CPSE Gratuity Rules : केंद्र सरकार ने केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी नियमों को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। सार्वजनिक उद्यम विभाग (DPE) ने ग्रेच्युटी भुगतान से जुड़े कंसॉलिडेटेड (एकीकृत) दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों का मुख्य मकसद पात्रता, समयसीमा और 20 लाख रुपये की अधिकतम सीमा को लेकर चल रहे भ्रम को खत्म करना है।
10 लाख से 20 लाख हुई सीमा का गणित
सार्वजनिक उद्यम विभाग ने स्पष्ट किया है कि भुगतान ग्रेच्युटी अधिनियम-1972 में हुए संशोधनों के बाद नियमों में बदलाव आया था। पहले ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये थी। भुगतान ग्रेच्युटी (संशोधन) अधिनियम, 2018 के जरिए धारा 4(3) में बदलाव किया गया।
इस संशोधन के बाद ग्रेच्युटी की सीमा को केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर जारी अधिसूचनाओं से जोड़ दिया गया। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर तय किया था कि 29 मार्च 2018 से ग्रेच्युटी की सीलिंग 20 लाख रुपये होगी। अब इन सभी पुराने निर्देशों को एक ही दस्तावेज में शामिल कर दिया गया है ताकि कोई दुविधा न रहे।
2016 से नहीं मिलेगा लाभ
वित्त मंत्रालय के सार्वजनिक उद्यम विभाग (DPE) ने कर्मचारियों के बीच सबसे बड़े भ्रम को दूर किया है। दरअसल, 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर केंद्र सरकार ने अपने केंद्रीय कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी की सीमा 1 जनवरी 2016 से 20 लाख रुपये कर दी थी।
CPSE कर्मचारियों को लगता था कि उन्हें भी इसी तारीख से लाभ मिलेगा। विभाग ने साफ कर दिया है कि यह लाभ CPSE कर्मचारियों पर 2016 से लागू नहीं होता। यानी, CPSE कर्मी 1 जनवरी 2016 से बढ़ी हुई सीमा का दावा नहीं कर सकते। उनके लिए यह प्रभावी तारीख 29 मार्च 2018 ही रहेगी।
मंत्रालयों को सख्त निर्देश
DPE ने सभी प्रशासनिक मंत्रालयों और विभागों को निर्देश दिया है कि वे इन कंसॉलिडेटेड गाइडलाइंस का कड़ाई से पालन करें। उन्हें अपने अधीन आने वाले सभी CPSEs को इन नियमों की जानकारी देने को कहा गया है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी कर्मचारी को ग्रेच्युटी भुगतान में देरी न हो और सभी जगह एक समान नियम लागू रहें।



















