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Healthcare and AI Budget 2026 : मानसिक स्वास्थ्य और सस्ती दवाओं पर सरकार का बड़ा फोकस

भारत सरकार ने हेल्थकेयर बजट 2026 में पहली बार 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का ऐतिहासिक आवंटन किया है। इसके साथ ही 'IndiaAI' मिशन के तहत देश अब केवल तकनीक का इस्तेमाल करने के बजाय खुद का एआई बुनियादी ढांचा तैयार करने पर जोर दे रहा है। टैक्स प्रणाली में भी एआई के समावेश से पारदर्शिता और गति बढ़ाने की रणनीति तैयार की गई है।

Published on: February 2, 2026 9:34 AM
Healthcare and AI Budget 2026 : मानसिक स्वास्थ्य और सस्ती दवाओं पर सरकार का बड़ा फोकस
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HIGHLIGHTS

  1. हेल्थकेयर सेक्टर के लिए पहली बार 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट आवंटित।
  2. IndiaAI मिशन के जरिए कंप्यूटिंग क्षमता, डेटा एक्सेस और टैलेंट निर्माण पर फोकस।
  3. टैक्स असेसमेंट और दस्तावेजों की समीक्षा को एआई के जरिए तेज और सटीक बनाने की योजना।
  4. एआई के इस्तेमाल में 'ह्यूमन इन द लूप' यानी इंसानी निगरानी को अनिवार्य रखने पर जोर।

Healthcare and AI Budget 2026 : वित्त वर्ष 2026 के बजट में सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं की सूरत बदलने के लिए खजाना खोल दिया है। हेल्थकेयर सेक्टर को पहली बार 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि आवंटित की गई है।

इस निवेश का सीधा असर मानसिक स्वास्थ्य और सस्ती इलाज सुविधाओं पर पड़ेगा। सरकार का लक्ष्य अब आधुनिक तकनीक के जरिए आम आदमी तक बेहतर चिकित्सा पहुंचाना है।

IndiaAI मिशन: इस्तेमाल से निर्माण की ओर भारत

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 की चर्चाओं के बीच भारत ने साफ कर दिया है कि एआई अब केवल एक तकनीक नहीं बल्कि रणनीतिक मुद्दा है। IndiaAI मिशन के जरिए भारत खुद को एआई बनाने वाले देश के रूप में स्थापित कर रहा है। इसके लिए कंप्यूटिंग संसाधनों और राष्ट्रीय स्तर पर स्किल डेवलपमेंट पर भारी निवेश की उम्मीद है। यह मिशन भारत को वैश्विक एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में अग्रणी भूमिका दिलाएगा।

डिजिटल टैक्स प्रणाली में एआई का बढ़ता दखल

भारत का टैक्स ढांचा पिछले एक दशक में काफी डिजिटल हुआ है। जीएसटीएन और फेसलेस असेसमेंट के बाद अब एआई पूरे वर्कफ्लो को संभाल रहा है। यह तकनीक अब जटिल टैक्स मामलों को सुलझाने और जोखिमों की पहचान करने में मदद कर रही है। इससे टैक्स विभाग और करदाताओं के बीच होने वाली कागजी कार्रवाई कम होगी और काम में पारदर्शिता आएगी।

तकनीक के साथ इंसानी निगरानी जरूरी

एआई की रफ्तार को देखते हुए सरकार गवर्नेंस और सुरक्षा के तालमेल पर काम कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि एआई इंसानों की जगह लेने के लिए नहीं बल्कि उनकी क्षमता बढ़ाने के लिए है। इसलिए ‘ह्यूमन इन द लूप’ सिस्टम को अनिवार्य माना गया है। इससे डेटा की विश्वसनीयता बनी रहेगी और कानूनी जटिलताओं में किसी भी तरह की मानवीय चूक की संभावना कम होगी।

Parul Sharma

पारुल शर्मा 'दून हॉराइज़न' के बिज़नेस और फाइनेंस विभाग में एक प्रमुख आवाज़ हैं। पिछले एक वर्ष से, वह उत्तराखंड और राष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक नीतियों, बाज़ार के रुझानों और कॉर्पोरेट जगत की खबरों का विश्लेषण कर रही हैं। पारुल ने रांची विश्वविद्यालय से अपनी स्नातकोत्तर की शिक्षा पूरी की है। पारुल का उद्देश्य पाठकों तक ऐसी खबरें पहुँचाना है जो न केवल तथ्यात्मक हों, बल्कि उनके वित्तीय निर्णयों में मददगार भी साबित हों। 📧 Email: babitaupadhyay803@gmail.com

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