High-Speed Rail Corridor : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट पेश करते हुए देश के रेल बुनियादी ढांचे के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना साझा की है। सरकार ने देश के विभिन्न हिस्सों में 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने का निर्णय लिया है।
यह पहल प्रमुख शहरों और आर्थिक केंद्रों को एक तेज, सुरक्षित और अत्याधुनिक रेल नेटवर्क से जोड़ने के लिए की गई है। इस कदम से न केवल यात्रियों के समय की बचत होगी, बल्कि देश के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों के विकास को भी नई दिशा मिलेगी।
इन रूटों पर दौड़ेगी हाई-स्पीड ट्रेन
प्रस्तावित योजना के तहत मुंबई-पुणे कॉरिडोर को प्राथमिकता दी गई है, जो महाराष्ट्र के इन दो बड़े शहरों के बीच दैनिक यात्रियों के लिए सफर को बेहद आसान बना देगा। इसी कड़ी में उत्तर भारत के लिए दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा गया है, जो राष्ट्रीय राजधानी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच संपर्क को नई मजबूती देगा।
अन्य महत्वपूर्ण रूटों में पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु और वाराणसी-सिलीगुड़ी शामिल हैं। ये कॉरिडोर दक्षिण और मध्य भारत के प्रमुख आईटी हब और औद्योगिक केंद्रों को आपस में जोड़ेंगे।
आर्थिक विकास और लॉजिस्टिक्स पर प्रभाव
सरकार का मानना है कि इस हाई-स्पीड नेटवर्क से व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसरों में भारी बढ़ोतरी होगी। रेल नेटवर्क के विस्तार से सामान की आवाजाही तेज होगी, जिससे लॉजिस्टिक्स की लागत में कमी आएगी।
यह योजना देश की आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार देने में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगी। इसके जरिए सरकार का लक्ष्य बड़े औद्योगिक क्लस्टर्स को निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करना है, जिससे वैश्विक स्तर पर भारतीय व्यापार की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ सके।
बुनियादी ढांचे पर रिकॉर्ड निवेश
हाई-स्पीड रेल की यह घोषणा सरकार की व्यापक विकास रणनीति का हिस्सा है। वित्त मंत्री ने वित्त वर्ष 2027 के लिए 12.2 लाख करोड़ रुपये के सरकारी पूंजीगत खर्च (Capex) का प्रस्ताव रखा है। यह आंकड़ा वित्त वर्ष 2026 के 11.2 लाख करोड़ रुपये के बजट अनुमान से अधिक है।
तुलनात्मक रूप से देखें तो 2014-15 में पूंजीगत खर्च महज 2 लाख करोड़ रुपये था। खर्च में यह कई गुना बढ़ोतरी स्पष्ट करती है कि सरकार बुनियादी ढांचे को ही आर्थिक प्रगति का मुख्य इंजन मानकर चल रही है।



















