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टियर-1 शहरों में हेल्थ इंश्योरेंस फेल? 14% लोग बीमारी में ले रहे पर्सनल लोन

पैसाबाजार की ‘द पर्सनल लोन स्टोरी’ रिपोर्ट ने भारतीयों की आर्थिक मजबूरियों पर एक चौंकाने वाला खुलासा किया है. रिपोर्ट बताती है कि देश में 11% लोग हेल्थ इंश्योरेंस न होने के कारण मेडिकल इमरजेंसी के लिए पर्सनल लोन ले रहे हैं. वहीं, छोटे शहरों (टियर-3) में लोग रोजमर्रा के खर्च चलाने के लिए कर्ज लेने को मजबूर हैं, जो आर्थिक चुनौतियों की गंभीर तस्वीर पेश करता है.

Published on: January 24, 2026 4:11 PM
टियर-1 शहरों में हेल्थ इंश्योरेंस फेल? 14% लोग बीमारी में ले रहे पर्सनल लोन
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HIGHLIGHTS

  • मेडिकल इमरजेंसी: देश में 11% लोग इलाज के लिए कर्ज लेते हैं; महानगरों में यह आंकड़ा 14% है.
  • सबसे बड़ा कारण: 48% लोग घर की मरम्मत और घरेलू जरूरतों के लिए पर्सनल लोन का विकल्प चुनते हैं.
  • लाइफस्टाइल और शौक: 7.5 से 10 लाख रुपये सालाना कमाने वाला वर्ग (40%) लाइफस्टाइल सुधारने के लिए लोन ले रहा है.
  • छोटे शहरों का संकट: टियर-3 शहरों में दैनिक खर्चों के लिए लोन लेने की संभावना महानगरों से 2.4 गुना अधिक है.

Personal Loan Trends India : अक्सर यह माना जाता है कि लोग पर्सनल लोन का इस्तेमाल शानदार छुट्टियों या महंगे गैजेट्स खरीदने के लिए करते हैं. लेकिन जमीनी हकीकत इस धारणा से बिल्कुल उलट है.

पैसाबाजार की कंज्यूमर रिसर्च रिपोर्ट ‘द पर्सनल लोन स्टोरी’ बताती है कि भारतीय परिवार शौक पूरा करने के लिए नहीं, बल्कि मेडिकल इमरजेंसी और घर की जरूरतों जैसी मजबूरियों से निपटने के लिए कर्ज का सहारा ले रहे हैं.

इलाज के लिए कर्ज और इंश्योरेंस की कमी

सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि भारत में पर्सनल लोन लेने की एक बड़ी वजह स्वास्थ्य संकट है. रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 11% लोग बीमारी और अस्पताल के भारी-भरकम बिल भरने के लिए बैंक या वित्तीय संस्थानों से पैसा उधार लेते हैं.

यह आंकड़ा साफ करता है कि देश में इलाज महंगा हो रहा है और बड़ी आबादी के पास पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज मौजूद नहीं है.

महानगरों यानी टियर-1 सिटीज (दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद) में स्थिति ज्यादा गंभीर है. इन बड़े शहरों में मेडिकल इमरजेंसी के लिए लोन लेने वालों की संख्या 14% तक पहुंच गई है. इसकी तुलना में टियर-2 शहरों में यह आंकड़ा 10% और टियर-3 शहरों में 8% है.

घर की मरम्मत सबसे बड़ी प्राथमिकता

बीमारी के अलावा, सिर पर छत और घर का रखरखाव कर्ज लेने का सबसे बड़ा कारण बनकर उभरा है. रिपोर्ट के अनुसार, लगभग आधे यानी 48% लोग अपने घर की जरूरतों को पूरा करने या अचानक आई घर की मरम्मत (Home Renovation) के लिए पर्सनल लोन लेते हैं.

यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि भारतीय परिवारों के लिए घर का रख-रखाव प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर है.

छोटे शहरों और मिडिल क्लास का अलग संघर्ष

यह रिसर्च देश के 23 शहरों में 2,889 लोगों से बातचीत पर आधारित है. इसमें छोटे शहरों (टियर-3) और महानगरों के बीच आर्थिक व्यवहार में बड़ा अंतर दिखा है. टियर-3 शहरों के निवासी अपनी रोजमर्रा की जरूरतों (Daily Expenses) को पूरा करने के लिए पर्सनल लोन पर ज्यादा निर्भर हैं.

आंकड़ों के मुताबिक, टियर-1 शहरों की तुलना में टियर-3 शहरों के लोगों द्वारा दैनिक खर्चों के लिए लोन लेने की संभावना 2.4 गुना अधिक है.

दूसरी तरफ, 7.5 लाख से 10 लाख रुपये सालाना आय वाला मिडिल क्लास अपनी दबी हुई ख्वाहिशों को पूरा करने में लगा है. इस आय वर्ग के 40% लोग अपनी लाइफस्टाइल को अपग्रेड करने के लिए लोन ले रहे हैं. कुल मिलाकर 36% लोग जीवनशैली सुधारने और 16% लोग बिजनेस बढ़ाने के लिए पर्सनल लोन का रास्ता चुनते हैं.

Rajat Sharma

रजत शर्मा बतौर ऑथर करीब 3 साल से दून हॉराइज़न से जुड़े हुए हैं। मूल रूप से देहरादून (उत्तराखंड) के रहने वाले रजत शर्मा दून हॉराइज़न में बिजनेस सेक्शन के लिए खबरें लिखते हैं। उन्हें बिजनेस सेक्शन के अलग-अलग जॉनर की खबरों की समझ है। इसमें स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, यूटिलिटी आदि शामिल हैं। करीब 7 साल से मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय रजत ने यहां से पहले कई और मीडिया संस्थानों में बतौर कंटेंट राइटर काम किया है। उन्हें रिपोर्टिंग का भी अनुभव है। 📧 Email: info.dhnn@gmail.com

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