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Budget 2026: क्या 12 साल बाद बदलेगी 80C की लिमिट? टैक्सपेयर्स को बड़ी आस

बजट 2026 नजदीक आते ही ओल्ड टैक्स रिजीम (OTR) के तहत टैक्स छूट की सीमा बढ़ाने की मांग तेज हो गई है। धारा 80C और 80D की लिमिट 2014-15 से नहीं बदली है, जबकि महंगाई और खर्च कई गुना बढ़ चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का फोकस न्यू टैक्स रिजीम (NTR) पर है, जिससे पुरानी व्यवस्था में राहत की उम्मीद कम नजर आ रही है।

Published on: January 24, 2026 4:37 PM
Budget 2026: क्या 12 साल बाद बदलेगी 80C की लिमिट? टैक्सपेयर्स को बड़ी आस
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HIGHLIGHTS

  • धारा 80C की 1.5 लाख रुपये की लिमिट 2014 के बाद से जस की तस है।
  • मेडिकल इंश्योरेंस (80D) और होम लोन ब्याज (Section 24b) की छूट सीमा महंगाई के मुकाबले काफी कम हो गई है।
  • 80% से ज्यादा टैक्सपेयर्स न्यू टैक्स रिजीम (NTR) अपना चुके हैं, इसलिए सरकार OTR में बदलाव से बच सकती है।
  • चार्टर्ड अकाउंटेंट डॉ. सुरेश सुराना के मुताबिक, 80C की लिमिट 3 लाख रुपये तक बढ़नी चाहिए।

नई दिल्ली, 24 जनवरी। बजट 2026 की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है और इसके साथ ही ओल्ड टैक्स रिजीम (OTR) में बने रहने वाले करदाताओं की बेचैनी भी बढ़ गई है। सबसे बड़ी शिकायत यह है कि पिछले एक दशक में कमाई और महंगाई तो तेजी से बढ़ी, लेकिन टैक्स बचाने वाले प्रमुख डिडक्शंस (कटौतियों) की सीमा वहीं की वहीं रुकी हुई है।

सवाल यह है कि क्या वित्त मंत्री इस बार पुरानी व्यवस्था वालों को राहत देंगी या फिर न्यू टैक्स रिजीम (NTR) की तरफ जाने का इशारा और सख्त होगा।

धारा 80C: 2014 की लिमिट, 2026 का खर्च

नौकरीपेशा लोगों के लिए टैक्स बचाने का सबसे बड़ा हथियार धारा 80C है। इसमें पीएफ (PF), एलआईसी (LIC), बच्चों की ट्यूशन फीस और होम लोन का मूलधन शामिल होता है। वित्त अधिनियम 2014 के बाद से इसकी सीमा 1.5 लाख रुपये पर फिक्स है।

चार्टर्ड अकाउंटेंट डॉ. सुरेश सुराना ने एफई की रिपोर्ट में बताया कि यह लिमिट आज के दौर में नाकाफी है। मिडिल क्लास परिवारों के लिए लॉन्ग टर्म सेविंग और बच्चों की पढ़ाई का खर्च काफी बढ़ चुका है। सुराना का सुझाव है कि इसकी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए सरकार को बजट 2026 में इस लिमिट को बढ़ाकर 3 लाख रुपये करना चाहिए या इसे महंगाई दर से जोड़ना चाहिए।

बीमारी और घर का खर्च बढ़ा, लेकिन छूट नहीं

महंगाई की मार सिर्फ बचत पर नहीं, बल्कि इलाज और घर खरीदने पर भी पड़ी है। धारा 80D के तहत हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर मिलने वाली छूट (स्वयं/परिवार के लिए 25,000 रुपये और सीनियर सिटीजंस के लिए 50,000 रुपये) आखिरी बार 2015 में रिवाइज हुई थी। कोरोना महामारी के बाद प्रीमियम राशि में भारी उछाल आया है, जिससे यह लिमिट अब ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही है।

यही हाल घर खरीदारों का है। धारा 24(b) के तहत होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली 2 लाख रुपये की छूट 2014 से नहीं बदली है। शहरों में प्रॉपर्टी के दाम आसमान छू रहे हैं और होम लोन की ईएमआई का बड़ा हिस्सा ब्याज में जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि 2 लाख की इस सीमा को प्रॉपर्टी की वैल्यू या स्टाम्प ड्यूटी के मानकों से जोड़ा जाना चाहिए ताकि टैक्सपेयर्स को वास्तविक राहत मिल सके।

सरकार क्यों नहीं बढ़ा रही लिमिट?

टैक्सपेयर्स की लगातार मांग के बावजूद पिछले कुछ बजट सत्रों में सरकार ने ओल्ड टैक्स रिजीम (OTR) में बदलाव नहीं किया है। इसका कारण सरकार की स्पष्ट नीति है। सरकार का पूरा जोर न्यू टैक्स रिजीम (NTR) को बढ़ावा देने पर है, जिसमें टैक्स की दरें कम हैं लेकिन कोई छूट नहीं मिलती।

आंकड़े बताते हैं कि 80 फीसदी से ज्यादा करदाता पहले ही एनटीआर (NTR) में शिफ्ट हो चुके हैं। यदि सरकार ओल्ड रिजीम में छूट बढ़ाती है, तो लोग वापस पुरानी व्यवस्था की तरफ लौट सकते हैं, जिससे सरकार का न्यू रिजीम का मिशन धीमा पड़ जाएगा।

बजट 2026 में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन पुरानी लिमिट्स को अपडेट करती है या इन्हें धीरे-धीरे खत्म होने के लिए छोड़ देती है।

Rajat Sharma

रजत शर्मा बतौर ऑथर करीब 3 साल से दून हॉराइज़न से जुड़े हुए हैं। मूल रूप से देहरादून (उत्तराखंड) के रहने वाले रजत शर्मा दून हॉराइज़न में बिजनेस सेक्शन के लिए खबरें लिखते हैं। उन्हें बिजनेस सेक्शन के अलग-अलग जॉनर की खबरों की समझ है। इसमें स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, यूटिलिटी आदि शामिल हैं। करीब 7 साल से मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय रजत ने यहां से पहले कई और मीडिया संस्थानों में बतौर कंटेंट राइटर काम किया है। उन्हें रिपोर्टिंग का भी अनुभव है। 📧 Email: info.dhnn@gmail.com

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