्षरता और उपकरणों तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करना भी बजट की प्राथमिकता सूची में शामिल करने का सुझाव दिया गया है.

Rajat Sharma

रजत शर्मा बतौर ऑथर करीब 3 साल से दून हॉराइज़न से जुड़े हुए हैं। मूल रूप से देहरादून (उत्तराखंड) के रहने वाले रजत शर्मा दून हॉराइज़न में बिजनेस सेक्शन के लिए खबरें लिखते हैं। उन्हें बिजनेस सेक्शन के अलग-अलग जॉनर की खबरों की समझ है। इसमें स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, यूटिलिटी आदि शामिल हैं। करीब 7 साल से मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय रजत ने यहां से पहले कई और मीडिया संस्थानों में बतौर कंटेंट राइटर काम किया है। उन्हें रिपोर्टिंग का भी अनुभव है। 📧 Email: info.dhnn@gmail.com

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